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पूसा बासमती की ये नई प्रजाति देगी बेहतर उत्पादन, बिना रसायन छिड़काव के होगी खेती

पूसा बासमती की ये नई प्रजाति देगी बेहतर उत्पादन, बिना रसायन छिड़काव के होगी खेती
पोस्ट - October 17, 2022 शेयर पोस्ट

कम लागत के साथ-साथ रसायनों के अवशेष से मुक्त बासमती चावल की पैदावार

पिछले कुछ सालों से भारत देश के साथ-साथ दुनिया की खाद्यान आपूर्ति की जरूरतें भी पूरी कर रहा है। ऐसी स्थिति में देश के किसानों के ऊपर भी अच्छी क्वालिटी वाला अनाज उगाने की जिम्मेदारी बढ़ जाती है। ऐसी स्थिति को देखते हुए भारतीय कृषि अनुसंधान पूसा की ओर से बासमती धान की तीन नई किस्में विकसित की गई है। भारतीय कृषि अनुसंधान, पूसा नई दिल्ली ने बासमती की पुरानी किस्मों को सुधार कर विकसित किया है। ये नई किस्में बिना रसायन एवं कीटनाशक के ही अधिक पैदावार देने में सक्षम है। पूसा के वैज्ञानिकों का कहना है कि बासमती धान इन नई किस्मों की बुवाई के दौरान किसी भी तरह के रसायन, कीटनाश के छिड़काव करने की आवश्यकता नहीं होती है। जिससे लागत में कमी के साथ-साथ रसायनों के अवशेष से मुक्त बासमती चावल पैदा होगा। यह तीनों बासमती धान की नई किस्में ब्लास्ट या बदरा रोग, झुलसा रोग प्रतिरोधी है। इनमें धान में लगने वाल दोनों बीमारी नहीं आएंगी। जिससे चावल की गुणवत्ता अच्छी रहेगी। तो आइए ट्रैक्टरगुरु के इस लेख के माध्यम से बासमती धान की इन नई किस्मों के बारे में जानते है। 

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कम लागत में अधिक पैदावार देने में सक्षम

भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, पूसा नई दिल्ली ने बासमती धान की 1847, 1885 और 1886 तीन नई प्रजाति विकसित की है। यह तीनों मुख्यत पुरानी किस्में है। जिनमें पूसा ने सुधार कर विकसित किया है। यह तीनों किस्में बिना कीटनाशक के ही अधिक उत्पादन देने में सक्षम हैं। प्रधान कृषि वैज्ञानिक डॉ रितेश शर्मा ने बताया की पूसा ने 1509 में सुधार कर पूसा बासमती 1847 विकसित की है। इसके साथ ही 1121 सुधार कर पूसा बासमती 1885 किस्म और 1401 में सुधार कर पूसा बासमती 1886 को विकसित किया है। इनमें धान में होने वाली मुख्य दोनों बीमारी नहीं आएंगी। साथ ही इनकी खासियत ये है कि ये तीनों नई प्रजातियां सीधी बिजाई से धान की खेती द्वारा लागत को कम कर किसानों की आय बढ़ाने और पानी की बचत करने में मदद करने में सक्षम हैं। 

केंद्रीय नेताओं ने पूसा संस्थान की तारीफ की

बासमती धान की इस बार तीन नई प्रजाति तैयार की गई है। भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, पूसा नई दिल्ली से विकसित की गई हैं। केंद्रीय कृषि व किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर को यह किस्में पसंद आई है। जानकारी के लिए बता दें कि केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने राज्य मंत्री कैलाश चौधरी के साथ बीते दिनों पूसा के धान प्रक्षेत्र का दौरा किया। इस दौरान दोनों केंद्रीय नेताओं ने वहां पर की जा रही धान की सीधी बुवाई द्वारा उगाई जा रही खरपतवारनाशी दवाओं के प्रति प्रतिरोधी किस्मों का देखा। दोनों कृषि नेताओं ने मोटे चावल की एक एडवांस लाइन (पूसा 44 की सुधारी गई अधिक उपज वाली किस्म) का भी अवलोकन किया। इन कार्यों को देखते हुए दोनों केंद्रीय मत्रीं ने पूसा संस्थान की तारीफ भी की है।

भारत के बासमती चावल की दुनिया भर में धाक

भारत दुनिया में चीन के बाद चावल उत्पादन में दूसरे स्थान पर है। भारत चीन समेत दुनिया के 155 देशों में बासमती चावल का एक्सपोर्ट करता है। भारत के बासमती चावल की दुनिया भर में धाक हैं। भारत के 95 जिले ही इसका उत्पादन करते हैं। जिनमें पंजाब, हरियाणा व वेस्ट यूपी में ही पैदा किया जाता है। पूरे देश का 30 प्रतिशत बासमती यूपी में उगाया जाता है। अकेले वेस्ट यूपी में 10 लाख टन बासमती चावल उगाया जाता है। 

पेस्टीसाइड वाला बासमती की खेप रिजेक्ट

दरअसल भारत को बासमती चावल का गढ़ कहा जाता है। भारत में पैदा होने वाला बासमती चावल की धाक पूरी दुनिया भर में है। वेस्ट यूपी के मेरठ, सहारनपुर, आगरा, अलीगढ़, मुरादाबाद व बरेली जिले में पैदा होने वाले बासमती की गुणवत्ता सबसे अधिक है। यहां अधिक उपजाऊ मिट्टी व सिंचाई के अधिक साधन व दिल्ली के नजदीक होने के चलते गुणवत्ता पर भी अधिक ध्यान दिया जाता है। परंतु, बीते कुछ सालों में अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारतीय बासमती चावल के गुणवत्ता में आई गिरावट के कारण संघर्ष करता नजर आया है। बीते दो, तीन सालों में कीटनाशक की अधिकता के कारण यूरोप ने भारतीय बासमती चावल की खेप को लौटा दिया था। इन्ही वजह से अन्य देशों में भी भारतीय बासमती चावल के दामों में गिरावट दर्ज की गई थी।

एपीडा ने इसका समाधान खोजने की अपील की थी। जानकारी के लिए बता दें कि मेरठ के मोदीपुरम में बासमती निर्यात विकास प्रतिष्ठान ( एपीडा, उद्योग एवं वाणिज्य मंत्रालय, भारत सरकार) का केंद्र है। यहां से यूपी, पंजाब, हरियाणा समेत सात राज्यों के बासमती चावल का सप्लाई किया जाता है। इसी को मध्य नजर रखते हुए देश के कई राज्यों ने अपने क्षेत्र में बासमती धान की खेती में रसायन एवं कीटनाशकों के छिड़काव पर रोक लगाई हुई। हरियाणा व पंजाब में बासमती में पेस्टीसाइड का अधिक प्रयोग किया जाता है। लेकिन, वेस्ट यूपी में बिना कीटनाशक के भी चावल उगाया जाता है। पेस्टीसाइड वाला बासमती कि डिमांड रिजेक्ट कर दी जाती है।

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