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सरकार ने 5 करोड़ गन्ना किसानों को दी सौगात, गन्ने के नए सीजन के लिए बढ़ाया एफआरपी

सरकार ने 5 करोड़ गन्ना किसानों को दी सौगात, गन्ने के नए सीजन के लिए बढ़ाया एफआरपी
पोस्ट -03 जुलाई 2023 शेयर पोस्ट

गन्ना किसानों फायदा : गन्ने के नए सीजन के लिए एफआरपी में 10 रुपए की बढ़ोतरी

गन्ना उत्पादक राज्यों में उत्तर प्रदेश प्रमुख है। यहां गन्ना सीजन 2022-23 के दौरान 28.53 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में गन्ना उत्पादन किया गया। ऐसे में मोदी सरकार ने गन्ना उत्पादक किसानों को उपज की गारंटीड कीमत (एफआरपी) में 10 रुपए प्रति क्विंटल बढ़ाने का फैसला किया है। इस गन्ना सीजन के लिए अब गन्ने की एफआरपी 305 रुपये से बढ़कर 315 रुपये प्रति क्विंटल हो गई है। आईये, जानें गन्ना किसानों को इससे कितना लाभ होगा। 

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Sugarcane FRP 2023-24 : गन्ने की एफआरपी में 10 रुपए प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी से किसानों को होगा लाभ

गन्ना उत्पादक किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी है। मोदी कैबिनेट ने देश के करोड़ों गन्ना किसानों को बड़ी सौगात देते हुए गन्ने की एफआरपी को बढ़ाने का फैसला किया है। केंद्र सरकार ने द कमीशन फॉर एग्रीकल्चर कास्ट्स एंड प्राइज (सीएसीपी) की सिफारिश पर गन्ना सीजन 2023-24 के लिए गन्ने की एफआरपी (उपज की गारंटीड मूल्य) बढ़ाने के लिए मंजूरी दे दी है। कैबिनेट के इस ऐलान से गन्ना किसानों के बीच खुशी का माहौल है। मोदी सरकार के इस फैसले से देश के करोड़ों किसानों को लाभ पहुंचेगा, जिसमें सबसे अधिक लाभ महाराष्ट्र और यूपी के गन्ना उत्पादक किसानों को होगा। आइए, केंद्र सरकार के इस फैसले के बारे में विस्तार से जानें।
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गन्ने की एफआरपी (Sugarcane FRP ) अब हो गई 315 रुपए प्रति क्विंटल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में गन्ना के नए सीजन 2023-24 के लिए गन्ने का उचित और लाभकारी मूल्य (एफआरपी) बढ़ाने का फैसला किया गया है। केंद्र सरकार ने गन्ना किसानों को बड़ी सौगात देते हुए नए सीजन की फसल के लिए गन्ने का एफआरपी (Fair and Remunerative Prices) 10 रुपए प्रति क्विंटल बढ़ाकर 315 रुपए कर दिया है, जो कि पिछले फसल सीजन में 305 रुपए प्रति क्विंटल था। 

2014-15 में गन्ने का एफआरपी था 210 रुपए प्रति क्विंटल 

केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में लिए गए फैसलों की जानकारी देते हुए सूचना एवं प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा कि मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की कमेटी ने गन्ने का उचित और लाभकारी मूल्य (एफआरपी) बढ़ाने का फैसला किया है। 2023-24 फसल सीजन के लिए गन्ने का एफआरपी 315 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी हमेशा अन्नदाताओं के साथ हैं। सरकार हमेशा कृषि और किसानों को प्राथमिकता देती रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार जब सत्ता में आई थी तब गन्ने का एफआरपी 2014-15 में 210 रुपए प्रति क्विंटल था। लेकिन अब वह बढ़कर सत्र 2023-24 में 315 रुपए प्रति क्विंटल हो चुका है। 

सरकार के फैसले से 5 करोड़ किसानों को होगा फायदा

फैसले की जानकारी देते हुए मंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा कि गन्ना किसानों के लिए सरकार ने गन्ने के एफआरपी में 10 रुपए प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी करने का फैसला किया है। सत्र 2023-24 के लिए उचित और लाभकारी मूल्य सत्र 2022-23 सीजन के मुकाबले 3.28 प्रतिशत अधिक है। गन्ने का नया एफआरपी अक्टूबर 2023 से शुरू होने वाले नए गन्ने के सीजन से लागू होगी। कृषि लागत और मूल्य आयोग (Commission for Agricultural Costs and Prices) की सिफारिशों के आधार पर और राज्यों और दूसरे स्टेकहोल्डर्स के साथ परामर्श करने के बाद ही गन्ने का नया एफआरपी तय किया गया है। मोदी सरकार के इस फैसले से करीब 5 करोड़ गन्ना उत्पादक किसानों को फायदा होगा। इसके अलावा, गन्ना मिलों और इससे जुड़े एक्टिविटी में काम करने वाले लगभग 5 लाख कर्मचारियों को भी इसका लाभ मिलेगा। 

गन्ना एफआरपी ( Sugarcane FRP ) 

केंद्र सरकार के इस फैसले के बाद गन्ने का नया एफआरपी 315 रुपये प्रति क्विंटल हो गया है, जबकि गन्ना उत्पादन का लागत मूल्य 157 रुपए प्रति क्विंटल है। यानि 10.25 प्रतिशत रिकवरी दर के हिसाब से उत्पादन लागत से 100.6 प्रतिशत अधिक एफआरपी सरकार द्वारा गन्ना उत्पादक किसानों को दिया जा रहा है। देश में अक्टूबर से नया शक्कर वर्ष शुरू होने जा रहा है। ऐसे में केंद्र सरकार के इस फैसले से किसानों को बहुत ही फायदा होगा। जानकारी के लिए बता दें कि गन्ने पर एफआरपी (न्यूनतम मूल्य) यानि गन्ना का उचित और लाभकारी मूल्य फिक्स करके चीनी मिलों को गन्ना उत्पादक किसानों को उत्पादन की गारंटीड राशि के तौर पर देना होता है।  

गन्ना उत्पादन में नंबर वन राज्य है उत्तर प्रदेश 

सरकार ने कहा कि देश में गन्ने के कुल उत्पादन में उत्तर प्रदेश 46 प्रतिशत की हिस्सेदारी के साथ नंबर वन पर आता है। गन्ना फसल सीजन 2022-23 में उत्तर प्रदेश में 28.53 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में गन्ने की बुवाई किसानों ने की थी, जबकि महाराष्ट्र में 14.9 लाख हेक्टेयर के क्षेत्र में किसानों ने गन्ने की बुवाई की थी। पूरे देश में गन्ना उत्पादन का रकबा 62 लाख हेक्टेयर है। इसमें 24 प्रतिशत की हिस्सेदारी के साथ महाराष्ट्र गन्ना उत्पादन में दूसरा राज्य है, जबकि कर्नाटक, तमिलनाडु, हरियाणा, बिहार और गुजरात जैसे अन्य राज्य बाकि हिस्सेदारी देश के गन्ना उत्पादन में देते हैं। 

योगी सरकार ने जारी किया पेराई सत्र 2022-23 के लिए बकाया भुगतना 

जानकारी के लिए बता दें कि बीते दिनों उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने पेराई सत्र 2022-23 के लिए गन्ना बकाया भुगतान राशि 450 करोड़ रुपए जारी किए हैं। मीडिया सूत्रों द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक, पेराई सत्र 2022-23 का गन्ना बकाया सहकारी चीनी मिलों पर था, जिसके भुगतान के लिए सरकार द्वारा चीनों मिलों को आदेश दिए गए। इसके लिए सरकार ने चालू वित्तीय वर्ष 2023-24 के बजट के तहत प्राविधानित धनराशि के सापेक्ष, ऋण के रूप में सहकारी चीनी मिलों को स्वीकृत कर 450 करोड़ रुपए की राशि जारी की गई है। वहीं, सरकार ने सहकारी और निजी चीनी मिलों को आदेश देते हुए कहा कि बकाया भुगतान की राशि लंबित नहीं होनी चाहिए। गन्ना उत्पादक किसानों के खाते में लंबित राशि का भुगतान मिलों द्वारा समय पर किए जाने के स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं। यूपी के चीनी उद्योग एवं गन्ना विकास मंत्री लक्ष्मी नारायण चौधरी ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी की सरकार गन्ना किसानों के हित में लगातार लाभकारी फैसले ले रही है। राज्य में गन्ना उत्पादन बढ़ने और किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए हर संभव कदम उठाकर किसानों को फायदा पहुंचाने का प्रयास सरकार अपने स्तर पर कर रही है।

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