Agriculture News : इन दिनों खरीफ की मुख्य फसल धान की रोपाई /बुवाई का कार्य जोर-शोर से चल रहा है। किसान सूखे खेतों में सीड ड्रिल मशीन के माध्यम से धान की सीधी बुवाई और मजदूर या पैडी ट्रांसप्लांटर से नर्सरी में तैयार धान के पौधों की रोपाई कर रहे हैं। ऐसे में किसान धान की अच्छी पैदावार ले सके और रोपाई कार्य समय से पूर्ण कर सके, इसके लिए राज्य सरकारें सिंचाई की पर्याप्त सुविधा किसानों को उपलब्ध कराने का प्रयास कर रही है। इस कड़ी में हरियाणा सरकार ने किसानों को बड़ी राहत दी है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने किसानों के हित में बड़ा फैसला करते हुए खेतों में लगे बिजली ट्रांसफार्मर के चोरी होने या खराब होने पर उनसे शुल्क नहीं वसूलने का निर्णय लिया है। यह दिशा-निर्देश तत्काल प्रभाव से लागू भी कर दिए गए हैं। सरकार के इस फैसले से प्रदेशभर के छह हजार किसानों को लाभ होगा। इससे पहले, किसानों को ट्रांसफार्मर की कीमत की 20 प्रतिशत तक राशि जमा करानी पड़ती थी।
हरियाणा विद्युत नियामक आयोग (एचईआरसी) के प्रवक्ता ने इस पर जानकारी देते हुए बताया कि मुख्यमंत्री नायब सैनी की ओर से लिए गए निर्णय के अनुसार 15 जनवरी, 2024 को अधिसूचित एचईआरसी विद्युत आपूर्ति संहिता विनियमन, 2014 में संशोधन किया गया है। संशोधन के अनुसार, अब उपभोक्ताओं से ट्रांसफार्मर के चोरी या प्राकृतिक आपदाओं से खराब होने की स्थिति में बदलने या मरम्मत करवाने के लिए किसी भी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जाएगा। दिशा-निर्देश तत्काल प्रभाव से पूरे राज्य में लागू कर दिए गए हैं। राज्य सरकार के फैसले से हरियाणा के किसानों को लाभ होगा।
एचईआरसी के प्रवक्ता ने बताया कि इससे पहले किसानों सहित अन्य बिजली उपभोक्ताओं को बिजली का एलटी (लो-टेंशन) कनेक्शन का ट्रांसफार्मर चोरी होने पर नया ट्रांसफार्मर लगाने या खराब होने के कारण बदले जाने की स्थिति में कीमत का 20 प्रतिशत तक शुल्क का भुगतान करना होता था। वारंटी पीरियड खत्म होने की स्थिति में ट्रांसफार्मर बदलने के लिए कीमत का सिर्फ 10 प्रतिशत तक शुल्क जमा करवाया जाता था, जबकि 90 प्रतिशत राशि बिजली निगम द्वारा वहन की जाती थी। ट्रांसफार्मर बदलने या मरम्मत करने पर किसानों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ पड़ता था। सरकार ने किसानों को राहत पहुंचाने के लिए मौजूदा प्रावधानों में संशोधन किया है, ताकि किसानों पर अतिरिक्त लागत बोझ को खत्म किया जा सके। इससे किसानों को बड़ी राहत मिलेगी।
संशोधन के अनुसार, हरियाणा बिजली विनियामक आयोग (एचईआरसी) ने इस संबंध में निर्देश जारी कर दिए हैं। घरेलू उपभोक्ताओं पर यह नियम लागू नहीं होंगे। प्राकृतिक घटनाओं यथा चक्रवात, बाढ़, तूफान से ट्रांसफार्मर खराब होने की स्थिति में मरम्मत या नया ट्रांसफार्मर लगाने का पूरा खर्च बिजली निगम वहन करेगा। हालांकि, अगर आवेदक स्वयं की लागत पर कार्य करवाना चाहता है, तो बिजली निगम अनुमानित लागत का 1.5 प्रतिशत की दर से पर्यवेक्षण शुल्क वसूल करेगा।रिचार्जिंग बोरवेल लगाने के लिए किसानों को वित्तीय सहायता
हरियाणा सरकार, फसलों के उत्पादन एवं उत्पादकता के लिए जल की खपत को कम करने की दिशा में आवश्यक प्रयास भी कर रही है। इसके लिए भूमिगत जल स्त्रोतों के संचयन के लिए वर्षा जल संग्रहण करने पर जोर दे रही है। भूमिगत जल स्तर को पुनः रिकवर करने के लिए राज्य सरकार वाटर रिचार्ज बोरवेल योजना के अंतर्गत किसानों के खेतों में रिचार्जिंग बोरवेल लगाती है। इन रिचार्जिंग बोरवेल के लिए किसानों को सिर्फ 25 हजार रुपए की लागत लगाना होता है, शेष राशि का खर्च राज्य सरकार द्वारा स्वयं वहन किया जाता है। रिचार्जिंग बोरवेल का लाभ लेने के लिए किसान भाईयों को सिंचाई एव जल संसाधान विभाग, हरियाणा सरकार की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर वाटर रिचार्ज बोरवेल योजना में ऑनलाइन आवेदन करना होगा।
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