फसल बीमा योजना : 5.60 लाख किसानों को 258 करोड़ रुपए का मुआवजा जारी

फसल बीमा योजना : 5.60 लाख किसानों को 258 करोड़ रुपए का मुआवजा जारी
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पीएमएफबीवाई : राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, असम, ओडिशा और आंध्र प्रदेश के किसानों को मिलेगा लाभ

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (पीएमएफबीवाई) योजना के तहत केंद्र सरकार ने अपने स्तर पर बीमा क्लेम के लिए 258 करोड़ रुपए जारी किए है। इससे 8 राज्यों में करीब 5.60 लाख किसानों को फायदा होगा।  

crop compensation : केंद्र सरकार ने बतौर बीमा क्लेम के लिए जारी किए  258 करोड़ रुपए, वेबसाइट पर जाकर ऐसे चेक करें नाम 

Prime Minister Crop Insurance Scheme : केंद्र की मोदी सरकार देश के किसानों के लिए प्रतिबद्ध है। इसलिए केंद्र सरकार ने महत्वपूर्ण नीतिगत निर्णय के तहत, स्टेट प्रीमियम लंबित होने से किसानों को बीमा क्लेम मिलने में होने वाली कठिनाइयों से राहत प्रदान करते हुए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत 8 राज्यों के लगभग 5.60 लाख लाभार्थी किसानों को अपने स्तर पर 258 करोड़ रुपए की धनराशि बतौर बीमा क्लेम जारी किए हैं। इनमें गुजरात, महाराष्ट्र, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, असम, ओडिशा और आंध्र प्रदेश के किसान शामिल हैं। जिन किसानों ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत अपनी फसल का बीमा कराया था और राज्य सरकार द्वारा प्रीमियम लंबित से अपने फसल मुआवजा का इंतजार कर रहे थे ऐसे किसान प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (पीएमएफबीवाई) की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर अपना नाम देख सकते हैं। 

किसानों के नुकसान की जा रही है भरपाई

केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) में किसानों को और अधिक बेहतर सुविधा देने और सटीक उपज अनुमान एवं रज‍िस्ट्रेशन प्रक्रिया को सही से व्यवस्थित करने के लिए कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने बीते दिन यानी शुक्रवार को तीन महत्वपूर्ण कदम उठाए। इसमें येस्टेक (प्रौद्योगिकी पर आधारित उपज अनुमान प्रणाली), विंड्स (मौसम सूचना डेटा सूचना प्रणाली) और एआईडीई (मध्यस्थ नामांकन के लिए ऐप) किसानों को समर्पित किए गए हैं। राजधानी दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में केंद्रीय कृषि मंत्री तोमर ने कहा कि सरकार की इस महत्वकांक्षी योजना में किसानों का विश्वास बढ़ेगा और अधिक से अधिक किसान इसका लाभ उठा पाएंगे। कृषि का देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान है। कृषि के समक्ष कितनी भी अनुकूलता हो, इसके बाद भी किसानों को प्रकृति पर ही निर्भर रहना पड़ता है। प्रकृति नाराज हो जाए तो किसान अपने श्रम से इसकी भरपाई नहीं कर पाता है। इसलिए प्राकृतिक प्रकोप से होने वाले नुकसान की भरपाई प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के जरिए की जा रही है।  

किसानों को मुआवजा मिलने में नहीं आएगी द‍िक्कत

केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र की बीजेपी सरकार कृषि विकास के लिए प्रतिबद्ध है। इसलिए बजट में कमी नहीं आती है। जब कभी राज्य सरकारों के हिस्से का प्रीमियम जमा नहीं होता है तो ऐसे में किसानों को बीमा क्लेम मिलने में दिक्कत नहीं आएगी। केंद्र सरकार द्वारा समय पर जमा कराई जाने वाली अपने हिस्से के प्रीमियम के अंतर्गत ही किसानों को फसल मुआवजा देने का केंद्र ने फैसला लिया है, फिर भले ही तब तक राज्य सरकार द्वारा प्रीमियम जमा हो या नहीं। उन्होंने कहा कि कृषि के बजट को देखें तो 2013 की तुलना में लगभग 5 गुना की वृद्धि की गई। इनका सद्परिणाम भी दिख रहा है। हम खाद्यान्न, बागवानी, दुग्ध उत्पादन में दुनिया में अच्छी अवस्था में हैं। इसमें तकनीक एवं कृषि वैज्ञानिकों के अनुसंधान का भी महत्वपूर्ण योगदान है। मंत्री ने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार गांव-गरीब-किसान तीनों पर फोकस कर अनेक योजनाओं के माध्यम से गांवों के जीवन में बदलाव लाने, गरीबों का जीवन बदलने और किसानों को समृद्ध करने की दिशा में काम कर रही है। कृषि क्षेत्र में तकनीक के प्रयोग पर बल दिया गया। अच्छे खाद-बीज की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित की गई। 

योजना को कारगर बनाने के लिए लॉच किए पोर्टल व ऐप

कार्यक्रम में केंद्रीय कृषि व किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर तथा केंद्रीय पृथ्वी विज्ञान मंत्री किरेन रिजिजू मौजूद रहे। तोमर ने कहा कि आज तकनीक का उपयोग से हर किसान तक हर योजना की पहुंच हो सकती है। इसलिए मंत्रालय ने बहुतेरे काम करते हुए इंश्योरेंस मॉड्यूल भी बनाए, राज्य सरकारों को जोड़ा गया।  फसल बीमा योजना को और कारगर बनाने की दृष्टि से मैनुअल, पोर्टल व ऐप आज लांच किया गया है। हम सोचते थे कि मौसम की सही सूचना क्यों नहीं आ पाती है, अगर सूचना मिल भी जाए तो नीचे तक पहुंचाने का साधन नहीं होता था। इसलिए कोशिश की गई कि तकनीक का प्रयोग करके इसकी पहुंच गांव-गांव तक बनाई जाए। हर गांव में रेन वॉच टॉवर हो, विकास खंड स्तर पर वेदर स्टेशन आ सकें, ताकि मौसम की जानकारी विभाग व सरकार को मिल सके। जलवायु परिवर्तन के दौर में यह जरूरी भी है। उन्होंने कहा कि इसी तरह यह भी सुनिश्चित हुआ है कि एक व्यक्ति इंश्योरेंस के लिए मोबाइल के माध्यम से गांव-गांव व घर-घर जा सकता है। आज प्रारंभ की गई ये सुविधाएं सिर्फ प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (Prime Minister Crop Insurance Scheme)  ही नहीं, बल्कि कृषि क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव लाने वाली है। 

जलवायु परिवर्तन की चुनौति‍यों के समाधान के लिए म‍िलकर कार्य

पृथ्वी विज्ञान मंत्री रिजिजू ने कहा कि किसानों के जीवन में पीएमएफबीवाई की इन सुविधाओं से बहुत बड़ा बदलाव आएगा। हरित क्रांति के बाद, अब पिछले नौ साल में कृषि क्षेत्र में अद्भुत काम हुआ है और हम एक लीडिंग नेशन के रूप में उभरे हैं।  विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के माध्यम से कृषि क्षेत्र में किए जा रहे परिवर्तन बहुत महत्वपूर्ण है। जलवायु परिवर्तन के दौर में इन सबकी महत्ता और भी ज्यादा है। भविष्य की चुनौतियों के मद्देनजर हमें साइंटिफिक मैकेनिज्म तैयार करना होगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि कृषि मंत्रालय के साथ मिलकर उनका मंत्रालय जलवायु परिवर्तन से उपजने वाली चुनौतियों के समाधान के लिए बेहतर कार्य कर सकेगा। येस्टेक, उन्नत तकनीकी प्रणाली है जो सटीक उपज गणना में राज्यों की मदद करेगी। राज्यों में फसल उपज विवादों व उसके बाद पात्र किसानों को मुआवजा देने में होने वाली देरी से जुड़ी समस्याओं का समाधान करने के लिए केंद्र ने इस प्रणाली को लागू करने का फैसला लिया है।

मौसम संबंधी महत्पूर्ण जानकारी व आंकडे हो पाएंगे उपलब्ध

मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि विंड्स के माध्यम से किसानों के लिए मौसम संबंधी महत्वपूर्ण जानकारी व आंकड़े उपलब्ध हो पाएंगे। इससे योजना के सभी हितधारकों को लाभ होगा, विशेषतः किसान सूचित निर्णय लेने में सक्षम होंगे। अपर्याप्त बुनियादी ढांचे से सटीक मौसम संबंधी डेटा प्राप्त करने संबंधी चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए विंड्स पहल अंतर्गत मौसम केंद्रों के सशक्त नेटवर्क की स्थापना पर जोर दिया जा रहा है। इस पहल का लक्ष्य ब्लॉक व ग्राम पंचायत स्तर पर मौसम केंद्रों का व्यापक नेटवर्क स्थापित करना है। यह रणनीतिक दृष्टिकोण सटीक व समय पर मौसम डेटा तक व्यापक पहुंच सुनिश्चित करेगा। मौसम की जानकारी की उपलब्धता में अंतर कम करना व जमीनी स्तर पर निर्णयकर्ताओं, किसानों व हितधारकों को सशक्त बनाना है।  मौसम केंद्रों का यह व्यापक नेटवर्क मौसम के पैटर्न की सटीक निगरानी करने, प्रभावी योजना बनाने, जोखिम मूल्यांकन व मौसम संबंधी चुनौतियों का समय पर जवाब देने में सक्षम बनाएगा। 

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