Safe Farming Techniques : छोटे और सीमांत किसानों की आय बढ़ाने के लिए केंद्र व राज्य सरकारों द्वारा कई प्रयास किए जा रहे तथा खेती से किसानों को कम लागत पर बंपर उत्पादन के साथ ज्यादा मुनाफा मिल सके। इसके लिए कृषि के क्षेत्र में लगातार आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिसके कारण आज कृषि के क्षेत्र में लगातार बदलाव देखने को मिल रहे हैं। आधुनिकता के इस दौर में कृषि से बेहतर उत्पादन और अधिक कमाई के लिए किसान तकनीकी पद्धति अलग-अलग सब्जी, फलों, मसाले एवं फूलों की खेती कर रहे हैं। नई तकनीक के इस्तेमाल से अब नए और पढ़े लिखे युवा इसे व्यवसाय के तौर पर अपना रहे हैं और कृषि में नई-नई फसलों का उत्पादन कर सफलता हासिल कर रहे हैं। नई-नई तकनीक की मदद से विभिन्न सब्जी और फूलों की खेती के प्रति किसानों को प्रेरित करने के लिए कई राज्य सरकारों द्वारा किसानों को पॉलीहाउस संरचना में खेती करने के लिए अलग-अलग अनुदान प्रतिशत भी दिया जा रहा हैं तथा इंटीग्रेटेड फार्मिंग के लिए किसानों को प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है, जिससे किसान खेती से कम लागत पर ज्यादा मुनाफा कमा सकते हैं। आइए जानते है कि पॉलीहाउस खेती (Polyhouse Farming) के क्या फायदे है और इससे किसानों को कैसे लाभ होता और इसे तैयार करने में कितनी लागत आती है तथा इंटीग्रेटेड फार्मिंग प्रणाली क्या हैं?
कृषि प्रशिक्षण केंद्र, मुरादाबाद (उत्तर प्रदेश) के अनुसार, आधुनिकता के इस दौर में कृषि करने के तरीकों में लगातार बदलाव देखने को मिल रहे हैं। आज किसान नई-नई तकनीक की मदद से उत्पादन बढ़ाने लगे है। नई तकनीकों ने किसानों के लिए समृद्धि का द्वार खोलने का काम किया है। इंटीग्रेटेड फार्मिंग सिस्टम (एकीकृत कृषि प्रणाली) एक ऐसा कृषि प्रणाली है, जिससे किसान कम जोखिम के साथ अच्छा पैसा कमा सकता है। यह कृषि का एक ऐसा रोल मॉडल है, जिसमें एक खेत में तरह-तरह की खेती संबंधित गतिविधियां की जाती हैं। एक ही खेत में फसलें उगाना, पोल्ट्री करना और मछली पालन करना एकीकृत कृषि प्रणाली (Integrated Farming System) का हिस्सा है। वहीं, पॉलीहाउस (Polyhouse), नेट हाउस, ग्रीन हाउस (Green House), संरचना संरक्षित खेती की वह तकनीक बन गई है, जो किसानों को विभिन्न फल, फूल और सब्जियों की खेती करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। आज किसान इंटीग्रेटेड फार्मिंग से एक ही खेत से सालभर तक कमाई कर रहे है, तो वहीं दूसरी ओर किसान पॉलीहाउस खेती में बैमौसमी सब्जियों की खेती कर उनके उत्पादन से मुनाफा कमा रहा है।
पॉलीहाउस खेती एक ऐसी कृषि तकनीक (Farming Technique) है जिसमें मौसम परिवर्तन के कारण बेमौसम बारिश, ओलावृष्टि, आधी तूफान, कड़ाके की धूप तथा शरीर को झुलसा देने वाली लू के गर्म थपेड़ों से भी फसलों को कोई नुकसान नहीं होता होता है। पॉलीहाउस, प्लास्टिक लो-टनल, प्लास्टिक हाई-टनल, प्लास्टिक मल्चिंग सरचाना में पर्याप्त वेंटिलेशन और फॉगर सिस्टम से इन संरचनाओं का तापमान नियंत्रित किया जाता है। राष्ट्रीय बागवानी मिशन/राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के अंतर्गत कई राज्य सरकारें अलग-अलग योजनाएं लागू कर अलग-अलग किसान वर्ग के लिए अलग-अलग सब्सिडी प्रतिशत का लाभ प्रदान करती है। पॉलीहाउस खेती ग्रीनहाउस खेती के कॉन्सेप्ट पर ही आधारित है। इसमें पॉलीथीन का प्रयोग होता है। यह लागत में काफी सस्ती और ग्रीनहाउस खेती के समान ही है। इस खेती से किसानों को जमीन के एक ही भाग पर कई प्रकार की फसलों की खेती करने और उन्हें आसानी से बनाए रखने में मदद मिलती है।
मुरादाबाद कृषि प्रशिक्षण केंद्र के मुताबिक, एकीकृत कृषि प्रणाली में किसान एक ही खेत में अलग-अलग सब्जी और अन्य फसलों की खेती के साथ, शेष खाली बचे खेत में पशुपालन, तालाब बनाकर मछली पालन (Fish Farming) और मुर्गी पालन जैसे काम करने की सहूलियत मिल जाती है। यह कृषि प्रणाली छोटे और सीमांत किसानों के लिए बहुत फायदेमंद है, इससे वे अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं। छोटे किसान इंटीग्रेटेड फार्मिंग सिस्टम (integrated farming system) में दो दुधारू पशु रख लें, बकरी पालन कर लें, 50 से 100 मुर्गियां रख लें। इसके अलावा खेत के चारों तरफ शागोन, मोगनी, यूकेलिप्टस, पॉपुलर के पौधे लगा सकते हैं, जिससे किसान को 5 -10 साल में अच्छी आमदनी हो जाएगी। इसके अलावा किसान पॉलीहाउस खेती में सब्जियों की खेती भी कर सकते हैं तथा फल उगा कर भी मुनाफा कमा सकते हैं। छोटे किसान भाई इस खेती की ओर जाएंगे तो निश्चित तौर पर उनकी आमदनी बढ़ेगी और वह खेती से अच्छा मुनाफा कमा सकेंगे।
हवादार पॉलीहाउस बनने के लिए प्रति वर्गमीटर 1 हजार से 1200 रुपए लागत खर्च करनी होती है। इस संरचना में सिंचाई, लिक्विड खाद देना और बाकी प्रक्रियाओं की व्यवस्था अनुभवी श्रमिकों द्वारा की जाती है। इस संरचना में किसान खीरा, तरबूज, टमाटर, हरे, पीले और लाल रंग की शिमला मिर्च आदि सब्जियों की बेमौसमी खेती कर सालभर तक लाभ कमा सकते हैं। हवादार पॉलीहाउस की संरचना लोहे या स्टील से बनता है और यह 150 माइक्रॉन मोटाई वाली पॉलीथीन कवर होता है। यह पॉलीथीन सूरज की अल्ट्रावायलेट किरणों से पौधों को बचाती हैं और उन्हें अन्दर आने से रोकती है। किसान पॉली हाउस/शेड नेट हाउस निर्माण के लिए राष्ट्रीय खाद्यसुरक्षा मिशन और बागवानी मिशन के तहत 500 से 1008 वर्ग मीटर तक के पॉली हाउस ढाँचा पर निर्धारित इकाई लागत अलग-अलग अनुदान प्रतिशत अनुदान दिया जाता है।
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