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पराली से सूखा चारा बनाकर हर दिन करें 15 हजार रुपए की कमाई

पराली से सूखा चारा बनाकर हर दिन करें 15 हजार रुपए की कमाई
पोस्ट -05 नवम्बर 2023 शेयर पोस्ट

पराली से किसान हर दिन कर रहे 15 हजार रुपए की कमाई, पशुओं के लिए बना रहे है सूखा चारा

Stubble Burning :  गेहूं की बिजाई के लिए किसानों ने अपने खेतों  को तैयार करना शुरू कर दिया है। इसके लिए किसान खेतों में पुरानी फसल के अवशेषों को जलाना शुरू कर देते हैं। इस अवधि में पंजाब, हरियाणा दिल्ली, एनसीआर क्षेत्र उत्तर प्रदेश में पराली जलाने की काफी घटनाएं सामने आती है। पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए राज्य सरकारें अपने-अपने स्तर पर कड़े कदम भी उठा रही है। पराली के उचित प्रबंधन के लिए राज्य सरकारें अपने स्तर पर कृषि यंत्र योजना चलाकर किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन के लिए उपयोगी यंत्रों पर तय प्रावधानों के अनुसार अनुदान दे रही है। किसान धान की खूंटी, पुआल (पराली) आदि को खेतों में न जलायें इसके लिए उन्हें विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से जागरूक किया जा रहा है। साथ ही फसल अवशेष जलाने वाले किसानों से केंद्र और राज्यों की सरकारों द्वारा संचालित योजना के लाभ से वंचित किए जाने और  एमएसपी यानी समर्थन मूल्य पर धान नहीं खरीदने जैसे कई अहम निर्णय लिए जा रहे हैं। जिसके परिमाणस्वरूप, पंजाब में पिछले सालों के मुकाबले इस साल पराली जलाने के मामलों में भारी कमी आ रही है। क्योंकि किसान पराली जलाने के बजाय इससे पशुओं का सूखा चारा बनाकर अच्छा पैसा भी कमा रहा है और खेत से पराली का उचित प्रबंधन बिना प्रदूषण के हो रहा है।
 
पराली के इस्तेमाल से मवेशियों के लिए बना रहे सूखा चारा
 
वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) के मुताबिक, हरियाणा और पंजाब में इस साल पराली जलाने की घटनाओं में भारी कमी दर्ज की जा रही है। पंजाब के संगरूर में सबसे ज्यादा धान की खेती होती है और पिछले कई सालों से यहां पराली जलाने की घटनाएं  भी ज्यादा सामने आती थी, लेकिन यह आंकड़ा पिछले सालों के मुकाबले कम हुआ है। संगरूर में इस बार ज्यादातर किसान बेलर मशीन के साथ खेत में से धान की पराली की बेल्स बनाकर उठा रहे हैं और सुपर सीडर, स्मार्ट सीडर और हैप्पी सीडर मशीन के साथ गेहूं की बजाई कर रहे हैं। इसके अलावा, कुछ किसान खेत से पराली को सूखा चारा बनाने वाली मशीन के साथ ट्रॉली में भरकर मवेशियों के लिए चारा बनाकर इसे अच्छे भाव में बेचकर अच्छा मुनाफा भी कमा रहे हैं। ऐसे में पराली से किसानों को पैसा भी मिल रहा है और मवेशियों के लिए सूखा चारा मिल रहा है।
 
पराली से 12 हजार से लेकर 15 हजार रुपए तक की कमाई

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संगरूर जिला के वंगवाली गांव के किसान खेतों में पराली जलाने के बजाय खेत से धान की पराली को सूखे चारे में इस्तेमाल कर रहे हैं। इसके लिए संगरूर कृषि विभाग के अधिकारी डॉ. हरबंस सिंह ने मौके पर पहुंचकर किसानों का हौसला भी बढ़ाया। उनका कहना है कि वर्तमान में संगरूर के ज्यादातर किसान खेतों में पराली को जला नहीं रहे, बल्कि वो बेलर मशीन के साथ पराली के वेल्स बनाकर बायोगैस बनाने वाली कंपनी को दे रहे हैं और अच्छा मुनाफा कमा रहे है। इसके साथ वे सुपर सीडर और स्मार्ट सीडर कृषि मशीन के साथ गेहूं की बिजाई कर रहे हैं। कृषि चीफ का कहना है कि धान की पराली से सूखे चारे की एक ट्राली किसान 1700 में बेच रहा है और उसकी एक दिन की कमाई 12 हजार से लेकर 15 हजार रुपए है। उन्होंने मुताबिक, पिछले वर्ष संगरूर जिले में पराली जलाने के लगभग 53 सौ से अधिक मामले सामने आए थे, लेकिन इस बार उन्होंने बड़े स्तर पर किसानों को सब्सिडी पर फसल अवशेष प्रबंध के लिए उपयोगी  मशीनें  दी गई हैं। जिससे इस बार यह आंकड़े आधे से भी कम रहने का अनुमान है।

पंजाब में आने वाले 10 से 15 दिन में शुरू होगा गेहूं की बिजाई का समय

किसानों का कहना है कि उन्होंने कृषि विभाग से 2 साल पहले फसल अवशेष प्रबंधन के लिए ये मशीन ली थी। इस मशीन का इस्तेमाल गेहूं के सीजन में सूखे चारे बनाने के लिए होता है। लेकिन हमने एक साल पहले इस मशीन से धान की पराली के इस्तेमाल से सूखा चारा बनाकर देखा तो हमारी 1700 रुपए में पर ट्राली बिकी। हम  पराली से बने चारे को बेचकर 12 हजार से लेकर 15 हजार रुपए तक कमा लेते हैं। उसके बाद गेहूं की बिजाई करते हैं, तो हमें अच्छा मुनाफा भी होता है। वहीं, पंजाब में आने वाले 10 -15 दिनों में गेहूं की बिजाई का समय शुरू होने जा रहा है। धान की पराली को खेत से हटाकर गेहूं की बिजाई की जाएगी । ऐसे में इन दिनों में  पराली जलाने के मामले बढ़ सकते हैं। लेकिन कृषि विभाग का कहना है कि वह पहले के मुकाबले आधे मामले ही सामने आने की उम्मीद है, क्योंकि इस बार बड़े स्तर पर किसानों को सब्सिडी पर फसल अवशेषों के प्रबंधन में काम आने वाली मशीनें उपलब्ध करवाई गई हैं।  केंद्र के वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) के मुताबिक, 15 सितंबर से 29 अक्टूबर के बीच में पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के एनसीआर इलाकों और दिल्ली, में वर्ष 2022 में पराली जलाने की 13,964 घटनाएं हुई थीं, जो 2023 में घटकर 6,391 हो गईं।

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