मानसून की अनिश्चिताओं की वजह से किसानों को धान और सब्जी फसलों की खेती में काफी नुकसान हो रहा है। ऐसे में किसान भाई अपने खेत में मोटे अनाज फसल में मक्का की खेती से अपने नुकसान की भरपाई कर सकते हैं। मक्का की फसल सूखा सहन कर सकती है। इसकी खेती के लिए खास सिंचाई की आवश्यकता नहीं पड़ती है।
बंपर पैदावार देने वाली पूसा एचएम-4 इम्प्रूवड मक्का किस्म, जानें क्या इसकी खासियत और पैदावार क्षमता?
Maize Variety : देशभर के कई इलाकों में भारी बारिश एवं बाढ़ की वजह से हजारों किसानों की धान एवं अन्य खरीफ फसल लगभग चौपट हो चुकी है, तो दूसरी ओर कई इलाकों में मानसून होने के बावजूद भी सामान्य से कम बारिश हो रही है, जिसकी वजह से फसलों की सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिल रहा है। जिसके कारण भी किसानों को धान और सब्जी की फसलों में भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। किसानों को राहत पहुंचाने के लिए कई राज्यों की सरकारें अपने स्तर पर कई कदम भी उठा रही है। किसानों को धान की दोबारा रोपाई के लिए मुफ्त पौधे भी दिए जा रहे हैं, तो कुछ राज्यों में किसानों को वैकल्पिक फसलों की खेती लगाने के लिए दलहन, तिलहन और मोटे अनाज वाली फसल के बीज मुफ्त उपलब्ध करवाए जा रहे हैं।
ऐसे में किसान विश्व की प्रमुख खाद्यान्न फसल मक्का की खेती से अपने नुकसान की भरपाई कर सकते हैं। खाद्यान्न फसलों की रानी कही जाने वाली मक्का की फसल तीन महीने से भी कम समय में तैयार हो जाती है। बहुउपयोगी इस मोटे अनाज की मांग दुनियाभर में बड़े स्तर पर है। मक्का दोहरा लाभ देने वाली व्यावसायिक नकदी फसल है। भारत ही नहीं बल्कि विश्वभर में गेहूं और धान जैसी अनाज फसलों के बाद तीसरे नंबर पर मक्का की खेती प्रमुख रूप से की जाती है। ऐसे में हम आज मक्का की खेती करने वाले हमारे किसान भाईयों के लिए मक्का फसल की एक ऐसी किस्म की जानकारी लेकर आए हैं। जिसकी खेती कर किसान मात्र 87 दिन में खेती से बंपर उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं। आईए, मक्का की उन्नत और अच्छी पैदावार देने वाली किस्म के बारे में जानें।
मक्का किस्म, पूसा एचएम-4 डम्प्रूवड
मक्का की खेती से बंपर उत्पादन के लिए जरूरी है कि मक्का की बुवाई सही समय से और खेती में आधुनिक उन्नत तकनीकों का इस्तेमाल किसान भाई करें। खेती से अच्छी गुणवत्ता युक्त बंपर पैदावार के लिए अच्छी किस्म का चयन भी बहुत जरूरी हो जाता है। मक्का की खेती करने वाले किसान आईसीएआर-आईआईएमआर संस्थानों के कृषि वैज्ञानिकों द्वारा विकसित की गई “पूसा एचएम-4 इम्प्रूवड” मक्का किस्म की खेती कर सकते हैं। मक्का की यह किस्म सिर्फ 87 दिन यानी तीन महीने से कम समय में तैयार हो जाएगी। इसकी औसतन पैदावार 64 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है, लेकिन इसकी खेती नई और उन्नत तकनीक के जरिए की जाए, तो इसकी खेती से किसान 85 से 90 क्विंटल प्रति हेक्टेयर की अधिकतम पैदावार ले सकते हैं।
इस वैराइटी की खास बातें
भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (पूसा) के वैज्ञानिकों द्वारा विकसित मक्का की इस किस्म की खास बात यह है कि इसमें मक्का फसल की अन्य उन्नत प्रजातियों के मुकाबले लाइसिन और ट्रिप्टोफैन अधिक है। मक्का की सामान्य किस्म में 1.5 से 2 प्रतिशत तक लाइसिन एवं 0.3 से 0.5 प्रतिशत तक ट्रिप्टोफैन होता है, जबकि “पूसा एचएम-4 इम्प्रूवड” किस्म में लाइसिन 3.62 फीसदी और 0.91 परसेंट तक ट्रिप्टोफैन की मात्रा पाई जाती है। ट्रिप्टोफैन और लाइसिन आवश्यक अमीनो एसिड है, जो मानव शरीर में प्रोटीन निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं। बता दें कि स्वस्थ इम्यून सिस्टम के लिए नौ जरूरी अमीनो एसिड में से लाइसिन भी एक है। मक्का का इस्तेमाल मानव आहार के अलावा, कूक्कूट आहार, पशुआहार के रूप में होता है। मक्का पौष्टिक गुणों और पोषक तत्वों से भरपूर मोटे अनाज वाली फसल है। इसका इस्तेमाल विभिन्न प्रकार के व्यावसायिक खाद्यान्न प्रोडक्ट्स बनाने में किया जाता है। इस लिहाज से व्यावसायिक दृष्टि से मक्का की खेती करने वाले किसानों को पूसा की यह वैराइटी बंपर उत्पादन का साथ काफी मोटा मुनाफा भी दे सकती है।
खरीफ के मौसम में हाेती है मक्का की 75 प्रतिशत खेती
अधिक उत्पादन और विभिन्न उपयोग की वजह से मक्का को खाद्यान्न फसलों की रानी भी कहा जाता है। कृषि वैज्ञानिकों द्वारा इसके उत्पादन को बढ़ाने की तकनीक में काफी हद तक सुधार किया गया है, जिसकी वजह से आज मक्का का उत्पादन बढ़ा है। भारत में मक्का की 75 प्रतिशत खेती खरीफ के मौसम में किसानों द्वारा की जाती है। पूसा के कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि भारत में मक्का की खेती करीब 8.50 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्र में होती है, जिससे 23 मिलियन टन उत्पादन प्रति वर्ष होता है। लेकिन विश्व के कुल मक्का उत्पाद में भारत की हिस्सेदारी मात्र 3 प्रतिशत है, जबकि विश्व में मक्का उत्पादन के मामले में अमेरिका, ब्राजील, मैक्सिको और चीन के बाद भारत सबसे बड़े मक्का उत्पादक देश है। भारत में बिहार, मध्यप्रदेश, हरियाणा, मध्यप्रदेश, आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश और कर्नाटक जैसे कृषि प्रधान राज्यों में गेहूं और धान जैसे खाद्यान्न फसलों के बाद मक्का की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है।
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