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ई-किसान उपज निधि : गोदामों में रखे अनाज पर भी सस्ता लोन ले सकेंगे किसान

ई-किसान उपज निधि : गोदामों में रखे अनाज पर भी सस्ता लोन ले सकेंगे किसान
पोस्ट -07 मार्च 2024 शेयर पोस्ट

किसान अब गोदामों में रखे अनाज पर ले सकेंगे लोन, सरकार ने लॉन्च किया डिजिटल प्लेटफार्म

E-Kisan Upaj Nidhi : केंद्र सरकार ने लोकसभा चुनाव से पहले किसानों को बड़ी सौगात दी है। किसान अब गोदामों में रखे अपने अनाज पर लोन ले सकेंगे। किसानों को बिना कुछ गिरवी रखे सात प्रतिशत की ब्याज दर से आसानी से लोन मिल सकेगा। 

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केंद्रीय खाद्य एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्री पीयूष गोयल (Union Food and Consumer Affairs Minister Piyush Goyal) ने इस संबंध में जानकारी दी है। मंत्री पीयूष गोयल ने नई दिल्ली में डब्ल्यूडीआरए के ई-किसान उपज निधि (डिजिटल गेटवे) पोर्टल को लॉन्च किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि इस डिजिटल प्लेटफार्म से वेयरहाउसिंग डेवलपमेंट एंड रेगुलेटरी अथॉरिटी (डब्ल्यूडीआरए) के पास रजिस्टर्ड गोदामों में रखे उत्पादों पर किसान को बैंकों से सस्ते ब्याज दर पर कर्ज की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। उन्होंने कहा इस डिजिटल प्लेटफार्म से किसानों की आय बढ़ाने एवं कृषि को आकर्षक बनाने में मदद मिलेगी।

किसानों के लिए गोदामों का शुल्क किया जाएगा कम

गोयल ने कहा कि डिजिटल प्लेटफार्म 'ई-किसान उपज निधि' से जुड़े बैंक किसानों को ब्याज दर और राशि चुनने का विकल्प भी उपलब्ध कराएंगे। अभी डब्ल्यूडीआरए के पास करीब 5,500 गोदाम पंजीकृत हैं। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भंडारण के लिए सुरक्षा राशि को बहुत जल्द कम किया जाएगा। किसानों को अभी तक गोदामों में अपनी उपज भंडारण के लिए 3 प्रतिशत सुरक्षा राशि देनी पड़ती है, जिसे तीन प्रतिशत से घटाकर एक प्रतिशत किया जाएगा। उन्होंने बताया कि किसानों की आय बढ़ाने के लिए टेक्नोलॉजी के उपयोग से कृषि को आधुनिक बनाने के लिए यह फैसला लिया गया है। 

किसानों को मिल सकेगा उचित मूल्य 

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि ई-फार्मर प्रोड्यूस फंड प्लेटफॉर्म किसानों को संकट के समय कम कीमत पर अपनी उपज बेचने से रोकेगा। ई-किसान उपज निधि और प्रौद्योगिकी से किसानों की उपज के भंडारण में सुविधा होगी। किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र 2047 तक देश को ‘विकसित भारत’ बनाने की दिशा में आधार स्तंभ होगा। गोयल ने कहा कि बीते एक दशक में एमएसपी के माध्यम से सरकारी खरीद 2.5 गुना बढ़ी है। वेयर हाउसिंग डेवलपमेंट एंड रेगुलेटरी अथॉरिटी (डब्ल्यूडीआरए) से सहकारी क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले सभी गोदामों का नि:शुल्क रजिस्ट्रेशन करने के एक प्रस्ताव की योजना बनाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि सहकारी क्षेत्र के गोदामों को सहायता देने की पहल से किसानों को डब्ल्यूडीआरए गोदामों में अपनी उपज का भंडारण करने के लिए बढ़ावा मिलेगा, इससे उन्हें अपनी उपज बेचने पर उचित मूल्य मिल सकेगा।  

खेती (Farming)  को आकर्षक बनाने का महत्वपूर्ण प्रयास

केंद्रीय खाद्य एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्री पीयूष गोयल ने कहा “डिजिटल गेटवे की पहल खेती (Farming)  को आकर्षक बनाने के हमारे प्रयासों में एक महत्वपूर्ण कदम है। किसी भी संपत्ति को गिरवी रखे बिना, ई-किसान उपज निधि (E-Kisan Produce Fund) किसानों को संकट के समय में अपनी फसल उपज बेचने से रोक सकती है, जिन्हें फसल के बाद अच्छी भंडारण (Storage) रखरखाव सुविधाओं की कमी के कारण अक्सर अपनी पूरी फसल उपज सस्ती दरों पर बेचनी पड़ती है। उन्होंने कहा कि डब्ल्यूडीआरए के माध्यम से गोदामों की अच्छी तरह से निगरानी की जाती है, वे बहुत अच्छी स्थिति में हैं और वे बुनियादी ढांचे से सुसज्जित हैं, जो कृषि उपज को अच्छी स्थिति में रखते हैं तथा खराब नहीं होने देते हैं और इस प्रकार ये किसान कल्याण को बढ़ावा देते हैं।

एक लाख गोदाम किए जाएंगे रजिस्टर्ड

ई-किसान उपज निधि (ई-फार्मर प्रोड्यूस फंड) प्लेटफॉर्म के बारे में विस्तार से बताते हुए, पीयूष गोयल ने कहा कि अपनी सरलीकृत डिजिटल प्रक्रिया के साथ, यह पहल किसानों के लिए किसी भी पंजीकृत डब्ल्यूडीआरए (WDRA) गोदाम में 6 महीने की अवधि के लिए 7 फीसदी वार्षिक ब्याज पर भंडारण की सुविधा प्रदान करेगी। उन्होंने गोदाम पंजीकरण के लिए एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म (मंच) उपलब्ध कराने की वेयर हाउसिंग डेवलपमेंट एंड रेगुलेटरी अथॉरिटी (डब्ल्यूडीआरए) पहल की सराहना की, जिसमें साल-दर-साल (YTD) उल्लेखनीय वृद्धि देखी जा रही है। एक लाख गोदामों को इस  डिजिटल पोर्टल पर रजिस्टर्ड करने का लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि पिछले साल 1500 गोदाम पंजीकृत किए गए थे। किसान “ई-किसान उपज निधि” (E-Kisan Produce Fund) और “ई-नाम पोर्टल” (eNam portal) मंच से इंटरकनेक्टिड मार्केट की प्रोद्योगिकी का इस्तेमाल करने में सक्षम होंगे और सरकार को सीधे अपनी उपज एमएसपी मूल्य पर बेचकर उपज का उचित मूल्य हासिल कर सकेंगे।

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