27 दिसंबर को इन राज्यों में बारिश और ओलावृष्टि की चेतावनी

27 दिसंबर को इन राज्यों में बारिश और ओलावृष्टि की चेतावनी
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Weather Alert : 27 दिसंबर से इन राज्यों में बारिश के साथ ही ओलावृष्टि की संभावना

Weather Forecast : रबी सीजन की मुख्य फसल गेहूं, चना, मक्का, सरसों व अन्य फसलों में अभी सिंचाई समेत खाद-उर्वरक देने का काम किसानों द्वारा किया जा रहा है। इस बीच एक नए पश्चिमी विक्षोभ (WD) के सक्रिय होने के कारण देश के उत्तर भारतीय राज्यों में मौसम ने एक बार फिर करवट ले ली है। तेज ठंड और शीतलहर की जगह अब घने कोहरे और बारिश ने ले ली है। बीते 48 घंटों में देश के कई इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई है। बारिश के चलते तापमान में गिरवाट देखी जा रही है, जिससे सर्दी व गलन बढ़ गई है। वहीं, भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के मौसम पूर्वानुमान के मुताबिक, 26 से 28 दिसंबर के बीच देश के उत्तर पश्चिम और मध्य राज्यों में कई स्थानों पर बारिश के साथ ही ओलावृष्टि होने की संभावना है। आईएमडी की मानें तो 27 दिसंबर को बारिश और ओलावृष्टि के साथ तेज हवा चलने की संभावना है, जिससे तापमान में गिरावट होगी और ठंड तेजी से बढ़ेगी। बारिश के साथ ही ओले गिरने की चेतावनी को देखते हुए कृषि वैज्ञानिक फसलों को पाले और लगने वाले रोग से बचाने के लिए किसानों को जरूरी सलाह भी दे रहे हैं।   

पूर्वानुमान और चेतावनी (Forecast and Warning)

आईएमडी से मिली जानकारी के मुताबिक, एक ताजा पश्चिमी विक्षोभ जो निचले और मध्य क्षोभमंडलीय पश्चिमी हवाओं में एक गर्त के रूप में देखा जा रहा है, जिसकी धुरी समुद्र तल से 5.8 किमी ऊपर है, जो मोटे तौर पर अक्षांश 30 डिग्री उत्तर के उत्तर में देशांतर 57 डिग्री पूर्व के साथ चल रहा है। देश के मध्य भागों में निचले स्तर की पूर्वी हवाओं के साथ इसके संपर्क में आने की बहुत संभावना है, जिससे मुख्य रूप से 27 और 28 दिसंबर के दौरान अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से उच्च नमी प्राप्त होगी। इससे  27 और 28 दिसंबर को पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र में छिटपुट से लेकर काफी व्यापक बारिश/ बर्फबारी की संभावना मौसम विज्ञान केंद्र ने बताई है।  26 और 27 दिसंबर को राजस्थान, गुजरात राज्य, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, पश्चिमी उत्तर प्रदेश में गरज और बिजली के साथ छिटपुट वर्षा की संभावना है; 27 और 28 दिसंबर को मध्य प्रदेश, विदर्भ और छत्तीसगढ़; 26-28 दिसंबर के दौरान मध्य महाराष्ट्र और मराठवाड़ा के कई हिस्सों में वर्षा और ओला गिरने की संभावना है। हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, पश्चिम उत्तर प्रदेश, राजस्थान, पूर्वी मध्य प्रदेश, विदर्भ, छत्तीसगढ़, मध्य महाराष्ट्र, मराठवाड़ा और गुजरात तथा 27 और 28 दिसंबर को पश्चिम मध्य प्रदेश में आंधी के साथ ओलावृष्टि की भी संभावना है।

तापमान, शीत लहर और कोहरे रहने की संभावना (Temperature, cold wave and possibility of fog)

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने मौसम पूर्वानुमान में कहा है कि अगले 48 घंटों  दौरान उत्तर-पश्चिम भारत में न्यूनतम तापमान में लगभग 2 डिग्री सेल्सियस की गिरावट और उसके बाद धीरे-धीरे 2 से 3 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि होने की संभावना है। 26 से 29 (अगले 4 दिनों) के दौरान मध्य भारत में न्यूनतम तापमान में कोई महत्वपूर्ण बदलाव नहीं होने की आशंका है, हालांकि उसके बाद 2 से 4 डिग्री सेल्सियस की गिरावट होने की संभावना है। अगले 5 दिनों के दौरान पश्चिम (गुजरात राज्य को छोड़कर) और पूर्वी भारत में न्यूनतम तापमान में कोई महत्वपूर्ण बदलाव होने की संभावना नहीं है। अगले 3 दिनों के दौरान गुजरात राज्य में न्यूनतम तापमान में 2-4 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि और उसके बाद 2-3 डिग्री सेल्सियस की गिरावट होने की संभावना है।

26 दिसंबर को जम्मू-कश्मीर-लद्दाख-गिलगित-बाल्टिस्तान-मुजफ्फराबाद, पंजाब और हिमाचल प्रदेश में अलग-अलग इलाकों में शीत लहर की स्थिति बहुत संभावित है। 26 और 29 दिसंबर को हिमाचल प्रदेश के अलग-अलग इलाकों में देर रात/सुबह के समय घना कोहरा छाए रहने की संभावना है। 26 तारीख को पंजाब और 28-31 तारीख के दौरान हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार, ओडिशा, असम और मेघालय; 28-31 दिसंबर के दौरान राजस्थान में देर रात/सुबह के समय घना कोहरा छाए रहने की संभावना है। मौसम विभान ने पूर्वानुमान में बताया है कि अगले 24 घंटों के दौरान हिमाचल प्रदेश के अलग-अलग इलाकों में जमीनी पाला की स्थिति अधिक संभावित है।

राजस्थान में अलगे चार दिन कोहरा, बारिश और ओलावृष्टि (Fog, rain and hailstorm for next four days in Rajasthan)

मौसम विज्ञान केन्द्र जयपुर से मिली जानकारी के मुताबिक, राजस्थान में आने वाले चार दिन तेज सर्दी का दौर चलेगा। राज्य में 26 से 29 दिसंबर तक कोहरा, बारिश और ओलावृष्टि होने का सिलसिला जारी रहेगा। इससे दिन और रात के तापमान में गिरावट होगी और सर्दी जोर पकड़ेगी। मौसम केन्द्र जयपुर के अनुसार, 27 दिसंबर को अजमेर, जयपुर, झुंझुनूं, सीकर, चूरू, नागौर, पाली में ओले गिरने की संभावना है। इन राज्य के सात जिलों में ओलावष्टि को लेकर ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ के असर से राजस्थान में 26 से 27 दिसंबर के दौरान अजमेर, अलवर, बांसवाड़ा, बारां, भरतपुर, भीलवाड़ा, बूंदी, चितौड़गढ़, दौसा, धौलपुर, डूंगरपुर, जयपुर, झालवाड़, झुंझुनू, करौली, कोटा, प्रतापगढ़, राजसमंद, सवाई माधोपुर, सीकर, सिरोही, टोंक, उदयपुर, चूरु, हनुमानगढ़, जालौर, नागौर, पाली एवं श्री गंगानगर जिलों में कई स्थानों पर गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। 

किसानों की बढ़ गई है चिंता (Farmers' worries have increased)

पश्चिमी विक्षोभ के असर से 26 से 29 दिसंबर के दौरान देश के कई राज्यों में बारिश के साथ ही ओलावृष्टि होने के आसार है। इससे रबी सीजन की मुख्य फसल गेहूं, चना, मक्का व अन्य फसलों में नुकसान होने की आशंका से किसानों की चिंता बढ़ गई है। मौसम बिगड़ने से तापमान में गिरावट होने लगी है, जिससे पाला पड़ने की पूरी संभावना बनी हुई है। साथ ही बारिश से खेतों में खड़ी फसलों में झुलसा रोग लगने का किसानों को डर सताने लगा है। अभी तक मौसम साफ रहने से फसल अच्छी दिखाई दे रही थी। लेकिन मौसम बिगड़ने से फसलों में झुलसा रोग लगने की आशंका बढ़ गई है। ऐसे समय में फसल के बचाव के जरूरी उपाय नहीं करने पर नुकसान हो सकता है। इन नुकसान से फसल को बचाने के लिए कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिकों द्वारा किसानों को जरूरी जानकारी दी जा रही है।

फसल की सुरक्षा के उपाय (crop protection measures)

कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार, शीत लहर एवं पाला से फसलों की सुरक्षा के उपाय बताए जा रहे हैं। खेतों की सिंचाई जरूरी है, जब भी पाला पड़ने की संभावना हो या मौसम पूर्वानुमान विभाग से चेतावनी दी गई हो तो फसल में हल्की सिंचाई दे देनी चाहिए। जिससे फसलों को पाले से होने वाले नुकसान से बचाया जा सकता है। नर्सरी में पौधों को रात में प्लास्टिक की चादर से ढ़कने की सलाह दी जाती है। 

कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि अपनी फसल को पाले से बचाने के लिए किसान अपने खेत में धुंआ करें। जिस दिन पाला पड़ने की संभावना हो उन दिनों फसलों पर गंधक के तेजाब के 0.1 प्रतिशत घोल का छिड़काव करना चाहिए। ध्यान रखें कि पौधों पर घोल की फुहार अच्छी तरह लगे। 

अगर इस अवधि के बाद भी शीत लहर व पाले की संभावना बनी रहे तो गंधक के तेजाब को 15–15 दिन के अन्तर से दोहराते रहें। वर्षा होने से फसलों में झुलसा रोग लगने की आशंका बढ़ गई है। इसके लिए फसल में दवा डलवाना जरूरी हो गया है। मौसम साफ होते ही फसलों में दवा डालने का कार्य किसान जरूरी करें। वहीं, वर्षा को किसानों ने गेहूं की फसल के लिए लाभदायक बताया। बारिश से किसान परेशान नजर आ रहे हैं। गेहूं को छोड़कर ज्यादा पानी होने पर सभी फसलों को नुकसान हो सकता है। हालांकि, अभी इतनी बारिश नहीं हुई कि फसलों का नुकसान हो।

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