सोयाबीन की टॉप 10 उन्नत किस्म: जानें खेती के लिए उपयोगी टिप्स

सोयाबीन की टॉप 10 उन्नत किस्म: जानें खेती के लिए उपयोगी टिप्स
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2024 में सोयाबीन बुवाई की टॉप 10 किस्म : सोयाबीन की खेती में इन बातों का रखें ध्यान

भारत की तिलहनी फसलों में सोयाबीन का दूसरा स्थान है। यह एक ऐसी फसल है जिसे तिलहन और दलहन दोनों श्रेणियों में गिना जाता है। खरीफ सीजन के दौरान मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, कर्नाटक और तेलंगाना के किसान सोयाबीन की खेती करते हैं। स्वास्थ्य की दृष्टि से सोयाबीन का काफी अधिक महत्व है। सोयाबीन से खाद्य तेल, सोया बड़ी, सोया दूध, सोया पनीर आदि वस्तुएं बनाई जाती है। सोयाबीन की खपत में लगातार वृद्धि हो रही है। सोयाबीन की बुवाई का सीजन जून के दूसरे सप्ताह से शुरू हो जाता है। अगर किसान सोयाबीन की बुवाई से पहले कृषि वैज्ञानिकों की सलाह के अनुसार काम करते हैं तो उन्हें कम लागत में ज्यादा उत्पादन मिलने की संभावना रहती है। ट्रैक्टर गुरु की इस पोस्ट में आपको सोयाबीन की खेती के लिए उपयोगी टिप्स और 2024 में सोयाबीन बुवाई के लिए टॉप 10 किस्मों के बारे में जानकारी दी जा रही है तो बने रहें हमारे साथ।

सोयाबीन की खेती का उचित समय (Appropriate time for soybean cultivation)

सोयाबीन एक बारिश आधारित फसल है। सामान्यत : सोयाबीन की बुवाई 4 से 5 इंच बारिश होने पर की जाती है। मध्यभारत में इतनी बारिश सामान्य मानसून की स्थिति में 20 जून तक हो जाती है। इसलिए सोयाबीन की बुवाई का उचित समय 20 जून से 5 जुलाई तक माना जाता है। अगर परिस्थितवश कुछ दिन आगे पीछे हो जाए तो भी बुवाई की जा सकती है। लेकिन मानसून में देरी होने पर किसानों को फसलों की सिंचाई करनी चाहिए ताकि उन्हें नुकसान नहीं हो।

सोयाबीन की खेती के लिए खेत की जुताई कैसे करें (How to plow the field for soybean cultivation)

अगर किसान हर खरीफ सीजन में सोयाबीन की खेती करता है तो उसे दो से तीन साल में एक बार खेत की गहरी जुताई करनी चाहिए। सोयाबीन की बुवाई से पहले कल्टीवेटर की सहायता से खेत की जुताई करनी चाहिए। जुताई के दौरान 5 से 10 टन गोबर खाद या 2.5 टन मुर्गी खाद डालनी चाहिए। इससे खेत की उर्वरा शक्ति बढ़ती है।

सोयाबीन की टॉप 10 किस्म

सोयाबीन की ज्यादा पैदावार देने वाले टॉप 10 उन्नत बीज (Top 10 improved seeds giving high yield of soybean)

सोयाबीन की खेती में उन्नत किस्त के बीजों की बिजाई करनी चाहिए। यहां आपको सोयाबीन की ज्यादा पैदावार देने वाले टॉप 10 बीजों की जानकारी दी जा रही है। आइए सूची देखें :

सोयाबीन की टॉप 10 उन्नत किस्म (Top 10 improved varieties of soybean)

 

बीज का नाम बुवाई के लिए उपयुक्त राज्य प्रति हेक्टेयर उत्पादन बुवाई का उचित समय
एमएसीएस 1407 किस्म असम, पश्चिम बंगाल, झारखंड, छत्तीसगढ़ और पूर्वोत्तर राज्य 39 क्विंटल 20 जून से 5 जुलाई
जेएस 2034 किस्म मध्यप्रदेश 24-25 क्विंटल 15 जून से 30 जून
फुले संगम/केडीएस 726 किस्म महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश 40 क्विंटल 15 जून से 25 जुलाई
बीएस 6124 किस्म मध्यप्रदेश 20-25 क्विंटल 15 जून से 30 जून
प्रताप सोया-45 (आरकेएस-45) किस्म राजस्थान 30-35 क्विंटल 15 जून से 5 जुलाई तक
जेएस 2069 किस्म मध्य क्षेत्र 22-26 क्विंटल 15 से 22 जून
जेएस 9560 किस्म मध्य क्षेत्र 25-28 क्विंटल 17 से 25 जून
जेएस 2029 किस्म मध्य क्षेत्र 25-26 क्विंटल 15 से 30 जून
एमएयूएस 81 (शक्ति) किस्म मध्य क्षेत्र 33-35 क्विंटल 15 से 30 जून
प्रताप सोया-1 (आरएयूएस 5) किस्म उत्तरी-पूर्वी क्षेत्र 30-35 क्विंटल 15 से 30 जून

सोयाबीन की खेती : बीज बुवाई के समय ध्यान रखने योग्य बातें (Soybean cultivation: Things to keep in mind while sowing seeds)

सोयाबीन की खेती में एक हेक्टेयर खेत में 65 से 75 किलो बीजों की आवश्यकता होती है। किसान भाई अपने क्षेत्र के हिसाब से जिस किस्म के बीच की बुवाई करना चाहते हैं, उसे सबसे पहले बीजों का थीरम या कार्बेन्डाजिम से बीजोपचार करना चाहिए। रिज या चौड़ी क्यारियों पर कतार में बीज लगाने चाहिए। कतार से कतार की दूरी 35-45 सेमी व पौधे से पौधे की दूरी 4-5 सेमी होनी चाहिए। बीज की बुवाई 3 से 4 सेमी की गहराई पर करनी चाहिए। यहां किसान को ध्यान रखना चाहिए कि सोयाबीन के बीजों का अंकुरण 70 फीसदी से कम है तो बीज दर को उसी के अनुपात में बढ़ा देना चाहिए।

सोयाबीन की खेती में पोषक तत्वों की आपूर्ति कैसे करें? (How to supply nutrients in soybean cultivation?)

सामान्यत: किसानों के मन में यह सवाल उठता है कि क्या सोयाबीन में डीएपी देने से सभी पोषक तत्वों की पूर्ति हो जाती है? तो इस संबंध में विशेषज्ञों का कहना है कि सोयाबीन में डीएपी से पोषक तत्वों की पूर्ति नहीं होती है। क्योंकि डीएपी में 18 प्रतिशत नत्रजन व 46 प्रतिशत फास्फोरस होता है। इसलिए सोयाबीन की खेती में प्रति हेक्टेयर के हिसाब से 56 किलोग्राम यूरिया, 450 से 625 किलोग्राम सुपर फॉस्फेट, 34-84 किलो म्यूरेट ऑफ पोटाश का इस्तेमाल किया जाना चाहिए।

सोयाबीन की खेती में किस्मों का चयन कैसे करें? (How to select varieties in soybean cultivation?)

जो किसान साल में सिर्फ दो फसलों से कमाई करना चाहते हैं वे मध्यम या अधिक समय में पैदावार देने वाली किस्मों का चयन कर सकते हैं तथा जो किसान सोयाबीन के बाद आलू, प्याज, लहसुन जैसी फसल लेकर गेहूं व चना की फसल लगाना चाहते हैं वे कम अवधि में पकने वाली किस्मों का चयन कर सकते हैं।

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