मूंगफली की खेती : इस विधि से करें मूंगफली की खेती, होगी अधिक पैदावार

मूंगफली की खेती : इस विधि से करें मूंगफली की खेती, होगी अधिक पैदावार
शेयर पोस्ट

जानें मूंगफली की खेती संबंधित जानकारी एवं उन्नत किस्में

भारत एक कृषि प्रधान देश है। भारत में लगभग 51 प्रतिशत भू-भाग पर खेती होती है। देश में लगभग हर प्रकार की फसलों की खेती की जाती है, क्योंकि देश के विभिन्न भागों की जलवायु, भूमि की उर्वरक क्षमता और भूमि का आकार भिन्न भिन्न है। देश में मौेसम के हिसाब से रबी और खरीफ सीजन की फसलों की खेती की जाती है। रबी फसल अक्टूबर-नवंबर में बोई जाती है और मार्च-अप्रैल में काटी जाती है। खरीफ सीजन फसलों की खेती जून-जूलाई में बोई जाती है और नवंबर-दिसंबर में काट ली जाती है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अब जून महीना चला रहा है और ये खरीफ फसलों की बुवाई का समय होता है। इस समय किसान खरीफ सीजन की फसल जैसे धान, गन्ना, तिलहन, कपास, मक्का, तिल, ज्वार, बाजरा इत्यादि की बुवाई करता है। इन खरीफ फसलों में से आज हम जिस फसल की बात कर रहे हैं। वह मूंगफली की है, मूंगफली की खेती तिलहनी फसल के रूप में की जाती है। इसका पौधा उष्णकटिबंधीय जलवायु वाला होता है। जिससे इसकी खेती खरीफ और जायद दोनों मौसम में की जाती है। ये प्रोटीन और फाइबर से भरपूर होती है। इसमें 45-55 प्रतिशत प्रोटीन, 28-30 प्रतिशत कार्बोहाइड्रेट पाया जाता है। मूंगफली विटामिन बी, विटामिन-सी, कैल्शियम और मैग्नेशियम, जिंक फॉस्फोरस, पोटाश आदि खनिज तत्व प्रचुर मात्रा में पाई जाती है, जो मानव शरीर को स्वस्थ रखने में काफी सहायक है। नट्स और तेल में इस्तेमाल होने के अलावा, मूंगफली का उपयोग मक्खन, स्नैक उत्पाद और डेसर्ट बनाने में भी किया जाता है। यदि मूंगफली की खेती वैज्ञानिक तरीके से की जाये तो इसके एक हेक्टेयर के खेत से अच्छी पैदावार प्राप्त की जा सकती है, जिससे अच्छा लाभ भी कमाया जा सकता है। यदि आप भी मूंगफली की खेती करने का मन बना रहे हैं, तो ट्रैक्टरगुरू के इस लेख में आपको मूंगफली की खेती संबंधित जानकारी दी जा रही है।  

मूंगफली की खेती का क्षेत्र

मूंगफली खरीफ और जायद दोनों मौसम में ही उगाई जाने वाली फसल है। मूंगफली भारत की मुख्य महत्त्वपूर्ण तिलहनी फसल है। यह तमिलनाडू, गुजरात, आन्ध्र प्रदेश तथा कर्नाटक राज्यों में सबसे अधिक उगाई जाती है। इसके अलावा इसकी खेती  मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, राजस्थान तथा पंजाब में भी विशेष रूप से की जाती है। राजस्थान में इसकी खेती लगभग 3.47 लाख हैक्टर क्षेत्र में की जाती है, जिससे लगभग 6.81 लाख टन उत्पादन होता है। इसकी औसत उपज 1963 कि.ग्रा. प्रति हैक्टर है। 

बुन्देलखण्ड में मूंगफली की खेती की खेती को मिला बढ़ावा

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद्‌ के अधीनस्थ अनुसंधान संस्थानों एवं कृषि विश्वविद्यालयों ने मूंगफली की उन्नत तकनीक विकसित की हैं। इन तकनीक से किसान इसकी खेती में अधिक पैदावार प्राप्त कर लाखों की कमाई कर सकते हैं। इस विषय में कृषि वैज्ञानिक डॉ राकेश चौधरी एवं डॉ आशुतोष शर्मा ने मूंगफली की खेती को लेकर कहा कि अब बुन्देलखण्ड के किसान भी इस खेती की तरफ तेजी से बढ़ रहे हैं। कृषि वैज्ञानिक ने यहां के किसानों को मूंगफली की खेती करने के संबंध में कुछ महत्वपूर्ण सलाह दी है। उत्तर प्रदेश के झांसी, सीतापुर, उन्नाव, बरेली, हरदोई, बदायूं, एटा, मैनपुरी, फर्रुखाबाद, मुरादाबाद, खीरी, और सहारनपुर आदि जिलों में मूंगफली की खेती मुख्य रूप से की जा रही है। 

मूंगफली की उन्नत किस्में

मूंगफली की खेती के लिए किसानों को अपने खेत में मूंगफली की उन्नत किस्मों को लगाना चाहिए। ताकि वह कम समय में उगकर अच्छी पैदावार दे सकें। इसके लिए निचे मूंगफली की कुछ उन्नत किस्में दी जा रही जिसे किसान भाई अपने क्षेत्र की जलवायु एवं भूमि के हिसाब से चयन कर खेती कर सकते हैं।

आर. जी. 425- मूंगफली की इस किस्म को राज दुर्गा नाम से भी पुकारा जाता है, इसके पौधे सूखे की प्रति सहनशील है। यह किस्म बीज रोपाई के तकरीबन 120 से 125 दिन बाद पैदावार देना आरम्भ कर देती है। एक हेक्टेयर के खेत से लगभग 28 से 36 क्विंटल की पैदावार हो जाती है।

एच.एन.जी.10- मूंगफली की इस किस्म को अधिक बारिश वाली जगहों के लिए उपयुक्त माना गया है। 120 से 130 दिन बाद पैदावार तथा प्रति हेक्टेयर के हिसाब से 20 से 25 क्विंटल का उत्पादन दे देती है।

टीजी 37 ए- मूंगफली की यह किस्म 125 दिन पश्चात् पैदावार देना आरम्भ कर देती है। इसके दानो से 51 प्रतिशत तेल प्राप्त किया जा सकता है। इसके एक हेक्टेयर के खेत से तकरीबन 18 से 20 क्विंटल की पैदावार प्राप्त हो जाती है।

जी जी 2- मूंगफली की यह किस्म बीज रोपाई के 120 दिन बाद पैदावार दे देती है, जिसमे निकलने वाले दाने गुलाबी रंग के होते है। इसके एक हेक्टेयर के खेत से 20-25 क्विंटल का उत्पादन प्राप्त हो जाता है।

जे.जी.एन 3- मूंगफली की यह किस्म बीज रोपाई के 120-130 दिनों में पैदावार देने हेतु तैयार हो जाती है। इसके एक हेक्टेयर के खेत से लगभग 15 से 20 क्विंटल का उत्पादन हो जाता हैं।

जे.एल 501- मूंगफली की यह किस्म 120 से 125 दिन पश्चात् पैदावार देना आरम्भ कर देती है। इसके दानो से 51 प्रतिशत तेल की मात्रा पाई जाती है। इसके एक हेक्टेयर के खेत से तकरीबन 20 से 25 क्विंटल की पैदावार प्राप्त हो जाती है। 

ऐसे करें मूंगफली की उन्नत खेती

जलवायु एवं भूमि

मूंगफली का पौधा उष्णकटिबंधीय जलवायु वाला होता है। इसके किसी भी प्रकार की मिट्टी में उगाया जा सकता है। इसकी अच्छी फसल के लिए हल्की पीली दोमट उचित जल निवासी वाली जिसका पीएच मान 6-7 के मध्य हो ऐसी भूमि खेती के लिए उपयुक्त मानी जाती है। इसके पौधे गर्मी और प्रकाश में अच्छे से विकास करते है। मूगंफली के पौधे न्यूनतम 15 डिग्री तथा अधिकतम 35 डिग्री तापमान को ही सहन कर सकते है। 

खेत की तैयारी

मूंगफली की अच्छी फसल लेने के लिए पहले इसके खेत को अच्छी तरह से तैयार कर लेना चाहिए। सबसे पहले खेत की तिरछी गहरी जुताई करनी चाहिए, जिससे पुरानी फसल के अवशेष पूरी तरह से नष्ट हो जायेंगे। इसके बाद खेत में 3-4 क्विंटल प्रति हेक्टेयर की दर से सड़ी गोबर की खाद डालकर रोटावेटर लगा कर दो से तीन जुताई कर अच्छे मिला दे। एक बार फिर खेत में पाटालगा कर जुतवा दे जिससे खेत पूरी तरह से समतल हो जायेगा। मूंगफली फसल में मुख्यतः सफेद लट एंव दीमक का प्रकोप देखने को मिलता है। इसके लिए फोरेट 10 जी या कार्बोफ्यूरान 3 जी से 20-25 किलोग्राम प्रति हैक्टेयर की दर से उपचारित करते है। जिन क्षेत्रों में उकठा रोग की समस्या हो वहाँ 50 कि.ग्रा. सड़े गोबर में 2 कि.ग्रा. ट्राइकोडर्मा जैविक फफूंदनाशी को मिलाकर अंतिम जुताई के समय प्रति हैक्टेयर की दर से भूमि में मिला देना चाहिए।

खेती के लिए बीजों की मात्रा

मूंगफली की गुच्छेदार प्रजातियों का 60 से 80 किलोग्राम एवं फैलने व अर्द्ध फैलने वाली प्रजातियों का 50-65 किलोग्राम बीज प्रति हेक्टेयर की दर से प्रयोग करें।

बुवाई से पहले बीजोपचार

इसके बीजों के उपचार के लिए थाइरम 37.5 प्रतिशत एवं कार्बोक्सिन 37.5 प्रतिशत की 2.5 ग्राम/कि.ग्रा. बीज की दर से या 1 ग्रा. कार्बेन्डाजिम एवं ट्राइकाडर्मा विरिडी 4 ग्रा./कि.ग्रा. बीज को उपचार करना चाहिए। बुवाई पहले राइजोबियम एवं पी.एस.बी. से 5-10 ग्रा./कि.ग्रा. बीज के मान से उपचार करें। 

बुवाई की विधि

मूंगफली की बुवाई जून के द्वितीय सप्ताह से जुलाई के प्रथम सप्ताह में की जाती है। इसकी बुवाई रेज्ड बेड-बेड पद्धति से किया जाना लाभप्रद रहता है। इस पद्धति में मूंगफली की 5 कतारों के बाद एक कतार खाली छोड़ देते है। इससे भूमि में नमीं का संचय, जलनिकास, खरपतवारों का नियंत्रण व फसल की देखरेख सही हो जाने के कारण उपज अच्छी प्राप्त हो जाती है। गुच्छेदार किस्म के लिए कतार से कतार की दूरी 30 से.मी. और पौधे से पौधे की दूरी 10 से.मी. रखना चाहिए। फैलाव और अर्धफैलाव वाली किस्मों के लिए कतार से कतार की दूरी 45 से.मी. एवं पौधे से पौधे की दूरी 15 सें.मी. रखना चाहिए। बीज की गहराई 3 से 5 से.मी. रखनी चाहिए।

खाद एवं उर्वरक प्रबंधन

मूंगफली के खेत में उर्वरक का प्रयोग भूमि परीक्षण के आधार पर ही किया जाना चाहिए। मूंगफली की अच्छी पैदावार के लिए 3-5 क्विंटल सड़ी गोबर की खाद प्रति हैक्टर की दर से खेत की तैयारी के समय मिट्टी में मिला देनी चाहिए। उर्वरक के रूप में 20ः 60ः 20 कि.ग्रा. प्रति हेक्टयर की दर से नत्रजन, फॉस्फोरस व पोटाश का प्रयोग करना चाहिए। इसके अलावा जिप्सम की 250 कि.ग्रा. मात्रा प्रति हैक्टर की दर से प्रयोग बुवाई से पूर्व आखरी तैयारी के समय प्रयोग करें। 

मूंगफली खेत की सिंचाई

मूंगफली की फसल को अधिक सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती है, क्योकि यह खरीफ की फसल है और इसकी बुवाई बारिश के मौसम के समीप ही की जाती है। अगर बारिश समय पर नहीं होती है, तो इसके पौधों को जरूरत के अनुसार पानी देना चाहिए। बारिश के मौसम के बाद 20 दिन के अंतराल में पौधों को पानी की आवश्यकता होती है। जब मूंगफली के पौधों में फूल और फलिया बनने लगे उस दौरान खेत में नमी की मात्रा बनाये रखने के लिए आवश्यकतानुसार सिंचाई करें इससे पैदावार अच्छी प्राप्त होती है।

मूंगफली के खेत में खरपतवार नियंत्रण

अधिक पैदावार के लिए समय-समय पर इसकी खेत में खरपतवार नियंत्रण के लिए निराई-गुडाई करें। रासायनिक विधि द्वारा खरपतवार पर नियंत्रण पाने के लिए 500 लीटर पानी में 3 लीटर पेन्डिमेथालिन की मात्रा को डालकर अच्छे से मिला दिया जाता है, जिसका छिड़काव बीज रोपाई के दो दिन बाद तक करना होता है। यदि इसके खेत में खरपतवार पर ध्यान नहीं दिया तो ये मूंगफली को अधिक हानि पहुंचाते है। इसकी फसल में अधिक खरपतवार हो जाये, तो उत्पादन में 30 प्रतिशत तक की कमी हो सकती है। इसकी फलियाँ भूमि से सामान्य गहराई में होती है, और डूब, सामक, मेथा और प्याजा नामक खरपतवार की जड़े भी भूमि की सामान्य गहराई में होती है, जिससे खरपतवार पौधों को अधिक हानि पहुँचाता है।

रोगों की रोकथाम

मूंगफली में प्रमुख रूप से पर्ण चित्ती, टिक्का, लीफ माइनर, कॉलर, तना गलन और रोजेट रोग का मुख्य प्रकोप होता है। पर्ण चित्ती रोग का प्रकोप दिखाई देने पर डाइथेन एम-45 की उचित मात्रा का छिड़काव 10 दिन के अंतराल में दो से तीन बार करें। टिक्का के लक्षण दिखते ही इसकी रोकथाम के लिए डायथेन एम-45 का 2 ग्रा./लीटर पानी में घोल बनाकर पौधों पर 10 से 12 दिन के अंतराल में दो से तीन बार छिड़काव करना चाहिए। रोजेट वायरस जनित रोग हैं, इसके फैलाव को रोकने के लिए फसल पर इमिडाक्लोप्रिड 0.5 मि.ली./लीटर पानी के मान से घोल बनाकर 10 से 12 दिन के अंतराल में दो से तीन बार छिड़काव करना चाहिए।

खुदाई एवं भण्डारण

मूंगफली की फसल बुवाई के 120 से 130 दिन पश्चात खुदाई के लिए तैयार हो जाती है। इसके पौधों की पत्तियों का रंग पीला पड़ने लगे और इसके पौधे पूर्ण रूप से पके हुए दिखाई देने लगे तब खेत में हल्की सिंचाई कर खुदाई कर लें। आज कल बाजार में इसकी फसल की खुदाई मशीन भी उपलब्ध हैं। जिसके उपयोग से समय और पैसे की हो जाती है। मूंगफली की खुदाई के बाद इसके पौधों से फलियाँ को अलग कर तेज धुप मे सुखा ले जिससे इसमें नमी पूरी तरह से खत्म हो जाये। ध्यान रहें भंडारण के पूर्व पके हुए दानों में नमीं की मात्रा 8 से 10 प्रतिशत से अधिक नहीं होनी चाहिए। मूंगफली के एक हेक्टेयर के खेत से 20 से 25 क्विंटल की पैदावार प्राप्त हो जाती है, जिसका बाजारी भाव गुणवत्ता के हिसाब से 60 रूपए से 80 रूपए तक होता है, जिससे मूंगफली की एक बार की फसल से 1,20,000 से 1,60,000 तक की कमाई आसानी से कर सकते है।

ट्रैक्टरगुरु आपको अपडेट रखने के लिए हर माह मैसी फर्ग्यूसन ट्रैक्टर व फोर्स ट्रैक्टर कंपनियों सहित अन्य ट्रैक्टर कंपनियों की मासिक सेल्स रिपोर्ट प्रकाशित करता है। ट्रैक्टर्स सेल्स रिपोर्ट में ट्रैक्टर की थोक व खुदरा बिक्री की राज्यवार, जिलेवार, एचपी के अनुसार जानकारी दी जाती है। साथ ही ट्रैक्टरगुरु आपको सेल्स रिपोर्ट की मासिक सदस्यता भी प्रदान करता है। अगर आप मासिक सदस्यता प्राप्त करना चाहते हैं तो हमसे संपर्क करें।

Website - TractorGuru.in
Instagram - TractorGuru Instagram Page
Facebook - TractorGuru Facebook Page

Check On Road Price

Select Brand
Select Brand
Swaraj
Mahindra
Massey Ferguson
Sonalika
John Deere
Farmtrac
New Holland
Powertrac
Eicher
Solis
Captain
Kubota
VST
Trakstar
Preet
Indo Farm
Same Deutz Fahr
ACE
Tafe
Escorts
Force
Agri King
Standard
Hindustan
Kartar
Cellestial
HAV
Autonxt
Maxgreen
Marut
Sukoon
Montra
No brand found

Please select brand first

Select Model
Select Model
No model found
Select State
Select State
Maharashtra
Andhra Pradesh
Tamil Nadu
Kerala
Daman Diu
West Bengal
Assam
Madhya Pradesh
Manipur
Andaman Nicobar
Arunachal Pradesh
Bihar
Delhi
Odisha
Uttarakhand
Jharkhand
Punjab
Karnataka
Himachal Pradesh
Rajasthan
Meghalaya
Gujarat
Haryana
Lakshadweep
Goa
Chhattisgarh
Nagaland
Chandigarh
Sikkim
Jammu Kashmir
Puducherry
Dadra Nagar Haveli
Mizoram
Tripura
Uttar Pradesh
Telangana
No state found
Select District
Select District
No district found
Call Back Button

Search Other tractors

GET TRACTOR PRICE

Select Tractor

Sponsored

Farmtrac

Starting Price

₹ X,XX

2340 cc 39 HP

For Price Click Here

Sponsored

Sonalika

Starting Price

3532 cc 50 HP

For Price Click Here

Sponsored

Swaraj

Starting Price

₹ X,XX

2592 cc 35 HP

For Price Click Here