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गोबर गैस प्लांट बनाने पर सरकार दे रही 50 प्रतिशत सब्सिडी, जानिए कहां करना है आवेदन

गोबर गैस प्लांट बनाने पर सरकार दे रही 50 प्रतिशत सब्सिडी, जानिए कहां करना है आवेदन
पोस्ट -19 अक्टूबर 2023 शेयर पोस्ट

गोबर गैस प्लांट निर्माण के लिए किसानों को 50 प्रतिशत का अनुदान, यहां करें ऑनलाइन आवेदन

Gobar Gas Plant Subsidy : ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले अधिकांश लाेग पशुपालन क्षेत्र में दुधारू पशुओं का पालन अतिरिक्त कमाई के उद्देश्य से करते हैं। आज के समय में किसान दुधारू पशुओं से प्राप्त दुग्ध को बाजारों में बेचकर अच्छा मुनाफा भी कमा रहे हैं और अपनी आर्थिक व्यवस्था को मजबूत बना रहे हैं। वहीं, पशुओं के व्यर्थ पदार्थ का उपयोग खेतों की उर्वरा शक्ति को बढ़ाने में भी करते हैं। क्योंकि इसके प्रयोग से मिट्टी में जीवांश की संख्या बढ़ जाती है। इसके अलावा, पशुओं के गोबर का उपयोग जलवान के लिए उपला और गोइठा के तौर पर किया जाता है। सही मायने में देखा जाए तो पशुपालन किसानों की अर्थ व्यवस्था की रीढ़ है। गोबर गैस प्लांट किसानों के लिए एक बहुउद्देशीय योजना है। इसमें किसानों को स्वच्छ ईंधन के साथ ही ऑर्गेनिक खाद भी मिल जाती है। इसी क्रम बिहार सरकार ने इसके महत्व को देखते हुए राज्य में किसानों को गोबर/बायो गैस प्लांट निर्माण पर अनुदान देने का  फैसला किया है। सरकार का मानना है कि अगर ऊर्जा के लिए गोबर का उपयोग बायो–गैस के रूप में एवं प्राप्त स्लरी का प्रयोग वर्मी कम्पोस्ट खाद प्राप्त करने के लिए किया जाए तो इससे किसानों को दुगुना लाभ होगा। इन्हीं को देखते हुए सरकार गोबर/ बायो गैस प्लांट बनाने के लिए अनुदान दे रही है। किसान योजना में ऑनलाइन आवेदन कर लाभ उठा सकते हैं। आईए, इस लेख में बायो गैस प्लांट संबंधित जानकारी जैसे गोबर गैस प्लांट कैसे बनाए और गोबर गैस प्लांट पर कितनी सब्सिडी मिलेगी के बारे में जानते हैं। 

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गोबर गैस प्लांट पर किसानों को कितना अनुदान दिया जाएगा?

पशुपालन में सबसे बड़ी समस्या गोबर निपटान ही बनता है। ऐसे में गोबर निपटान के चुनौतीपूर्ण कार्य को सरलता से हल करने के लिए सरकार ने गोबर/ बायोगैस प्लांट योजना चलाई है। जिसमें किसानों को गोबर गैस प्लांट बनाने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए आर्थिक मदद दी जाएगी। योजना के अतंर्गत गोबर गैस इकाई निर्माण के लिए अनुदान का लाभ उन किसानों को दिया जाएगा, जो खेती के साथ पशुपालन करते हैं और उनके पास 4 से 5 की संख्या में पशु है। योजना के तहत एक किसान गोबर प्लांट पर अधिकतम एक ही  इकाई के लिए लाभ उठा सकते हैं। इकाई स्थापना के लिए दीनबन्धु मॉडल अपनाया जाता है। इकाई के लिए किसान के पास कम–से–कम 10’x12’ निजी भूमि उपलब्ध होनी चाहिए। योजना के तहत बायोगैस प्लांट निर्माण पर कुल इकाई लागत 42 हजार रुपए आंकी गई है। इसमें किसानों को 50 प्रतिशत या अधिकतम 21 हजार रुपए/ इकाई दोनों में से जो कम हो, योजना के तहत अनुदान के तौर दिया जाएगा। साथ ही इसमें 1500 रुपए (टर्न–की राशि) दी जाएगी।

गोबर/ बायोगैस इकाई निर्माण योजना में आवेदन के लिए आवश्यक दस्तावेज क्या है?

गोबर/ बायोगैस इकाई निर्माण योजना के तहत अगर इच्छुक किसान गोबर गैस प्लांट का निर्माण करना चाहते हैं, तो उन्हें योजना के तहत ऑनलाइन आवेदन करना होगा। आवेदन करने के लिए किसानों को गोबर गैस संयंत्र निर्माण करने के लिए विहित प्रपत्र में आवेदन के साथ स्व–अभिप्रमाणित पहचान पत्र, भू–स्वामित्व प्रमाण पत्र / भूमि की रसीद / भूमि से संबंधित अन्य दस्तावेज अटैच करना होगा। गोबर गैस संयंत्र का नक्शा और प्राक्कलन संलंग्न करना आवश्यक है। सब्सिडी प्राप्त उत्पादन प्लांट से गोबर गैस का उत्पादन आगामी पांच वर्षों तक करना जरूरी होगा। किसानों को आवेदन के साथ उक्त आश्य का शपथ पत्र संलग्न करना जरूरी होगा।

गोबर गैस प्लांट के लिए ऑनलाइन आवेदन कैसे और कहां करें?

बिहार सरकार द्वारा राज्य में किसानों को गोबर गैस प्लांट की स्थापना के लिए अनुदान दिया जा रहा है। इस लाभ को लेने के लिए किसान योजना के तहत आवेदन कर सकते हैं। आवेदन करने के इच्छुक किसान अपने नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर या वसुधा केंद्र से ऑनलाइन गोबर गैस इकाई हेतु संपर्क कर सकते हैं।  इसके अलावा, किसान स्वयं अपने लैपटाप या मोबाईल से भी गोबर / गैस संयंत्र स्थापना पर अनुदान के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रस्तुत कर सकते हैं। इसके लिए आवेदक किसान के पास पहले से 13 अंकों का डी.बी.टी. पंजीकरण संख्या का होना अनिवार्य है। जिन किसानों के पास पंजीकरण संख्या नहीं है वे किसान पहले dbtagriculture.bihar.gov.in पर अपना रजिस्ट्रेशन कराकर पंजीकरण संख्या प्राप्त कर सकते हैं। योजना में लाभार्थी को लाभ “पहले आओ–पहले पाओ” के आधार पर दिया जा रहा है। राज्य के  इच्छुक लाभार्थी योजना का लाभ लेने के लिए 31 अक्टूबर 2023 तक ही आवेदन कर सकते हैं।

गोबर गैस प्लांट से किसानों को होने वाले लाभ

बायो गैस को गैर परंपरागत ऊर्जा का सबसे अच्छा स्रोत माना जाता है। इसमें पशुओं के व्यर्थ अपशिष्ट पदार्थ और घरेलू तथा खेती के अपशिष्ट पदार्थों का इस्तेमाल से बायो ईंधन और जैविक खाद प्राप्त की जाती है। इसके लिए इन अपशिष्ट पदार्थों को बायोगैस प्लांट में डालकर कम ताप पर डाइजेस्टर में चलाकर माइक्रो प्रक्रियाओं द्वारा बायोगैस (मिथेन या गोबर गैस) प्राप्त की जाती है। इसमें उत्पादित बायोगैस में 75 प्रतिशत मिथेन गैस होती है, जो एक ज्वलनशील गैस होती है और यह बिना धुआं उत्पन्न किए जलती है। रसोई का चूल्हा चलाने, रोशनी के लिए बिजली तथा कृषि संयंत्रों के संचालन में बायोगैस का उपयोग किया जा सकता है। इससे पर्यावरण प्रदूषण को काफी हद तक कम किया जा सकता है। इसमें अवशेष के रूप में स्लरी प्राप्त होती है, जिससे 25-30 दिनों में जैविक खाद तैयार की जा सकती है। यह खाद खेती में मिट्टी की उपजाऊ शक्ति को बढ़ाने के लिए मददगार है। जिससे फसल की उपज भी बेहतर मिलने लगती है। 2 घनमीटर के बायो–गैस प्लांट से महीने में लगभग 1.5-2 एल.पी.जी. सिलेंडर के बराबर गैस उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है। बायोगैस प्लांट गोबर रिसाइकिल का सबसे बेहतर विकल्प हैं। किसान इस संयंत्र से गाय -भैंसों के गोबर का निपटारा बिना किसी परेशानी के कर सकते हैं और इससे लाभ भी कमा सकते हैं। 

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