एग्रीकल्चर ड्रोन : देश में अधिकांश परिवारों की आय का मुख्य एवं प्राथमिक जरिया कृषि है। आज लगभग 75 प्रतिशत परिवार कृषि से प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से अपनी आजीविका चला रहे हैं। देखा जाए, तो देश की अर्थव्यवस्था का अधिकांश भाग कृषि पर ही निर्भर है। ऐसे में देश के कृषि सेक्टर में आधुनिकीकरण का विस्तार कृषि वैज्ञानिकों द्वारा किया जा रहा है। खेती-किसानी में आधुनिकीकरण को बढ़ावा देने के लिए नई- नई तकनीकों को इजाद किया जा रहा है। खेती से बढ़िया पैदावार लेने एवं खेती को पहले से और अधिक सरल और सुविधाजनक बनाने के लिए नए-नए उन्नत किस्मों के अच्छे बीजों की खोज एवं नई-नई तकनीकों पर आधारित कृषि उपकरणों की खोज एवं इस्तेमाल किया जा रहा है। ऐसे में आधुनिक तकनीक पर आधारित नवीनतम खोज कृषि ड्रोन के उपयोग ने कृषि को पहले से अधिक आसान बना दिया है। कृषि ड्रोन खेती से जुड़े कामों में किसान की मेहनत, समय और पैसों की बचत करता है। किसान एग्रीकल्चर ड्रोन के जरिये बड़े-बड़े खेतों में फर्टिलाइजर/लिक्विड फर्टिलाइजर के छिड़काव से लेकर फसलों की निगरानी कम समय में कर सकता है। कृषि ड्रोन के प्रयोग खेती में न सिर्फ किसानों की लागत कम होती है, बल्कि फसलों में नुकसान भी कम होता है, जिसके कारण पैदावार पहले से ज्यादा बढ़ती है। खास बता यह है कि खेती में कृषि ड्रोन तकनीक के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए सरकार किसानों को आर्थिक मदद भी उपलब्ध करा रही है। खेती में कृषि ड्रोन के प्रयोग के लिए किसानों को ट्रेनिंग सेंटर्स में ड्रोन उड़ाने की ट्रेनिंग भी देती है। आईय, ट्रैक्टरगुरु के इस लेख के माध्यम से कृषि ड्रोन की कीमत, विशेषता, उपयोग, सरकारी मदद एवं मार्केट उपलब्ध कृषि ड्रोन के बारे में जानते हैं।
कृषि क्षेत्र में एग्रीकल्चर ड्रोन को बढ़ावा देने के लिए किसानों को सरकार द्वारा लगातार प्रोत्साहित किया जा रहा है। केंद्र सरकार कृषि ड्रोन खरीदने पर किसानों को 40 से 100 प्रतिशत तक की भारी ड्रोन सब्सिडी प्रदान कर रही है। इसके अलावा, सरकार किसानों को कृषि विश्व विद्यालय, कृषि विज्ञान केंद्र एवं कई प्रमाणित ट्रेनिंग सेंटर्स के जरिये ड्रोन उड़ाने की ट्रेनिंग भी दे रही है। ताकि किसान ट्रेनिंग लेकर ड्रोन पायलट बनकर बिना किसी जोखिम के सरलता से ड्रोन के प्रयोग से खेती कर बेहतर पैदावार प्राप्त कर पाएं। सरकार द्वारा कृषि ड्रोन पर कृषि मशीनरी प्रशिक्षण और परीक्षण संस्थानों, कृषि विज्ञान केंद्रों, आईसीएआर संस्थानों और राज्य कृषि विश्वविद्यालयों को ड्रोन की खरीद पर 100 प्रतिशत अधिकतम 10 लाख तक की सब्सिडी दे रही है। इसके अलावा, कृषि विज्ञान में डिग्री रखने वाले युवाओं, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, लघु एवं सीमांत, महिलाओं एवं पूर्वोत्तर राज्यों के किसानों को 50 प्रतिशत अधिकतम 5 लाख रुपए की सब्सिडी ड्रोन पर प्रदान कर रही है। वहीं, अन्य किसान, किसान समूहों को ड्रोन पर 40 प्रतिशत या अधिकतम 4 लाख रुपए की सब्सिडी दे रही है। साथ ही एफपीओ को ड्रोन लागत का 75 प्रतिशत तक सब्सिडी दे रही है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि खेती से जुड़ा कृषि ड्रोन काफी पुराना कृषि उपकरण है, लेकिन भारत में इसका इस्तेमाल पिछले कुछ सालों से बढ़ा है। खेती में इसके प्रयोग ने एक नई क्रांति ला दी है। आज देश के अधिकतर क्षेत्रों में किसान खेती में पहले की तुलना में अधिक कृषि ड्रोन का प्रयोग खाद का छिड़काव, फसलों की देख-रेख और फसलों से संबंधित पोषक-तत्व एवं दवाओं के छिड़काव के लिए कर रहे हैं। ड्रोन के प्रयोग से बड़े से बड़े खेत में इन सभी कामों को कम मेहनत और समय में सरलता से कर पैसों की बचत कर रहे हैं। आज ड्रोन से खेतों में खड़ी फसलों में कीटनाशक सहित अन्य खाद का छिड़काव पर लगने वाली लागत में कमी हुई है, जिससे किसानों आय में वृद्धि हुई है और पैदावार भी बढ़ी है।
बड़े-बड़े खेतों में फसलों पर खाद सहित अन्य कीटनाशकों के स्प्रे करने में किसानों को लंबा समय लग जाता है, जिससे खेती में इनपुट कॉस्ट बढ़ जाती है। खड़ी फसलों की देख-रेख के लिए किसानों को खेतों के अंदर जाना पड़ता है, जिससे किसान स्वास्थ्य संबंधित कई घातक बीमारियों का शिकार हो जाते हैं। यहां तक फसलों पर समय से खाद एवं संबंधित कीटनाशकों दवाओं का छिड़काव न होने पर फसलें बीमारी से प्रभावित होकर नष्ट तक हो जाती है। लेकिन अब कृषि ड्रोन के प्रयोग से किसान बड़े-बड़े खेतों में इन सभी कामों को पैसा और समय दोनों की बचत के साथ सरलता और सुविधाजनक तरीके से कर पा रहे हैं। ड्रोन को एक निश्चित ऊंचाई पर उड़ाकर खेत में खड़ी फसलों की निगरानी कर फसल की स्थिति जान सकते हैं।
ड्रोन मार्केट के जानकारों के मुताबिक, भारत में कृषि ड्रोन का प्रयोग खेती में किसानों द्वारा खूब किया जा रहा है। पिछले कुछ सालों में किसानों की डिपेंडेंसी ड्रोन पर बनी है। खेती में तेजी से ड्रोन की बढ़ती उपयोगिता को देखते हुए आज भारत के मार्केट में बहुत से प्रमुख कृषि ड्रोन उपलब्ध हैं, जो काम की सहूलियत के अनुसार काफी किफायती कीमत रेंज में किसानों को मिल जाते हैं।
मोड 2 कार्बन फाइबर कृषि ड्रोन- इस कृषि ड्रोन के मॉडल का नाम केसीआई हेक्साकॉप्टर है। इसमें एनालॉग कैमरे की तकनीक है, इस कृषि ड्रोन की कीमत 3.6 लाख रूपए है। यह एक बार में 10 लीटर तक खाद एवं कीटनाशक का भार लेकर उड़ सकता है।
एस 550 स्पीकर ड्रोन इसकी ड्रोन (S 550 Speaker Drone) : इस कृषि ड्रोन की वजन उठाने की क्षमता 10 लीटर तक है। यह लगभग 10 मिनट के अंदर एक एकड़ भूमि पर खाद और कीटनाशकों का छिड़काव कर सकता है। यह ड्रोन वाटर प्रूफ होता है, जिसकी वहज से इसका इस्तेमाल बारिश के मौसम में भी किया जा सकता है। इसमें GPS और अलर्ट सेंसर सुविधा है। मार्केट में इस कृषि ड्रोन की कीमत 4.5 से 5 लाख के बीच है।
केटी-डॉन ड्रोन ( KT&Dawn Drone) - इस कृषि ड्रोन की वजन उठाने क्षमता 10 से लेकर 100 लीटर तक है। इसमें क्लाउड इंटेलिजेंट मैनेजमेंट है। इस कृषि ड्रोन को मैप प्लानिंग फंक्शन और हैंडहेल्ड स्टेशन के साथ डिजाइन किया गया है। बाजार में इस कृषि ड्रोन की कीमत लगभग 3 लाख रुपए से स्टार्ट होती है।
आईजी ड्रोन एग्री (IG Drone Agri) - इस कृषि ड्रोन की मार्केट में कीमत लगभग 4 लाख रुपए है। यह ड्रोन काफी तेज गति से उड़ता है। इस ड्रोन की मदद से लगभग 5 से 20 लीटर भार तक का कीटनाशक छिड़काव एक साथ कर सकते हैं।
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