गन्ने उत्पादन बढ़ाने के टिप्स जिससे चीनी रिकवरी बढ़ेगी,कटाई के दौरान बरते ये सावधानियां

गन्ने उत्पादन बढ़ाने के टिप्स जिससे चीनी रिकवरी बढ़ेगी,कटाई के दौरान बरते ये सावधानियां
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गन्ने की कटाई के दौरान न करें ये गलतियां, घट सकता है वजन और चीनी की रिकवरी


गन्ना खेती : इस समय गन्ना पेराई सीजन चल रहा है, जिसके चलते किसान इन दिनों गन्ने की कटाई कर चीनी मिलों को गन्ना सट्टे की आपूर्ति कर रहे हैं। वहीं सरकार द्वारा किसानों को अतिरिक्त गन्ना सट्टे की ऑनलाइन सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे चीनी मिलों को अधिक से अधिक गन्ने की आपूर्ति हो सके और निर्धारित चीनी रिकवरी लक्ष्य पूर्ण किया जा सके। ऐसे में गन्ना उत्पादक किसानों की जिम्मेदारी बनती है कि वे गन्ना पेराई के लिए मिलों को साफ और स्वच्छ अच्छी गुणवत्ता युक्त गन्ने की आपूर्ति करें। इसके लिए गन्ना अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिकों द्वारा कहा गया है कि किसान गन्ने की कटाई उचित समय पर सही विधि के साथ करें। अन्यथा किसानों को गन्ना उत्पादन में नुकसान भी उठाना पड़ सकता है। क्योंकि गन्ने की कटाई समय से पहले या देरी से करने पर गन्ने का वजन कम हो सकता है। इससे गुड़ की गुणवत्ता खराब हो सकती है और चीनी की रिकवरी भी घट सकती है। इसलिए गन्ना उत्पादकों को गन्ने की कटाई के समय कुछ सावधानियां बरतने की जरूरत है, जिससे किसान कम वजन के नुकसान से बच सके और चीनी की रिकवरी बढ़ सके।

कैसे पहचान करें कि फसल कटाई के लिए तैयार है या नहीं

अक्सर देखा जाता है कि समय से पहले गन्ना की कटाई या कटाई में देरी से गन्ने में रस मात्रा कम होने से गन्ने का वजन कम होने जैसी समस्या होती है। इससे किसानों को पैदावार और चीनी मिलों को चीनी की रिकवरी का नुकसान होता है। इसलिए गन्ने की कटाई समय से करने की सिफारिश विशेषज्ञ करते हैं। भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान के पूर्व मुख्य वैज्ञानिक डॉ. एसएन सिंह ने कहा है कि गन्ने की कटाई के लिए तैयार गन्ने फसल की पहचान यह है कि, जब गन्ने की पत्तियां पीली हो जाती हैं और पौधों का विकास रुक जाता है तथा तीर (फुल) निकलने लगते हैं, कलियां फूल जाती हैं और गन्ने की आंखें फूटने लगती हैं, बेंत से धात्विक आवाज निकलती है, तो समझ लेना चाहिए कि गन्ना कटाई के लिए पूर्ण रूप से तैयार है।

कटाई से पूर्व पकाव सर्वेक्षण के लिए रेफ्रेलेक्टोमीटर का उपयोग

पूर्व मुख्य वैज्ञानिक डॉ. एसएन सिंह का कहना है कि गन्ने का ब्रिक्स मूल्य 19.5-22.5 के मध्य होना चाहिए। ब्रिक्स वैल्यू 18 या उससे अधिक है, तो गन्ना के पूरी तरह से परिपक्व होने के संकेत है, इस दौरान गन्ने की कटाई की जा सकती है, ऐसे गन्ने से 10-11 प्रतिशत तक चीनी की रिकवरी हो सकती है। वहीं, अगर किसी गन्ने का ब्रिक्स मूल्य इससे कम होता है, तो गन्ना पूरी तरह से परिपक्व नहीं हुआ है। रेफ्रेलेक्टो मीटर से कटाई पूर्व पकाव सर्वेक्षण किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि उत्तर भारत में शरद ऋतु में बोए जाने वाले गन्ने की कटाई का उपयुक्त समय 15 महीने का है, जबकि, शुरुआती बसंतकाल में बोए जाने वाले गन्ने की कटाई 10 महीने, मध्य में बोए जाने वाले गन्ने की कटाई 10 से 12 महीने और देर से बोए जाने वाले गन्ने की कटाई, बुवाई के 12 महीने के पश्चात करना उपयुक्त है।

फसल की कटाई के समय बरतने वाली सावधानियां

वैज्ञानिक डॉ. एसएन सिंह ने बताया कि गन्ने की कटाई उस समय करें, जब गन्ने में सुक्रोज की मात्रा सबसे अधिक हो। गन्ना परिपक्व होने पर फसल की कटाई गन्ने की सतह से करनी चाहिए। गन्ने की मैन्युअल तरीके से कटाई करने के लिए तेज चाकू, कटिंग ब्लेड या हाथ की कुल्हाड़ियों का उपयोग करना चाहिए। गन्ने की कटाई कुशल श्रमिकों की मदद से करनी चाहिए। अन्यथा, गन्ने की अनुचित कटाई से गन्ने और चीनी की उपज प्रभावित होती है। रस की गुणवत्ता खराब हो जाती है और बाहरी पदार्थों के मिलने के कारण मिलिंग में समस्या आती है। इसके अलावा गन्ना की अगली पेड़ी की फसल में पैदावार कम होने का खतरा भी बढ़ जाता है।  गन्ने की कटाई के लिए यांत्रिक हार्वेस्टर का उपयोग किया जा सकता है, यह हार्वेस्टर गन्ने के पत्तेदार हिस्से को ऊपर से काटता है और गन्ने को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटता है। गन्ने के टुकड़ों को हार्वेस्टर बॉक्स में खींच लिया जाता है। इस यांत्रिक हार्वेस्टर की मदद से 8 घंटे में 2.5 से 4 हेक्टेयर में गन्ने की कटाई की जा सकती है।


कटाई के समय इन बातों का रखें ध्यान

  • गन्ने की कटाई जमीन सतह से गन्ने के ऊपरी भाग जहां तक गन्ना की गुल्लियां हैं वहां तक करनी चाहिए और अपरिपक्व इंटरनोड्स काटकर हटा देना चाहिए।
  • गन्ने की कटाई करके पूरी तरह से सूखी पत्तियों और गन्ने के नीचे लगी मिट्टी को साफ कर देना चाहिए। इससे मिलिंग के समय किसी भी तरह की परेशानी नहीं होती है।
  • कटे हुए गन्ने को ज्यादा देर तक खेतों में नहीं रखना चाहिए।
  • गन्ने की मात्रा में कमी और रस की गुणवत्ता में गिरावट न हो, इसके लिए गन्ने की फसल का छाया युक्त जगह पर भंडारण करना चाहिए।
  • कटे हुए गन्ने यदि किसी कारण से खेत में रखना पड़े तो गन्ने को पत्तों से ढ़ककर धूप से दूर रखें और पानी का हल्का छिड़काव करते रहें। इससे चीनी रिकवरी कम नहीं होगी।
     

किसान गन्ने की कटाई के दौरान इन बातों काे ध्यान में रखकर गन्ने की फसल की कटाई के समय होने वाले नुकसान और चीनी की रिकवरी कम होने से बचा सकता है।

गन्ने की अधिक उपज लेने के लिए ये करें

  • गन्ने की फसल से अधिक उपज प्राप्त करने के लिए किसानों को शीघ्र पकने वाली स्वीकृत किस्मों का ही उपयोग करना चाहिए।
  • गन्ने की बुवाई के लिए 8 माह की आयु का ही गन्ना बीज उपयोग करना चाहिए।
  • शरद कालीन गन्ने की बुवाई 15 अक्टूबर से 15 नवंबर तक कर देनी चाहिए।
  • गन्ने की बुवाई लाईन से लाईन 120 से 150 से.मी. दूरी पर करनी चाहिए ।
  •  बुवाई से पहले बीज या गन्ना के कल्ले का उपचार करना चाहिए।
  • पेडी प्रबन्धन हेतु गन्ने की कटाई जमीन की सतह से करें तथा फफूंदनाशक व कीटनाशक से उपचार करें। 
  • फसल में सन्तुलित उर्वरक का उपयोग करें।
  • गन्ने की खेती में लागत कम करने के लिए सहफसली  खेती अपनाएं एवं खरपतवार और कीट रोग नियंत्रण के लिए विशेषज्ञों की सलाह पर कीटनाशक का उपचार  करें।
  • उपरोक्त वैज्ञानिक तकनीकों का उपयोग कर गन्ना उत्पादन लगभग 1000 से 1500 क्विंटल  प्रति हेक्टेयर प्राप्त किया जा सकता है

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