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मौसम रिपोर्ट: अगले 48 घंटों के दौरान भारी बारिश की चेतावनी, किसान बरतें ये सावधानी

मौसम रिपोर्ट: अगले 48 घंटों के दौरान भारी बारिश की चेतावनी, किसान बरतें ये सावधानी
पोस्ट -19 जुलाई 2022 शेयर पोस्ट

बारिश के देखते हुए कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को किया अलर्ट, कहा इन बातों का जरूर रखें ध्यान  

देश में मानसून सक्रिय है। मानसून सक्रिय होने के कारण देश के ज्यादातर हिस्सों में मानसूनी बारिश का असर देखने को मिल रहा है। कहीं हल्की तो कहीं भारी से बहुत भारी वर्षा देखने को मिल रही है। इन सबके बीच अधिकतर क्षेत्रों में खरीफ फसलों की बुवाई की जा चुकी है, तो कहीं कहीं अभी खरीफ फसलों की बुवाई का कार्य चल रहा है। जिन किसान भाईयों ने पहले ही खरीफ फसलों की बुवाई कर ली हैं। वह अब इन फसलों की खेती में निराई-गुडाई एवं सिंचाई जैसी तमाम कृषि कार्य में लगे हुए है। इसी बीच भारतीय मौसम विभाग मानसून को लेकर अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग के मुताबिक, राज्य में अगले 2-3 दिनों (48 घंटों) में कई स्थानों पर तेज बौछार/गरज के साथ भारी से भारी बारिश होने की संभावना जताई हैं। वहीं उत्तराखंड के नैनीताल, चंपावत, बागेश्वर और पिथौरागढ़ जिलों में छिटपुट स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना बताई है। उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र के जिलों और आसपास के जिलों में अलग-अलग स्थानों पर बहुत भारी वर्षा के साथ कुछ अन्य स्थानों पर भी भारी से बहुत भारी वर्षा होने की संभावना व्यक्त की है। इसके अलावा उत्तराखंड के शेष जिलों में छिटपुट स्थानों पर भारी से बहुत भारी वर्षा होने की संभावना जताई है। 

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मौसम विभाग के अनुसार देखा जाए, तो पूरे राज्य में भारी बारिश के आसार हैं। राज्य में भारी बारिश की चेतावानी को ध्यान में रखते हुए कृषि वैज्ञानिकों ने राज्य के किसानों के लिए अलर्ट जारी किया है। राज्य में भारी बारिश की संभावना को देखते हुए कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को कुछ जरूरी सावधानियों को बरतने को कहा है। तो आइए ट्रैक्टरगुरू की इस पोस्ट के माध्यम से  जानते हैं कि कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों के लिए किन सावधानियों को अपनाने को कहा है।

अगले 24 से 48 घंटों में उत्तराखंड के इन जिलों में भारी बारिश की चेतावनी

मौसम विभाग के मुताबिक देश के ज्यादातर हिस्सों में मानसूनी बारिश का असर जारी है। मौसम विभाग ने अगले 24 से 48 घंटों के दौरान उत्तराखंड के सात जिलों के लिए अत्यंत भारी बारिश का रेड अलर्ट जारी किया है। इसके साथ पर्वतीय जिलों के लिए यलो अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग के अनुसार, देहरादून, टिहरी, पौड़ी, नैनीताल, चम्पावत, ऊधमसिंहनगर, बागेश्वर व पिथौरागढ़ में कहीं कहीं भारी से बहुत भारी बारिश होने की आशंका जताई है। इसके लिए इन जिलों को आरेंज अलर्ट में रखा गया है। देहरादून, टिहरी, पौड़ी, नैनीताल, चम्पावत, उधमसिंहनगर व हरिद्वार जिलों के कुछ स्थानों के लिए भारी से बहुत भारी बारिश होने के साथ कहीं कहीं अत्यंत भारी बारिश होने आशंका को लेकर रेड अलर्ट यथावत रखा गया है। शेष जिलों में कहीं कहीं भारी से बहुत भारी बारिश का आरेंज अलर्ट है।

कृषि वैज्ञानिकों ने उत्तराखंड के किसानों के लिए जरूरी सलाह जारी की

बारिश को लेकर मौसम विभाग की चेतावनी के बाद कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को खरीफ फसलों के लिए सलाह दी है। कृषि वैज्ञारिकों का कहना है कि खड़े पौधों में बारिश का पानी जमा न होने दें। परिपक्व फलों की कटाई करें। वर्षा ऋतु के पौधे अवश्य लगाएं। मौसम के पूर्वानुमान को ध्यान में रखते हुए कीटनाशक/कवकनाशी का छिड़काव पर विशेष ध्यान दें। यदि फसलों में छिड़काव आवश्यक हो, तो कीटनाशकों के साथ चिपकने वाले पदार्थ का प्रयोग करें। फसलों में निराई-गुडाई और गैप फिलिंग की जानी चाहिए।

धान खेती के सलाह - कृषि वैज्ञानिकों का कहना हैं कि बरसात से धान की फसल को फायदा है। धान की फसल में अगर पत्ता लपेट यानी लीफ फोल्डर जैसी बीमारी का यदि कोई प्रकोप है भी तो वह इससे दूर हो जाएगा। दूसरा इस तरह की बरसात की धान की फसल को जरूरत है क्योंकि अभी किसानों के खेतों में धान की फसल फ्लोरिंग स्टेज पर है। लगभग 12 से 14 दिनों में किसानों के खेतों में धान के पौधों की मिल्की स्टेज शुरू हो जाएगी। लेकिन भारी बारिश इसकी फसल के लिए चिंता का विषय है। मौसम विभाग की भारी बारिश की चेतावनी को देखते हुए किसान फसल के लिए बांधों को मजबूत रखें, रोपाई के 2 से 3 सप्ताह बाद हाथ से निराई करें। साथ ही खेत में से अत्याधिक पानी को बाहर निकालने की व्यवस्था करें। 

फूलगोभी - आने वाले दिनों में बारिश के पूर्वानुमान को ध्यान में रखते हुए, किसान फूलगोभी के खेत में उचित जल निकासी की व्यवस्था करें तथा उस खेत का विशेष ध्यान रखे जहां फूलगोभी की शुरुआती किस्म की रोपाई की गई हो।

मक्का - कृषि वैज्ञानिकों के मुताबिक जून के महीने में बोई गई मक्का में बुवाई के 15 से 25 दिनों के बाद निराई-गुड़ाई आदि कृषि कार्य का विशेष ध्यान रखे। जिन किसानों ने अभी मक्का की बुवाई नहीं की है उनके लिए कृषि वैज्ञानिकों कहा है कि पर्याप्त नमी को ध्यान में रखते हुए किसान इस सप्ताह मक्का की बुवाई कर दें। इसकी उन्नत किस्मों का चुनाव करें ताकि पैदावार अच्छी हो। मौसम के पूर्वानुमान को ध्यान में रखते हुए मक्के की फसल की बुवाई मेढ़ों पर करे। जब फसल 2-3 फीट की ऊंचाई पर पहुंच जाती है, तो इसमें नाइट्रोजन की टॉप ड्रेसिंग दें। साथ ही खेत में उचित जल निकासी बनाए रखे। 

अदरक - सड़े हुए मल्च निकालें तथा फसल के खेत में बारिश का पानी जमा न होने दें।

टमाटर - मौसम विभाग के मुताबिक पहाड़ी क्षेत्रों, टमाटर, बैंगन और शिमला मिर्च की फसल में मानसून बारिश का पानी खेत में जमा न होने पाएं। इसके लिए खेत में उचित जल निकासी बनाए रखनी चाहिए और फलों की तुड़ाई समय पर करनी चाहिए।

भिन्डी - कृषि वैज्ञानिकों ने विभाग की चेतावनी को ध्यान में रखते हुए ऐसे किसानों सलाह कहा कि जिन किसानों ने आज तक भिंडी की फसल नहीं बोई है, उन्हें सलाह दी जाती है कि वे जल्द से जल्द बुवाई करें और पिछले महीने बोई गई भिंडी की फसल में निराई, गुड़ाई और जल निकासी की उचित व्यवस्था करें। बारिश के मौसम के लिए अनुशंसित भिंडी किस्म का चयन करें और जो भिंडी में पीली नस मोजेक रोग के लिए प्रतिरोधी हैं।

सेब - ऊपर से काम करने वाले पेड़ों/ग्राफ्टेड सामग्री को खोल लें। घिसे-पिटे मल्चिंग को बदलें। फलों को पक्षियों से बचाने के लिए जाल का प्रयोग करें।

अनार - कीड़ों से बचाव के लिए फलों को मलमल के कपड़े से ढक दें। साफ मौसम के दौरान फल छेदक के खिलाफ अनुशंसित कीटनाशक का छिड़काव करें।

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