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हल्दी की टॉप 5 किस्मों से करें बंपर पैदावार, सालाना होगी 9 लाख रुपए की कमाई

हल्दी की टॉप 5 किस्मों से करें बंपर पैदावार, सालाना होगी 9 लाख रुपए की कमाई
पोस्ट -10 जून 2023 शेयर पोस्ट

हल्दी की खेती : मसाले की खेती से बढ़ रही है किसानों की आय, जानें कैसे करें उत्पादन

मसालों की खेती में हल्दी का एक महत्वपूर्ण स्थान है। हल्दी अपने विशेष एंटीबायोटिक गुणों के कारण हर घर में उपयोग में लाई जाती है। हल्दी में रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित करने का भी गुण है। हल्दी के धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व भी हैं। यही वजह है कि हल्दी की भारतीय बाजारों में व्यापक मांग है। हल्दी को खेतों में दूसरी फसलों के साथ भी बोया जाता है। इस फसल की खासियत यह है कि इसे खेत के छायादार भाग में भी उगाया जा सकता है। भारत में, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, उड़ीसा, कर्नाटक, पश्चिम बंगाल, गुजरात और केरल आदि राज्यों में हल्दी की खेती बड़े स्तर पर की जाती है। हालांकि इस फसल की खेती करने वाले किसानों को ध्यान रखना होता है कि वे हल्दी की अच्छी किस्म के साथ ही खेती करें। अच्छे बीज या अच्छी किस्म किसी भी फसल की आधारभूत जरूरत है, अगर किस्म अच्छी नहीं होगी तो अच्छा फसल उत्पादन मुश्किल होगा। 

New Holland Tractor

ट्रैक्टर गुरु के इस पोस्ट में हम हल्दी के टॉप 5 किस्मों के बारे में, पैदावार, कमाई और हल्दी की खेती करने के तरीके के बारे में जानकारी दे रहे हैं।

किन किसानों के लिए अच्छी है हल्दी की खेती

हल्दी की मांग भारत में सालभर बनी रहती है, क्योंकि ये एक ऐसा उत्पाद है जो दैनिक जीवन में उपयोग में लाया जाता है। इस वजह से इसे बड़े स्तर पर मसालों की खेती के लिए उपयोग में लाया जाता है। 

हल्दी की टॉप 5 उन्नत किस्म किसानो की आय में होगी सालाना वृद्धि

प्रतिभा

हल्दी की 'प्रतिभा' किस्म अब तक की सबसे उन्नत किस्मों में से एक है। हल्दी की इस किस्म ने विदेशों में भी अपनी पहचान बनाई है। यह किस्म सब्जियों में अच्छा रंग देती है, साथ ही उत्पादन के मामले में भी बेहतरीन है। हल्दी की खेती में जो इस किस्म की खासियत है, वह शायद ही किसी दूसरी किस्मों में मिलती है। कई बार हल्दी सड़न रोग से प्रभावित हो जाती है। लेकिन यह किस्म सड़न रोग प्रतिरोधक क्षमता से लैस है। केरल स्थित भारतीय मसाला अनुसंधान संस्थान, कोझिकोड में इसे विकसित किया गया। इस किस्म की पैदावार 210 से 250 क्विंटल प्रति एकड़ है। 

आर एच 5

इसमें हल्दी का पौधा 80 से 100 सेंटीमीटर ऊंचा होता है। इस किस्म को तैयार होने में करीब 210 से 220 दिन का समय लगता है। इस किस्म की पैदावार भी 200 से 220 क्विंटल प्रति एकड़ होती है।

पालम पीताम्बर

हल्दी की अधिक पैदावार देने वाली किस्मों में से एक पालम पीताम्बर भी है। यह इसलिए खास है, क्योंकि इसका रंग बहुत गहरा होता है। कम हल्दी भी अच्छा रंग देती है। पैदावार 132 क्विंटल प्रति एकड़ होती है।

राजेंद्र सोनिया

60 से 80 सेंटीमीटर ऊंचाई वाली इस हल्दी की पौध को तैयार होने में 195 से 210 दिन तक का समय लग जाता है। इस किस्म से किसान हल्दी का 160 से 180 क्विंटल प्रति एकड़ उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं। 

सुगंधम

210 दिनों में तैयार होने वाली हल्दी की यह किस्म 80 से 90 क्विंटल प्रति एकड़ हल्दी का उत्पादन देती है।

पैदावार

हल्दी की खेती में पैदावार के कई फैक्टर हैं। अच्छी पैदावार के लिए अच्छी मिट्टी, अच्छी कौशल और अच्छी जलवायु जैसी चीजें मायने रखती है। सामान्यतः यदि किसान प्रतिभा या आर एस 5 जैसी किस्म से खेती करते हैं तो 150 से 180 क्विंटल तक आसानी से उपज प्राप्त कर लेते हैं।

कमाई

हल्दी की खेती से होने वाली कमाई बहुत सारी चीजों पर निर्भर करती है। जैसे मिट्टी की उत्पादकता, कृषि कौशल और बाजार रेट आदि। सामान्यतः 6 हजार रुपए क्विंटल कच्ची हल्दी का रेट होता है। हल्दी पैदा होने में भी 9 से 12 महीने लगते हैं। ऐसे में अगर 150 क्विंटल की पैदावार होती तो किसान 9 लाख रुपए की आमदनी प्राप्त कर सकते हैं। लागत और श्रम के रूप में यदि 4 लाख रुपए कम भी कर दिए जाएं तो शुद्ध मुनाफा 5 लाख रुपए सालाना तक हो सकता है। 

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