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सिंचाई के लिए मिलेगा भरपूर पानी, सरकार खर्च करेगी 32 हजार करोड़ रुपए

सिंचाई के लिए मिलेगा भरपूर पानी, सरकार खर्च करेगी 32 हजार करोड़ रुपए
पोस्ट -19 दिसम्बर 2023 शेयर पोस्ट

सिंचाई परियोजना : 32 हजार करोड़ रुपए की सिंचाई परियोजनाओं का कार्य शुरू करने के निर्देश

Irrigation Project : – देश के पांच राज्यों में हुए विधान सभा चुनाव के परिणाम घोषित किए जा चुके हैं। चुनाव नतीजों के बाद पांचों राज्यों में सरकार का गठन भी किया चुका है। राज्यों में निर्वाचित नई सरकारों द्वारा अगले 5 सालों के लिए जारी किए गए संकल्प पत्र के अनुसार लक्ष्य भी तय किए जाने लगे हैं। इस बीच मध्यप्रदेश में निर्वाचित भाजपा की सरकार ने घोषणा पत्र के अनुसार किसानों के लिए किए जाने वाले कार्यों को शुरू करने के निर्देश दे दिए है। मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार ने राज्य में खेत की समृद्धि के लिए सिंचित क्षेत्र को बढ़ाने का फैसला लिया है। इस फैसले के तहत खेती की समृद्धि के लिए 32 हजार करोड़ रुपए की सिंचाई परियोजनाओं को समय पर पूरा करने के लिए मुख्यमंत्री सिंचाई टास्क फोर्स बनाई जाएगी। आइए, जानते हैं कि सरकार द्वारा सिंचित क्षेत्र बढ़ाने के लिए क्या रोड-मेप तैयार किया जा रहा है और इससे किसानों को क्या लाभ होगा?

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खेती को आधुनिक और समृद्ध बनाने की गारंटी

सत्ता में आई भाजपा सरकार ने अपने मध्य प्रदेश संकल्प पत्र-2023 में सिंचाई सुविधाओं विस्तार करते हुए खेती को आधुनिक और समृद्ध बनाने की गारंटी दोहराई है। राज्य के नए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि संकल्प-पत्र प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की गारंटी है। इसके क्रियान्वयन के लिए उन्होंने सभी विभागों को 7 दिन में रोड-मेप बनाकर कार्य शुरू करने के निर्देश दिए हैं।

 

जल्द पूरा किया जाएगा इन सिंचाई परियोजनाओं का काम

नई सरकार आने वाले सालों में ग्वालियर और चंबल में माधवराव सिंधिया सिंचाई परियोजना, नरसिंहपुर, रायसेन एवं होशंगाबाद में चिंकी-बोरास बैराज परियोजना, नरसिंहपुर-छिंदवाड़ा में शक्कर-पेंच लिंक संयुक्त परियोजना, छिंदवाड़ा में पेंच डायवर्सन परियोजना, खंडवा में खंडवा उद्दहन माइक्रो सिंचाई परियोजना, पन्ना में रूंझ मध्यम सिंचाई परियोजना तथा मझगांव मध्यम सिंचाई परियोजना, पन्ना, रीवा, सतना, कटनी और जबलपुर में बरगी परियोजना, कटनी में बहोरीबंद माइक्रो सिंचाई परियोजना, हरदा में शहीद इलाप सिंह उद्रहन माइक्रो सिंचाई परियोजना, श्योपुर में चेंटीखेड़ा मुख्य सिंचाई परियोजना, सतना एवं रीवा में बहुती नहर परियोजना को जल्द पूरा किया जाएग। इन परियोजनाओं के पूरा होने से मध्यप्रदेश में कृषि का स्वरूप पूरी तरह से परिवर्तित हो जाएगा।  

 

65 लाख हेक्टेयर तक बढ़ाई जाएगी सिंचाई की क्षमता

प्रदेश के नए मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि कृषि के लिए निरंतर बिजली आपूर्ति की जाएगी। वर्ष 2003 में सिंचाई क्षमता 7.6 लाख हेक्टेयर से बढ़ाकर 2023 तक 47 लाख हेक्टेयर हो गई है। इसे बढ़ाकर 65 लाख हेक्टेयर तक पहुंचाया जाने का रोड-मेप तैयार किया जाएगा। चार लाख हेक्टेयर तक की उपजाऊ भूमि में सिंचाई व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए लिफ्ट सिंचाई परियोजनाओं को जल्दी पूरा किया जाएगा। प्रदेश के डार्क जोन सेक्टरों में बोरवेल, पुनरुद्धार के लिए एक्सपर्ट कमेटी का गठन किया जाएगा और इस क्षेत्र में पांच करोड़ रुपए का निवेश होगा। मुख्यमंत्री कृषक मित्र योजना के कनेक्शन दिए जाएंगे।

 

उज्जैन में बनाया जाएगा चना अनुसंधान संस्थान

मुख्यमंत्री ने कहा कि उज्जैन में चना अनुसंधान संस्थान और डिंडौरी में श्री अन्न अनुसंधान संस्थान स्थापित किया जाएगा। सोयाबीन फसल की सहकारी तेल मिल स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। श्रीअन्न की खेती को प्रोत्साहित करने के लिए प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि और मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना से श्री अन्न उत्पादकों को 1 हजार रुपए प्रति एकड़ प्रति फसल सम्मान राशि दी जाएगी। श्री अन्न की फसल बोने पर लघु और सीमांत किसानों के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में देय प्रीमियम में सब्सिडी दी जाएगी। राज्य में पीएम किसान सम्मान निधि और मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना के माध्यम से 80 लाख से अधिक किसानों को प्रत्येक वर्ष 12,000 रुपए की वित्तीय सहायता मिल रही है। पिछले साढे़ 3 वर्षों में किसानों के खातों में विभिन्न योजनाओं के माध्यम से 3 लाख करोड़ से अधिक के लाभ दिए गए हैं।

 

उत्पादन बढ़ाने के लिए शुरू होगा मिशन दाल

प्रदेश सरकार द्वारा आगामी 5 वर्षों में दाल का उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रदेश में मिशन दाल शुरू किया जाएगा। सरकार की ओर एमएसपी यानी न्यूनतम समर्थन मूल्य पर अरहर, मूंग, उड़द और  मसूर जैसी सभी दालों की खरीद की व्यवस्था को पहले से और ज्यादा मजबूत बनाया जाएगा। दाल-विशिष्ट किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) स्थापित करेंगे। इससे दाल की प्रोसेसिंग और वैल्यू चेन को बढ़ावा मिलेगा। इसके अलावा, बागवानी का क्षेत्रफल 20 लाख हेक्टेयर से बढ़ाकर 30 लाख हेक्टेयर किया जाएगा। मध्यप्रदेश फ्लोरीकल्चर मिशन बनाकर प्रदेश को फ्लोरीकल्चर में नंबर वन बनाया जाएगा। आगामी वर्षों में सरसों उत्पादन को प्रोत्साहित करते हुए देश के अग्रणी सरसों उत्पादक राज्यों में मध्यप्रदेश को शामिल किया जाएगा। इसके लिए सरसों उत्पादक जिलों के प्रत्येक ब्लॉक में सरसों खरीद केंद्र स्थापित किए जाएंगे। सरसों के लिए एफपीओ (किसान उत्पादक संगठन) स्थापित किया जाएगा और उन्हें सहकारी तेल मिल स्थापित करने के लिए प्रेरित किया जाएगा।

 

ग्राम पंचायत में स्थापित किया जाएगा पीएम किसान समृद्धि केंद्र

किसानों को बीज, फर्टिलाइजर, मशीनरी आदि सस्ते दाम में उपलब्ध कराने के लिए प्रत्येक ग्राम पंचायत में पीएम किसान समृद्धि केंद्र स्थापित किया जायेगा। इसके अतिरिक्त, 5 हजार नए कस्टम हायरिंग केंद्र स्थापित करके किसानों को कम कीमत में कृषि उपकरण उपलब्ध कराए जाएंगे।

 

शिक्षित युवाओं को पशुपालन के लिए 10 लाख रुपए का ऋण

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि आचार्य विद्यासागर गौ संवर्धन योजना के माध्यम से शिक्षित युवाओं को पशुपालन के प्रति प्रोत्साहित करने के लिए 10 लाख रुपए की धनराशि तक का ऋण दिया जाएगा। पशुओं की बीमारी के इलाज व पशुओं की मृत्यु होने पर किसानों को आर्थिक मदद दी जाएगी। पशुधन बीमा योजना के तहत सभी दुधारू और अन्य पशुओं के लिए मुफ्त बीमा एवं उनके रोगों के लिए मुफ्त टीकाकरण की व्यवस्था की जाएगी। किसानों की सुविधा हेतु पशु चिकित्सालय स्थापित किए जाएंगे।
 

बीमार एवं सड़क हादसों में घायल पशुओं के उपचार के लिए पशु एंबुलेंस की संख्या बढ़ाई जाएगी। आगामी 5 वर्षों में प्रदेश के प्रत्येक जिले में एक गौवंश विहार स्थापित किया जाएगा। पशु एवं पोल्ट्री चारा निर्माण इकाई स्थापित की जाएगी।  जिससे किसानों को उचित मूल्य पर चारा मिल सके। इसके लिए मध्यप्रदेश पोल्ट्री विकास मिशन शुरू किया जायेगा। भोपाल में एक्वा पार्क का निर्माण किया जाएगा। बालाघाट, मंडला, शहडोल, छतरपुर एवं इंदौर में मछली बीज हैचरी यूनिट्स की संख्या बढ़ाई जायेगी। रेशम उत्पादन एवं मधुमक्खी पालन को बढ़ावा देने के लिए सहायता दी जाएगी। किसानों को मधुमक्खी पालन एवं शहद मधुमक्खियों के डिब्बे और टूलकिट दिए जाएंगे।

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