हरियाणा सरकार ने क्षतिपूर्ति पोर्टल को विस्तृत करते हुए इसका दायरा बढ़ाया है। ई-क्षतिपूर्ति पोर्टल (e-compensation portal) पर किसानों के अलावा अब आम जनता भी प्राकृतिक आपदा (natural calamity) या अन्य किसी घटना के कारण से घरों, पशुओं, फसलों, कमर्शियल और चल-अचल संपत्ति के नुकसान की क्षतिपूर्ति के लिए दावा कर सकते हैं। नूंह हिंसा से वाणिज्यिक और चल-अचल संपत्ति में हुए व्यक्तिगत नुकसान की जानकारी भी इसी पोर्टल पर दर्ज की जा सकेंगी।
ई-क्षतिपूर्ति पोर्टल : प्राकृतिक आपदाओं से व्यक्तिगत नुकसान की क्षतिपूर्ति के लिए करें आवेदन
हरियाणा सरकार ने प्रदेश में किसानों के साथ-साथ आम जनता को भी राहत देने का फैसला लिया है। प्रदेश में बीते दिनों आई बाढ़ और भारी बारिश से फसलों में हुए नुकसान की क्षतिपूर्ति के लिए सरकार ने किसानों से ई-क्षतिपूर्ति पोर्टल पर जानकारी मांगी थी। वहीं, अब सरकार ने कहा कि घर के गिरने, पशुओं की मौत, व्यावसायिक नुकसान की क्षतिपूर्ति भी की जाएगी। किसी भी प्रकार के नुकसान के लिए ई-क्षतिपूर्ति पोर्टल पर क्लेम करें। इसके लिए पोर्टल के ऑपरेशन्स रेंज का विस्तार करते हुए ई-क्षतिपूर्ति पोर्टल (e-compensation portal) के नए स्वरूप को सरकार ने लॉन्च किया है। अब इस पोर्टल (portal) पर लोग अपने पशुधन, फसलों, औद्योगिक/व्यवसायिक प्रतिष्ठान, मकानों और चल-अचल संपत्ति की क्षति व नुकसान की जानकारी दर्ज कर सकेंगे। प्राकृतिक कारणों के कारण हुए नुकसान की क्षतिपूर्ति के दावे (claims for damages) किसानों के साथ-साथ आम लोग भी इस क्षतिपूर्ति पोर्टल पर 18 अगस्त तक दर्ज करवा सकते हैं। वहीं इस पोर्टल पर हाल ही में हुई नूंह हिंसा के कारण मकानों, दुकानों और चल-अचल संपत्ति को हुए क्षति व नुकसान की जानकारी भी लोग दर्ज करा सकेंगे। सरकार द्वारा अलग से एक योजना बनाकर लोगों को क्लेम दिया जाएगा।
सत्यापन और मुआवजे के वितरण की प्रणाली में पारदर्शिता लाना
मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा कि क्षतिपूर्ति पोर्टल अभी तक केवल किसानों के लिए ही बनाया गया था। पहले इस पोर्टल में केवल किसान ही किसी प्राकृतिक आपदा के कारण अपनी फसलों के नुकसान की जानकारी दर्ज करते थे। लेकिन अब सरकार ने इस क्षतिपूर्ति पोर्टल में कुछ नए ऑपरेशन्स भी शामिल किए हैं, जिससे आम जनता को होने वाले चल-अचल संपत्ति के नुकसान की जानकारी एक ही पोर्टल पर दर्ज की जा सकेगी। उन्होंने कहा कि इस पोर्टल का मकसद जनता द्वारा किए जाने वाले क्लेम प्रक्रिया को आसान बनाना है। प्रभावित लोगों को हुए नुकसान के समयबद्ध तरीके से सत्यापन और मुआवजे के वितरण की प्रणाली में पारदर्शिता लाना है। क्योंकि बहुत से प्रभावित लोगों द्वारा शिकायत करते हुए पाया गया कि फलाने का तो क्लेम हो गया है और मेरा रह गया है।
ई-क्षतिपूर्ति पोर्टल का उपयोग करने का अनुरोध कर रही है सरकार
मुख्यमंत्री मनोहरलाल ने कहा कि नेचुरल कैलेमिटी से प्रभावित लोग क्लेम के लिए इस पोर्टल का उपयोग करें। उन्होंने कहा कि इसके बाद इंश्योरेंस सर्वेयर और डीसी समितियों द्वारा नुकसान का मूल्यांकन कर उसे सत्यापित किया जाएगा। मुआवजे की गणना सत्यापन रिपोर्ट के आधार पर जल्दी से जल्दी कर निर्धारित मानदंडों के अनुसार लोगों को राहत पहुंचाई जाएगी।
निर्धारित मानदंडों के अनुसार लोगों को दिया जाएगा पैसा
उन्होंने कहा कि इस ऑनलाइन प्रक्रिया से समय कम हो जाएगा। मुआवजे के दावे की पूरी प्रक्रिया आसान हो जाएगी और पारदर्शिता बढ़ेगी। इस पोर्टल पर किसान बाढ़ और अतिवृष्टि के कारण खराब हुई अपनी फसल की जानकारी दर्ज कर सकते हैं। वहीं, बाढ़ में खोए हुए पशुओं की संख्या और नस्ल की जानकारी भी अब आम लोग इस पोर्टल पर भर पाएंगे। इसी प्रकार मकानों के क्षतिग्रस्त होने की स्थिति में मकान का प्रकार (कच्चा या पक्का) और उसकी क्षति के प्रकार की जानकारी दर्ज कर सकते हैं। उसके बाद नुकसान का आकलन राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के फील्ड स्टाफ द्वारा जल्द से जल्द करके उसे सत्यापित किया जाएगा। मुआवजे की गणना सत्यापन रिपोर्ट के आधार पर की जाएगी और उचित प्रक्रिया के बाद व निर्धारित मानदंडों के अनुसार पैसा दिया जाएगा।
चल सपंत्ति पर लोगों को इतना मिलेगा क्लेम
मुख्यमंत्री ने कहा कि चल संपत्ति के मामले में 5 लाख रुपए तक के नुकसान के दावे पर प्रभावित व्यक्ति को 80 प्रतिशत यानी 4 लाख रुपए तक की राशि का क्लेम दिया जाएगा। इसी प्रकार 5 से 10 लाख रुपए तक के नुकसान के लिए 70 प्रतिशत, 10 से 20 लाख रुपए तक के नुकसान पर 60 प्रतिशत, 20-50 लाख रुपए तक के नुकसान के लिए 40 प्रतिशत, 50 लाख से 1 करोड़ रुपए तक के नुकसान के लिए 30 प्रतिशत और 1 करोड़ से 1.5 करोड़ रुपये तक के नुकसान के दावे पर 20 प्रतिशत का क्लेम दिया जाएगा।
अचल संपत्ति पर मुआवजा राशि हो सकती है संशोधित
अचल संपत्ति के मामले में 1 लाख रुपए तक के नुकसान के दावे के लिए शत-प्रतिशत क्लेम दिया जाएगा। 2 लाख रुपए तक के नुकसान के लिए 75 प्रतिशत, 3 लाख रुपए तक के लिए 60 प्रतिशत, 4-5 लाख रुपए तक के लिए 50 प्रतिशत, 7 लाख रुपए तक के लिए 40 प्रतिशत और 25 लाख रुपए तक के नुकसान के लिए 30 प्रतिशत का मुआवजा निर्धारित किया गया है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र में राजस्व आपदा प्रबंधन निधि के प्रावधानों के अनुसार क्लेम की राशि निर्धारित है, हालांकि यह राशि कम है। सरकार इसे संशोधित करने का प्रस्ताव बना रही है।
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