Honey Production Policy : कृषक एवं भूमिहीन मजदूर किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए सरकार द्वारा कई अहम कदम उठाए जा रहे हैं। बागवानी फसलों की खेती एवं शहद उत्पादन के लिए किसानों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसके लिए राज्यों द्वारा कई प्रोत्साहन योजनाएं भी चलाई जा रही हैं। इस कड़ी में बिहार के गांधी मैदान पटना में बागवानी महोत्सव 2025 का आयोजन किया गया। कृषि विभाग, बिहार सरकार द्वारा आयोजित किए गए इस तीन दिवसीय बागवानी महोत्सव में राज्य के कृषि मंत्री मंगल पांडेय ने राज्य के भूमिहीन किसानों को लेकर बड़ी घोषणा की है। उन्होंने कहा, शहद उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए सरकार नई प्रोत्साहन नीति ला रही है, जिसे पूरे राज्य भर में लागू किया जाएगा। इस पॉलिसी के तहत मुख्य रूप से भूमिहीन किसानों को शहद उत्पादन से जोड़ने की पहल शुरू की जाएगी, जिससे राज्य के भूमिहीन किसान मधुमक्खी पालन (Beekeeping) कर खुद को सशक्त बनाएंगे। कृषि मंत्री मंगल पांडेय ने यह बातें बागवानी महोत्सव के उद्वाटन कार्यक्रम में कही।
पटना के गांधी मैदान में आयोजित तीन दिवसीय बागवानी महोत्सव का उद्धाटन राज्य के कृषि मंत्री मंगल पांडेय द्वारा किया गया है। इस अवसर पर कृषि मंत्री ने कहा कि कृषि बिहार की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, जो प्रदेश के आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक क्रिया-कलापों का आधार है। रंग-बिरंगे फल, फूल, सब्जी एवं अन्य बागवानी उत्पादों से सुसज्जित यह बागवानी महोत्सव किसानों के उत्साह का गवाह है। कृषि मंत्री ने कहा कि सरकार जल्द ही शहद के उत्पादन एवं प्रोत्साहन के लिए नई नीति लाएगी। इस नीति (Policy) के तहत कृषि विभाग सूरजमुखी, सहजन, सरसों, लीची जैसे फल एवं फूलों के शहद का उत्पादन करने की पॉलिसी बनेगी। बागवानी महोत्सव 2025 में राज्यभर के सभी जिलों से लगभग 1500 किसानों ने 14 हजार से ज्यादा प्रदर्शों के साथ प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शनी में लगाई गई स्टॉल्स से दर्शकाें ने मनपसन्द फल, फूल, सब्जी के बीज/बिचड़ा, पौधा, गमला, मधु, मखाना, मशरूम आदि खरीदे।
कृषि विभाग द्वारा आयोजित इस तीन दिवसीय बागवानी महोत्सव में फल, फूल, सब्जी के बीज, बिचड़ा, पौधा, बागवानी उपकरण, मधु, मखाना, मशरूम, चाय आदि बागवानी उत्पादों की बिक्री की व्यवस्था की गई। इस तीन दिवसीय महोत्सव में करीब 50 लाख रुपये के पौधे बिके। सबसे अधिक गेंदा, गुलाब, एंथेरियम, पंसटिया और मनी प्लांट की कई वैराइटी के पौधे बिके। साथ ही छत पर बागवानी योजना के तहत 150 से अधिक आवेदन आए। बागवानी महोत्सव के अंतिम दिन कृषि मंत्री मंगल पांडेय ने प्रतियोगिता के विजेताओं को पुरस्कृत किया। सबसे अधिक पुरस्कार भागलपुर उसके बाद पटना और वैशाली के किसानों ने जीते। 297 विजेता किसानों को लगभग 12 लाख रुपए का पुरस्कार दिया गया।
कृषि मंत्री ने कहा कि ऐसा मेला साल में दो बार लगना चाहिए, जिससे किसानों का मनोबल बढ़ता है। राज्य में साढ़े 13 लाख हेक्टेयर में बागवानी हो रही है, जिससे करीब 286.45 लाख मीट्रिक टन फल, फूल, सब्जी आदि बागवानी उत्पादों का उत्पादन होता है। इसका रकबा आने वाले समय में और आगे बढ़ाया जाएगा। क्षेत्र विशेष फल-फूल और सब्जियों की बागवानी खेती कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि कृषि रोडमैप के लक्ष्य से आगे बढ़कर भी सोचने की आवश्यकता है। सालाना लक्ष्य निर्धारित करने की दिशा में भी हम सोच सकते हैं। वर्ष 2025 में बागवानी का लक्ष्य बढ़ाकर 18 लाख हेक्टेयर एवं वर्ष 2026 तक इसे बढ़ाकर 20 लाख हेक्टेयर पर ले जाने का तय करना चाहिए। बागवानी के क्षेत्र में बिहार लगातार प्रगति कर रहा है। वर्तमान में राज्य के किसान पारंपरिक बागवानी फसलों के साथ-साथ ड्रैगन फ्रूट्स, स्ट्रॉबेरी आदि का उत्पादन भी कर रहे हैं।
गांधी मैदान में आयोजित इस बागवानी महोत्सव में पौधों के बिचड़ों, बीजों, मधु एवं मखानों सहित विभिन्न उत्पादों की बिक्री हुई। इन तीन दिनों में करीब 2 लाख लोग आए। कृषि विशेषज्ञों द्वारा किसानों को बदलते मौसम के हिसाब से खेती करने एवं उत्पादन बढ़ाने का प्रशिक्षण दिया गया। तीन दिवसीय बागवानी महोत्सव में 788 किसानों ने 100 स्टालों पर 1200 से भी ज्यादा उत्पाद प्रदर्शित किए। सबसे अधिक उत्पाद दिखाने में पहले स्थान पर पूर्णिया, फिर वैशाली और अन्य जिले रहे। इस बार कृषि उत्पादों की प्रदर्शनी के साथ नर्सरी, बीज, बिचड़ा, सजावटी पौधों, मधु, मखाना आदि का स्टॉल लगाया गया, जिनकी करीब 25 लाख रुपए की बिक्री हुई। राज्य के कृषि विभाग के सचिव संजय कुमार के मुताबिक, तीन दिनों तक चले इस बागवानी महोत्सव का उद्देश्य राज्य में बागवानी फसलों के गुणवत्ता को ध्यान में रखकर उत्पादन को बढ़ावा देना है। राज्य के किसानों के बीच उत्पादन प्रतिस्पर्धा को बढ़ाना है और किसानों को बागवानी क्षेत्र से जुड़ी नई तकनीक उपकरणों तथा खेती करने के आधुनिक तकनीकों से परिचय कराना है।
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