ग्रीष्मकालीन फसल सीजन 205-26 : ग्रीष्मकालीन फसल सीजन 2025-26 के लिए हरियाणा, उत्तर प्रदेश और गुजरात जैसे राज्यों में मूल्य समर्थन योजना (पीएसएस) के तहत मूंग, मूंगफली और उड़द की सरकारी खरीद की जा रही है। इस कड़ी में मध्यप्रदेश सरकार ने राज्य के किसानों के हित को ध्यान में रखते हुए समर्थन मूल्य (MSP) पर मूंग और उड़द की फसल खरीदने का निर्णय लिया है। प्रदेश में ग्रीष्मकालीन मूंग और उड़द की फसलों की सरकारी खरीद के लिए किसानों का पंजीयन 19 जून से शुरू होगा। सरकार ने इसके लिए संबंधित विभागों और एजेंसियों को आवश्यक निर्देश भी जारी कर दिए हैं। साथ ही राज्य सरकार ने मूंग और उड़द के समर्थन मूल्य पर उपार्जन का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेज दिया है। मतलब, इस ग्रीष्मकालीन (जायद) फसल सीजन में प्रदेश के जिन किसानों ने मूंग और उड़द फसल से बंपर पैदावार की है, अब उन किसानों को समर्थन मूल्य यानी एमएसपी पर अपनी उपज बेचने का मौका मिलेगा।
केंद्र को भेजे गए उपार्जन प्रस्ताव में किसानों का पंजीयन, उपार्जित फसल की गुणवत्ता, परिवहन, भुगतान के साथ प्रचार-प्रसार की कार्य-योजना भी प्रेषित की गई है। जायद मूंग का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 8682 रुपए प्रति क्विंटल और उड़द का 7400 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित है। बता दें कि शुरुआत में खबर आई थी कि प्रदेश सरकार इस साल ग्रीष्मकालीन मूंग की सरकारी खरीदी नहीं करेगी, लेकिन किसानों की मांग को देखते हुए मध्य प्रदेश सरकार ने समर्थन मूल्य पर मूंग और उड़द की फसल खरीदने का तत्काल निर्णय लिया है।
सरकारी जानकारी के अनुसार, प्रदेश के 36 जिलों में मूंग और 13 जिलों में जायद उड़द फसलों की कटाई मई माह के तृतीय सप्ताह से जून महीने के पहले सप्ताह तक की जाती है। प्रदेश में मूंग का अनुमानित क्षेत्राच्छादन 14.35 लाख हेक्टेयर और संभावित उत्पादन 20.23 लाख मीट्रिक टन है। इसी प्रकार उड़द का संभावित क्षेत्राच्छादन 0.95 लाख हेक्टेयर एवं उत्पादन 1.24 लाख मीट्रिक टन संभावित है।
समर्थन मूल्य पर मूंग और उड़द की फसल उपज बेचने हेतु पंजीयन के लिए किसानों को आधार कार्ड, बैंक खाता विवरण, भू अधिकार ऋण पुस्तिका की छायाप्रति संलग्न करनी होगी। किसान का खाता राष्ट्रीयकृत बैंक एवं जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक की शाखा का होना अनिवार्य है। सिकमी / बटाईदारों को अनुबंध की प्रति देना अनिवार्य है। उपार्जन की जिम्मेदारी सहकारी संस्थाएं संभालेंगी और किसानों को भुगतान के लिए कंप्यूटराईज प्रिंटेड रसीद प्रदान की जाएगी। प्रदेश सरकार ने उपार्जन के लिए गुणवत्ता मानकों एवं प्रचार-प्रसार की कार्य-योजना भी तैयार की है, जिससे किसानों को उपज के लिए उचित मूल्य मिले और फसल औने-पौने दामों में न बिकें।
मूंग और उड़द उपार्जन के लिए बनाए गए उपार्जन केन्द्रों पर किसानों के लिए जरूरी सुविधा जैसे बैठने के लिए छायादार स्थान, पीने के लिए साफ पानी, शौचालय और फर्स्ट बॉक्स की व्यवस्था करने की जिम्मेदारी उपार्जन समितियों की होगी। उपार्जन किए जाने वाले फसल की गुणवत्ता परीक्षण के लिए आवश्यक उपकरण की व्यवस्था भी होगी, जिसके लिए विस्तृत प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। उपार्जन केंद्र पर एक बैनर लगाया जायेगा, जिसमें उपार्जन केन्द्र का नाम, एफएक्यू गुणवत्ता का मापदण्ड और भुगतान विवरण का उल्लेख होगा। प्रदेश के जिन उपार्जन केन्द्रों पर अधिक खरीद होने की संभावना होगी, उन केन्द्रों पर अतिरिक्त कर्मचारियों की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। निर्धारित उपार्जन केन्द्रों (मूंग, उड़द) पर लैपटॉप, प्रिंटर, इलेक्ट्रॉनिक तौल कांटा और बैटरी आदि को चालू अवस्था में रखा जाएगा।
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