ज्यादातर किसान खेती में अब डीएपी का इस्तेमाल कर रहे हैं, इसका पूरा नाम डाई अमोनियम फास्फेट (DAP) है। डीएपी खाद किसानों के लिए लोकप्रिय खाद बन गया है। इसे डाई के नाम से भी जाना जाता है। अब इसमें कोई संदेह नहीं है कि हर चीज के सकारात्मक और नकारात्मक दोनों प्रभाव होते हैं। इसी तरह डीएपी खाद के भी कुछ फायदे तो कुछ नुकसान हैं। इसी सिलसिले में आज हम डीएपी खाद के इस्तेमाल के कुछ फायदे और नुकसान बताने जा रहे हैं।
डीएपी (DAP) का इस्तेमाल रबी की फसल में गेहूं की बुआई के लिए किया जाता है। इसमें उपस्थित फास्फोरस एवं नाइट्रोजन तत्व बीजों के अंकुरण एवं पौधों की वृद्धि एवं पुष्पन के लिए टॉनिक का कार्य करते हैं। यदि किसान बुवाई के समय डीएपी (DI Ammonium Phosphate) नहीं देता है तो नाइट्रोजन की कमी का एक घटक यूरिया से पूरा हो जाता है, लेकिन फास्फोरस की कमी फसल के लिए घातक होती है। यदि यह पौधों को उपलब्ध नहीं होता है, तो फलने और फूलने की प्रक्रिया धीमी हो जाती है, जिससे पैदावार बहुत कम हो जाता है। पोटाश भी पौधों के विकास में एक महत्वपूर्ण तत्व है, जिससे जड़ का विकास होता है। यूरिया पौधों को पौष्टिक बनाने का काम करता है। क्लोरोफिल की कमी से पौधा पीला पड़ जाता है। अतः पौधे को कम भोजन मिलता है। नतीजतन आय नगण्य है। इन्हीं कमियों को पूरा करने के लिए फसलों में डीएपी दी जाती है।
सबसे ज्यादा मिलावट महंगी खाद यानी डायमोनियम फास्फेट में पाई जाती है। कभी-कभी इसे देखकर पहचान करना आसान नहीं होता है, लेकिन अगर किसान थोड़ी सी सावधानी बरतें तो नुकसान से बचा जा सकता है। इसलिए आज हम बताने जा रहे हैं कि कैसे किसान खाद की गुणवत्ता की पहचान कर सकता है। असली डीएपी की पहचान इन दो तरीकों से किया जा सकता है -
पहला : डीएपी असली है या नकली इसकी पहचान करने के लिए किसान डीएपी के कुछ बीज हाथ में लेते हैं और इसे तंबाकू की तरह चूने के साथ मिलाने से तेज गंध निकलती है जिसे सूंघना मुश्किल होता है तो समझ लीजिए कि यह डीएपी है।
दूसरा : किसान भाइयों के पास असली डीएपी की पहचान करने का एक और आसान तरीका है। अगर कुछ डीएपी के दानों को धीमी आंच पर कड़ाही में गर्म किया जाए और ये दाने फूल जाएं, तो समझिए किसान भाइयों, यही असली डीएपी है, डीएपी की असली पहचान है। इसके सख्त बीज भूरे, काले और बादामी रंग के होते हैं और नाखून से आसानी से नहीं टूटते।
डाई अमोनियम फास्फेट (डीएपी) खाद किसानों की पहली पसंद है। डीएपी रासायनिक खाद का एक क्षारीय रूप है, जिसमें 46% फास्फोरस और 18% नाइट्रोजन होता है। डीएपी को खेत में लगाने से फसलों को सभी पोषक तत्व मिलते हैं और नाइट्रोजन-फास्फोरस की कमी पूरी होती है। डीएपी पानी में घुलनशील होते हैं, जो फसलों को पानी देते ही मिट्टी में घुल जाते हैं।
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