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कृषि बीमा सब्सिडी : किसानों का जोखिम होगा कम, सरकार ने मंजूर किए 73.58 करोड़ रुपए

कृषि बीमा सब्सिडी : किसानों का जोखिम होगा कम, सरकार ने मंजूर किए 73.58 करोड़ रुपए
पोस्ट -29 जुलाई 2023 शेयर पोस्ट

किसानों के लिए बड़ी खबर : कृषि बीमा सब्सिडी के लिए स्वीकृत 73.58 करोड़ रुपए

कृषि बीमा सब्सिडी के लिए नेशनल क्रॉप इंश्योरेंस प्रोग्राम के अंतर्गत सरकार द्वारा वित्तीय वर्ष 2023-24 में कृषि सब्सिडी में प्राविधानित धनराशि  75370.00 लाख रुपये के सापेक्ष धनराशि 73.58 करोड़ रुपये की वित्तीय स्वीकृति प्रदान की गई है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत खरीफ 2023 में खरीफ फसलों का बीमा कराने का काम जारी है। किसान अपनी फसलों का बीमा 31 जुलाई तक करा सकते हैं।

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देशभर में मानसून सक्रिय है, जिसके चलते देश के अधिकतर इलाकों में हल्की, मध्यम और भारी बारिश देखने को मिल रही है। देश के कई राज्यों में तो मानसूनी बारिश ने लोगों पर जमकर कहर बरपाया हुआ है, तो दूसरी ओर कुछ ऐसे भी राज्य हैं, जहां मानसून के बादल होने के बावजूद भी पर्याप्त मात्रा में अच्छी बारिश नहीं हो रही है। जिसके चलते सूखा पड़ने के आसार है। इस बार उत्तर प्रदेश में बेहद कम बारिश हो रही है, जिसकी वजह से राज्य में सूखे का अनुमान लगाया जा रहा है। मानसून की अनिश्चिताओं के कारण राज्य के किसानों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कृषि क्षेत्र को प्रतिकूल मौसमी परिस्थितियों और आकस्मिक दशाओं में होने वाले संभावित नुकसान से किसानों को बचाने के लिए प्रदेश सरकार की ओर से कृषि बीमा में सब्सिडी के लिए वित्तीय स्वीकृति प्रदान की गई है। उत्तर प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने बताया कि नेशनल क्रॉप इंश्योरेंस प्रोग्राम के अंतर्गत सरकार द्वारा वित्तीय वर्ष 2023-24 में कृषि सब्सिडी में प्राविधानित धनराशि  75370.00 लाख रुपये के सापेक्ष धनराशि 73.58 करोड़ रुपये की वित्तीय स्वीकृति प्रदान की गयी है। 

किसानों का जोखिम कम करने के उद्देश्य से योजना का संचालन

कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने बताया कि भारत में कृषि मौसम की परिस्थितियों पर आधारित है। लेकिन जलवायु परिवर्तन की वजह से प्राकृतिक आपदा किसानों के लिए सबसे बड़ी परेशानी है। आपदा आने पर सबसे पहले किसान वर्ग प्रभावित होता है। आपदा से होने वाले फसलों में नुकसान की भरपाई किसान अपने श्रम से नहीं कर पाता है। प्राकृतिक आपदा से होने वाले नुकसान की भरपाई करने के उद्देश्य ये प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना लाई गई है। देश में  कृषि फसलों को प्राकृतिक आपदा से होने वाले नुकसान पर बीमा सुरक्षा देने एवं किसानों का जोखिम कम करने में यह योजना सुरक्षा कवच की तरह काम करती है। उन्होंने कहा कि पूर्व की सभी फसल बीमा योजनाओं की समीक्षा के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने यह योजना लागू की।

इन फसलों का करवाया जा सकता है बीमा

केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के अतंर्गत  खरीफ फसल सीजन 2023 में ज्वार, बाजरा, ग्वार, कपास, मक्का, अरहर, रागी, धान, हल्दी और अदरक बीमा का होता है। वहीं, रबी फसल के लिए गेहूं, मूंगफली, काला चना, हरा चना, सरसों, सूरजमुखी, गन्ना, आलू और प्याज समेत अन्य फसलों का बीमा होता है। इसके अलावा मौसम आधारित फसल बीमा में प्याज, हरी मिर्च, टमाटर फसल का बीमा किया जाता है। वहीं, उद्यान फसलों के लिए किसानों की ओर से बीमा करवाया जा सकता है। उत्तर प्रदेश एक कृषि प्रधान राज्य है। प्रदेश में बागवानी, औषधी, मसाला, सब्जी-फल, इमारती पेड़ों से लेकर हर तरह की देसी, विदेशी पारंपरिक अनाज फसलों की खेती होती है। इन फसलों को मौसम की अनिश्चितताओं एवं मौसम की प्रतिकूलता से बचाने के लिए सरकार की तरफ प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के जरिए बीमा करवाने की सहूलियत दी जाती है। ताकि फसल में होने वाला आर्थिक नुकसान अकेले किसान पर भारी ना पड़े। 

खरीफ फसलों का बीमा करने की अंतिम तिथि 31 जुलाई तक 

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत खरीफ 2023 में खरीफ फसलों का बीमा कराने का काम जारी है। किसान बोई गई अपनी फसलों का बीमा अंतिम तारीख 31 जुलाई तक कर सकते हैं। 31 जुलाई के बाद सरकार अगर फसल बीमा की तारीख बढ़ाती है तो किसानों को एक और मौका मिल सकता है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY)  केंद्र सरकार की ओर से संचालित की जाती है। इस महत्वाकांक्षी योजना को सभी राज्य सरकारें अपने-अपने राज्य में लागूकर किसानों को फसल बीमा की सहुलियत प्रदान करती है। इस योजना के तहत केंद्र और राज्य सरकार संयुक्त रूप से सब्सिडी पर फसलों का प्रीमियम जमा कराती है। इसमें किसान को फसल बीमा का 1.5 से 2 प्रतिशत पैसा देना होता है। बाकी पैसा केंद्र और राज्य सरकारें संयुक्त रूप से वहन करती है। इस योजना के तहत केंद्र और राज्य प्रीमियम का 50-50 प्रतिशत हिस्सा देती हैं। उत्तर पूर्व राज्यों में केंद्र प्रीमियम का 90 परसेंट पैसा देती है। 

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के लिए जरूरी कागजात 

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (Prime Minister Crop Insurance Scheme) के तहत फसल बीमा कराने के लिए आधार कार्ड, बैंक पासबुक की कॉपी, भूमि संबंधित दस्तावेज की कॉपी और बोई गई फसलों से संबंधित आदि कागजों की जरूरत किसान को पड़ेगी। पीएमएफबीवाई के अंतर्गत राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित की गई सभी फसलों का बीमा कराया जा सकता है। खरीफ फसलों में धान, ज्वार, मक्का, कपास, मूंगफली, सोयाबीन, आलू, प्याज, दालें इत्यादि का बीमा कराया जा सकता है। वहीं, मौसम आधारित अधिसूचित फसलों का बीमा भी योजना के तहत कराया जा सकता है। पीएम फसल बीमा योजना के प्रावधानों के अनुसार किसान ने जिस बैंक या बीमा कंपनी के जरिये फसल का बीमा कराया है, वह बैंक इंश्योरेंस प्रीमियम काटकर बीमा संबंधित कंपनी के खाते में भेज देता है। यह बीमा फसल के हिसाब से कराया जाता है। अगर कोई किसान अपनी बोई हुए फसल का बीमा कराने के बाद अपनी फसल बदलना चाहता है, तो उसे बैंक या बीमा कंपनी को लिखित में इसकी जानकारी देनी होती है। 

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