भारत की एक बड़ी आबादी लगभग 60 प्रतिशत लोग अपनी आजीविका के लिए कृषि क्षेत्र पर निर्भर हैं। देश की अर्थव्यवस्था में कृषि का बहुत ही महत्वपूर्ण योगदान है। इसीलिए पारंपरिक खेती के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में अब व्यवसाय के अलग-अलग विकल्पों को खोजा जा रहा हैं। किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए केंद्र और राज्य सरकारें कई तरह की योजनाओं का संचालन करती हैं। बिहार सरकार ने किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से फूड़ प्रोसेसिंग के लिए सब्सिडी देने का फैसला किया है, जिसके तहत किसानों, व्यक्तिगत निवेशकों और किसान उत्पादक संगठनों को सब्सिडी का लाभ दिया जाएगा।
मक्का फूड प्रोसेसिंग यूनिट लगाने वाले किसानों को बिहार सरकार ने अनुदान देने का फैसला किया है, जिससे उन किसान भाईयों को फाय़दा होगा जो फूड प्रोसेसिंग यूनिट लगाना चाहते हैं। बिहार सरकार के फैसले के अनुसार मक्का प्रोसेसिंग यूनिट की लागत पर किसानों और व्यक्तिगत निवेशकों को 15 प्रतिशत और किसान उत्पादक संगठन यानी एफपीओ और एफपीसी को 25% तक सब्सिडी का लाभ दिया जायेगा।
भारत में रबी और खरीफ सीजन के दौरान मक्के की खेती की जाती है, मक्के का इस्तेमाल पोषक अनाज के अलावा, आटा बनाने, मुर्गियों का दाना, पशुओं का चारा, मछली का चारा, पोल्ट्री फीड, कॉर्न फ्लेक्स, कॉर्न ग्रिट्स, कॉर्न सूजी, कॉर्न स्टार्च व भुट्टे के रूप में किया जाता हैं। अगर आप मक्के की खेती करते हैं और बाज़ार में उचित भाव नहीं प्राप्त कर पा रहे हैं, तो आप भी मक्का प्रोसेसिंग यूनिट लगा कर अपनी आमदनी दोगुनी कर सकते हैं।
इस योजना का लाभ लेने के लिए आपको बिहार का निवासी होना अनिवार्य है, अगर आप बिहार के निवासी हैं तो आप बिहार कृषि विभाग, बागवानी निदेशालय या बिहार कृषि निवेश प्रोत्साहन नीति की आधिकारिक वेबसाइट http://horticulture.bihar.gov.in पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। इस योजना की अधिक जानकारी प्राप्त करने के लिए आप अपने जनपद के सहायक निदेश उद्यान विभाग से भी संपर्क कर सकते हैं।
बिहार सरकार मक्का फूड प्रोसेसिंग यूनिट सब्सिडी का लाभ प्राप्त करने के लिए आपको निम्नलिखित दस्तावेज़ो की आवश्यकता होगी, जो हैं :-
आवेदक का आधार कार्ड
आवेदक का निवास प्रमाण पत्र
आवेदक का आय प्रमाण पत्र
बैंक अकाउंट स्टेटमेंट
आवेदक की पासपोर्ट साइज फोटो
आधार से लिंक मोबाइल नंबर
धान के बाद मक्का खरीफ सीजन की सबसे महत्वपूर्ण फसल है। मक्के की चपाती से लेकर भुट्टे, मधु मक्का (स्वीट कार्न), कॉर्नफलेक्स, पॉपकार्न की घरेलू व अन्तर्राष्ट्रीय बाजार में लगातार मांग बढ़ रही हैं, इसके कारण मक्के की खेती करने वाले किसान अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं।
मक्का की बुआई मेड के ऊपर 3-5 से.मी. की गहराई पर करनी चाहिए। मक्का की बुआई लिए आप प्लांटर का भी उपयोग कर सकते हैं। प्लांटर के उपयोग से बीज और उर्वरक को उचित स्थान पर एक ही बार में पहुंचाने में मदद मिलती है। रबि की फसल होने के कारण आपको वर्षा प्रारंभ होने पर मक्का की बुआई शुरू कर देनी चाहिए। अगर आपके पास सिंचाई के पर्याप्त साधन उपलब्ध हो तो मक्का की 10 से 15 दिन पहले ही बुवाई कर देनी चाहिए जिससे आप अच्छी पैदावार के साथ साथ बाज़ार में उचित मूल्य भी प्राप्त कर सकते हैं।
भारत में कर्नाटक, मध्य प्रदेश, बिहार, तमिलनाडु, तेलंगाना, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, राजस्थान और हरियाणा में मक्का की खेती की जाती है। इन राज्यों में मक्का का उत्पादन देश के अन्य राज्यों के मुकाबले अधिक है।
देश के प्रमुख मंडियों में मक्का के भावों में तेजी देखी गई है। भारत की प्रमुख मंडियों में मक्का का ताजा भाव इस प्रकार से हैं :-
हरियाणा की प्रमुख मंडियों में मक्का का भाव 2100 से 2700 रुपए प्रति क्विंटल।
राजस्थान की प्रमुख मंडियों में मक्का का भाव 2200 से 2800 रुपए प्रति क्विंटल।
उत्तर प्रदेश की प्रमुख मंडियों में मक्का का भाव 1900 से 2300 रुपए प्रति क्विंटल।
मध्यप्रदेश की प्रमुख मंडियों में मक्का का भाव 1900 से 2300 रुपए प्रति क्विंटल।
गुजरात की प्रमुख मंडियों में मक्का का औसत भाव 2000 से 2500 रुपए प्रति क्विंटल।
महाराष्ट्र की प्रमुख मंडियों में मक्का का औसत भाव 2500 से 3000 रुपए प्रति क्विंटल।
कर्नाटक की प्रमुख मंडियों में मक्का का भाव 2200 से 2800 रुपए प्रति क्विंटल।
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