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मोटे अनाज की खेती - इन राज्यों में सरकार से मिलेगी 10,000 रुपये की सब्सिडी 

मोटे अनाज की खेती - इन राज्यों में सरकार से मिलेगी 10,000 रुपये की सब्सिडी 
पोस्ट -09 दिसम्बर 2022 शेयर पोस्ट

मोटे अनाज की खेती -  सरकार से मिलेगी 10,000 रुपये प्रति हेक्टेयर अनुदान राशि 

मोटे अनाज की खेती (Cultivation of Millets) : विश्व की खाद्यान्न आपूर्ति श्रृंखला के निर्यातक प्रमुख देशों में भारत पहले ही शामिल है। अब भारत अपने साथ-साथ दुनिया की जरूरतें भी पूरी कर रहा है। अब भारत अच्छी क्वालिटी वाले अनाज फसलों के उत्पादन में पूरे विश्व में अपना परचम लहरा रहा है। इस बीच भारत की पहल पर वर्ष 2023 को संयुक्त राष्ट्र संघ ने अंतरराष्ट्रीय पोषक अनाज वर्ष घोषित किया है। इसके माध्यम से देश और दुनिया में इस वर्ग के अनाज के उत्पादन और खपत को बढ़ाने में मदद मिलेगी। भारत के इस प्रस्ताव को पूरे विश्व का समर्थन मिला है। बता दें कि अगला साल मिलिट्स साल के रूप में मनाया जाएगा। ऐसे में भारत की नजरें भी देश में होने वाले मिलिट्स ( मोटे अनाज ) के उत्पादन पर टिकी है। बताया जा रहा है कि केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने इसे उच्च प्राथमिकता देते हुए मिशन मोड में काम कर रहा है। देश व विदेशों में इसके उत्पादों के प्रति लोगों को जानकारी देने और उपयोग बढ़ाने का अभियान चलाया जा रहा है। भारत में पोषक अनाजों की उत्पादन और खपत को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकारें अपने-अपने स्तर पर काम कर रही हैं। जिसमें ओडिशा, कर्नाटक, महाराष्ट्र और तेलंगाना में भी कृषि आधारित योजनाएं चलाई जा रही हैं। तो चलिए ट्रैक्टरगुरु के इस लेख के माध्यम से इन अनाजों के वैश्विक उत्पादन और खपत बढ़ाने के लिए चलाई जा रही योजनाओं के बारे में जानते है। 

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भारत मोटे अनाजों का एक बड़ा निर्यातक देश

बताया जा रहा है कि पोषक-अनाजों की मांग वैश्विक स्तर पर लगातार बढ़ने से, वाणिज्य विभाग को उम्मीद है कि आने वाले वर्षों में बाजरा के निर्यात में तेजी से बढ़ोतरी होगी। भारतीय निर्यातकों को विदेशों में नए बाजार मिल रहे हैं। एपीडा की रिपोर्ट्स की माने, तो मिलिट्स उत्पादन में भारत दुनिया में शीर्ष पर है। पोषक अनाज की आपूर्ति के मामले में भारत बंपर उत्पादन करता हैं। आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2020 में कुल विश्व उत्पादन में लगभग 41 प्रतिशत की हिस्सेदारी के साथ भारत बाजरा के उत्पादन में दुनिया में अग्रणी है। कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 2020 में मिलेट्स का विश्व उत्पादन 30.464 मिलियन मीट्रिक टन (एमएमटी) था। जिसमें भारत की हिस्सेदारी लगभग 12 मिलियन मीट्रिक टन (एमएमटी) थी। भारत दुनिया में बाजरा का पांचवां सबसे बड़ा निर्यातक देश है, 2020 के आंकड़ों के अनुसार, 2020 के साथ समाप्त होने वाले पिछले पांच वर्षों में निर्यात लगभग 3 प्रतिशत सीएजीआर से लगातार बढ़ रहा है। एफएओ (खाद्य और कृषि संगठन) के अनुसार, भारत ने पिछले वर्ष में 15.92 एमएमटी के बाजरा उत्पादन की तुलना में 2021-22 में बाजरा उत्पादन में 27 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। 

भारत से मिलिट्स आयात करने वाले दुनिया के प्रमुख देश

पीआईबी की रिपोट से पता चला है कि भारत मोटे अनाजों का अग्रणी उत्पादक देश ही नहीं, बल्कि एक बड़ा निर्यातक देश भी है। वर्ष 2020-21 में, भारत ने 2019-20 में 28.5 मिलियन अमरीकी डॉलर के मुकाबले 26.97 मिलियन अमरीकी डॉलर मूल्य के बाजरा का निर्यात किया। बाजरा के प्रमुख निर्यातक देश अमेरिका, रूस, यूक्रेन, भारत, चीन, नीदरलैंड, फ्रांस, पोलैंड और अर्जेंटीना हैं। इन देशों का कुल बाजरा निर्यात 2020 में 221.68 मिलियन अमरीकी डॉलर था। रिपोर्टस के अनुसार भारत से मिलेट्स आयात करने वाले दुनिया के प्रमुख देश में इंडोनेशिया, बेल्जियम, जापान, जर्मनी, मैक्सिको, इटली, अमेरिका, ब्रिटेन, ब्राजील और नीदरलैंड हैं। भारत से बाजरा के शीर्ष तीन आयातक देश नेपाल, संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब है। भारत के बाजरा निर्यात की शीर्ष दस सूची में अन्य सात देश लीबिया, ट्यूनीशिया, मोरक्को, यूके, यमन, ओमान और अल्जीरिया हैं।

भारत के मुख्य मिलिट्स उत्पादक राज्य

कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय के आंकड़ों को देखें तो मिलिट्स उत्पादन के मामले में भारत बंपर उत्पादन करता है। भारत से मिलिट्स के निर्यात में मुख्य रूप से मोटे अनाज शामिल है। भारत के कुल बाजार मिलिट्स (मोटे अनाज) उत्पादन में राजस्थान, महाराष्ट्र, कर्नाटक, गुजरात और मध्यप्रदेश जैसे शीर्ष पांच राज्य लगभग 1 प्रतिशत की हिस्सेदारी देते है। 

ओडिशा मिलिट मिशन की शुरुआत

अगला साल मिलेट्स ईयर के रूप में मनाया जाएगा। ऐसे में संभावित उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने के साथ-साथ पोषक अनाज की आपूर्ति श्रृंखला में बाधाओं को दूर करने के लिए, एपीडा ने पोषक अनाज निर्यात संवर्धन फोरम बनाया है। जिसमें इसके उत्पादों के प्रति लोगों को जानकारी देने और उपयोग बढ़ाने का अभियान चलाया जा रहा है। भारत में भी पोषक अनाजों की खेती और खपत को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकारें अपने-अपने स्तर पर काम कर रही हैं। जिसमें ओडिशा राज्य के द्वारा नई पीढ़ी को इसकी अहमियत समझाने के लिए जागरूकता बढ़ाने के लिए पहल की जा रही है। राज्य के अंदर मोटे अनाजों की खेती से 15 जिलों को कवर किया जा रहा है। पोषक अनाजों की खेती और खपत को बढ़ावा देने के लिए ’फार्म टू प्लेट’ अभियान भी चलाया जा रहा है। बता दें कि साल 2018 में ही ओडिशा ने मिलिट मिशन की शुरुआत की थी। वर्तमान में मशीन के तहत ना सिर्फ राज्य, बल्कि देशभर में पोषण सुधार का काम किया जा रहा है। 

कर्नाटक सरकार ने 10,000 रुपये प्रति हेक्टेयर अनुदान की सिफारिश

मोटे अनाज सिर्फ खेती के लिहाज से ही नहीं, बल्कि सेहत के लिए भी बेहद जरूरी हैं। कभी हमारे पूर्वजों ने पोषक अनाजों के जरिए ही एक सेहतमंद जीवन जिया है। मोटे अनाजों की खेती कम पानी वाले इलाकों के लिए वरदान है। कम लागत में किसानों की आय को बढ़ाने के लिए कर्नाटक सरकार ने मोटे अनाजों की खेती के लिए 10,000 रुपये प्रति हेक्टेयर अनुदान की सिफारिश की है। राज्य सरकार इसके उत्पादों के प्रति लोगों को जानकारी देने और उपयोग बढ़ाने के लिए समय-समय पर राष्ट्रीय कार्यक्रम और मेलों का आयोजन कर रही है। राज्य सरकार की ओर से  सव्य भाग्य योजना के तहत जैविक विधि से मोटे अनाज उगाने वाले किसानों को राज्य की जैविक प्रमाणन एजेंसी ने ऑर्गेनिक सर्टिफिकेशन भी जारी किए हैं।

इन राज्यों में मिलिट्स के लिए किसानों को प्रोत्साहन

एफएओ (खाद्य और कृषि संगठन) के अनुसार, महाराष्ट्र और राजस्थान की मिट्टी और जलवायु के मिलिट्स की खेती के लिए उपयुक्त है। देखा जाए तो महाराष्ट्र और राजस्थान में किसान मिलिट्स की खेती को आजीविका का एक अच्छा जरिया बना सकते है। मोटे अनाजों की खेती के जरिए किसान अच्छी आजीविका कमा सकते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए महाराष्ट्र सरकार ने जलवायु अनुकूल कृषि पर परियोजना चलाई हैं। इधर तेलंगाना सरकार भी अब रायथु बंधु समिति और मोटे अनाजों के लिए विशेष एफपीओ स्कीम लेकर आई है।

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