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टॉप 5 सब्जियां : मार्च- अप्रैल सीजन में करे इन सब्जियों की खेती, होगा बंपर मुनाफा

टॉप 5 सब्जियां : मार्च- अप्रैल सीजन में करे इन सब्जियों की खेती, होगा बंपर मुनाफा
पोस्ट -22 फ़रवरी 2023 शेयर पोस्ट

जानें, इस सीजन की कौन सी सब्जियां उगने से होगा अधिक मुनाफा और पैदावार 

भारत में हर मौसम में खानपान बदलता है। मौसम के अनुकूल ही सब्जियों और फलों की डिमांड होती है। अब गर्मी का मौसम शुरू होने वाला है और इस मौसम में कई कुछ खास सब्जियां ज्यादा पसंद की जाती है। यदि किसान भाई मार्च-अप्रैल में उगाई जाने वाली कुछ खास सब्जियों की खेती करें तो ये उनके लिए बंपर मुनाफा दे सकती है। इन सब्जियों की पैदावार से आप लाखों रुपये की कमाई कर सकते हैं। इस सीजन में यूं तो कई सब्जियों की खेती कर सकते हैं लेकिन बेहतर यही रहेगा कि बाजार डिमांड के हिसाब से सब्जियों की खेती की जाए। ऐसे में आपको टॉप 5 सब्जियों की खेती के बारे में जानकारी दी जा रही है, जिनमें ककड़ी, भिंडी, करेला, लौकी और धनिया शामिल है। ऐसे में किसान भाई आने वाले मौसम के अनुसार इन सब्जियों बुवाई कर अच्छा पैसा कमा सकते हैं, क्योंकि गर्मियों के मौसम में इन सब्जियों के बाजार में काफी अच्छे दाम मिल जाते हैं। आईए, इस पोस्ट के जरिए मार्च से अप्रैल महीने के दौरान लगाई जाने वाली इन 5 सब्जियों की खेती करने का तरीका और इनकी उन्नत किस्म आदि के बारे में जानते हैं।

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किसान भाई मार्च में करें करेले की बुवाई

बता दें कि मार्च-अप्रैल का महीना कई मुख्य सब्जियों की खेती के लिए सबसे अच्छा माना जाता है। लेकिन करेले की खेती के लिए यह समय सबसे अधिक उपयुक्त माना जाता है। गर्मियों में तैयार होने वाली करेले की डिमांड बाजार में अधिक होती है। ऐसे में किसान भाई इसकी फसल लगाकर इससे अच्छा मुनाफा ले सकते हैं। भारत में अधिकांश किसान भाई करेले की खेती से साल में 2 बार पैदावार लेते हैं। गर्मियों के समय पैदावार प्राप्त करने के लिए करेले की बुवाई मार्च में करनी चाहिए। किसान भाई करेले की बुवाई किसी भी प्रकार की मिट्टी वाली भूमि पर कर सकते हैं। लेकिन अच्छी गुणवत्ता वाली ज्यादा पैदावार के लिए करेले की खेती के लिए अच्छे जल निकासी वाली बलुई दोमट मिट्टी वाली भूमि का उपयोग करें। करेले की फसल की अच्छी वृद्धि न्यूनतम तापमान 20 डिग्री एवं अधिकतम तापमान 35 से 40 डिग्री सेंटीग्रेट होना चाहिए। करेले की खेती से बेहतर पैदावार लेने के लिए पूसा हाइब्रि‍ड 1, 2, पूसा दो मौसमी, पूसा विशेष, कल्याणपुर, प्रिया को- 1, एस डी यू- 1, कोइम्बटूर लांग, कल्यानपुर सोना, बारहमासी करेला, पंजाब करेला- 1, पंजाब- 14, सोलन हरा, सोलन, बारहमासी आदि उन्नत किस्मों का ही इस्तेमाल करना चाहिए। इसके बीजों खेत में लगाने से पहले 15 से 20 घंटे पानी में रखना चाहिए, ताकि बीज आसानी से अंकुरित हो सके। इसके बीजों की बुवाई क्यारी में 2-3 से.मी गहराई में ही करना चाहिए। 

भिंडी की अगेती किस्मों की बुवाई

भिंडी एक लोकप्रिय सब्जी हैं। भारत के अधिकतर हिस्सों में इसकी खेती ग्रीष्म तथा खरीफ, दोनों ही ऋतुओं में की जाती है। भिंडी की बुवाई फरवरी और मार्च और वर्षा ऋतु में इसकी बुवाई जून और जुलाई के महीने में किसान भाई कर सकते है। बाजारों में भिंडी की मांग लगभग वर्ष भर रहती है। इस हिसाब से किसान भाई इसकी अगेती किस्मों की बुवाई मार्च से अप्रैल के महीने में कर सकते हैं। इसकी खेती के लिए उचित जल निकास वाली रेतीली से चिकनी मिट्टी वाली भूमि को उपयुक्त माना गया है। किसान भिंडी की अगेती किस्मों में हिसार उन्नत, वी आर ओ- 6, पूसा ए- 4, परभनी क्रांति, पंजाब- 7, अर्का अनामिका, वर्षा उपहार, अर्का अभय, हिसार नवीन, एच बी एच आदि की बुवाई कर सकते हैं। भिंडी की खेती में सिंचाई की व्यवस्था अच्छी होनी चाहिए। ग्रीष्मकालीन भिंडी की फसल के लिए इसके बीजों की बुवाई कतारों में ही करना चाहिए। है। भिंडी की बुवाई के करीब 15 से 20 दिन पश्चात पहली निराई-गुडाई करना चाहिए। साथ ही इस बात का पूरा ध्यान रखना चाहिए कि खरपतवार के नियंत्रण के लिए अधिक कीटनाशक का इस्तेमाल न हो। 

लौकी की फसल लगाने लिए उपयुक्त 

कद्दूवर्गीय सब्जियों की फसलों में लौकी की फसल प्रमुख रुप से किसान भाई द्वारा लगाई जाती है। लौकी की खेती जायद, खरीफ और रबी तीनों सीजन में की जा सकती है। जायद सीजन में इसकी खेती की बुवाई का उपयुक्त समय मार्च से अप्रैल का महीना है। लौकी की खेती कई प्रकार की भूमि में आसानी से की जा सकती हैं, लेकिन इसकी सफल और अच्छी पैदावार के लिए उचित जल धारण क्षमता वाली जीवांश्म युक्त हल्की दोमट मिट्टी वाली भूमि को उपयुक्त माना गया है। लौकी की सफल खेती के लिए पूसा संतुष्टि, पूसा संदेश (गोल फल), पूसा समृद्धि, पूसा हाईबि‍ड 3, नरेंद्र रश्मी, नरेंद्र शिशिर, नरेंद्र धारीदार, काशी गंगा, काशी बहार आदि उन्नत किस्मों का ही इस्तेमाल करना चाहिए। लौकी की ये किस्में 50 से 55 दिनों के पश्चात पैदावार देना आरंभ कर देती है। 

ककड़ी की खेती 

ककड़ी खेती जायद सीजन में की जाती है। इसकी फसल लगाने का उपयुक्त समय मार्च का महीना होता है। ककड़ी एक अल्पकालीन समय में परिणाम देने वाली फसल हैं। आज के समय इसका उपयोग सलाद के रूप में बढ़ता जा रहा है। ऐसे में किसान भाई मार्च महीने में इसकी फसल लगाकर गर्मियों में काफी मोटा पैसा कमा सकते हैं। ककड़ी की खेती के लिए गर्म एवं शुष्क जलवायु को उपयुक्त माना जाता है। इसकी खेती के लिए जैविक तत्वों की उच्च मात्रा वाली अच्छे जल निकास युक्त दोमट मिट्टी को उपयुक्त माना गया है। ककड़ी की खेती से अच्छी पैदावार लेने के लिए अर्का शीतल, लखनऊ अर्ली, नसदार, नस रहित लम्बा हरा और सिक्किम आदि ककड़ी के उन्नत किस्मों की बुवाई ही करनी चाहिए। 

धनिया की बुवाई का समय 

धनिया अम्बेली फेरी या गाजर कुल की सदस्य है। हरा धनिया को सिलेन्ट्रो या चाइनीज पर्सले के नाम से जाना जाता है। यह एक वर्षीय बहुमूल्य बहुउपयोगी मसाला फसल है। इसकी फसल के बीज तथा हरी पत्तियां का इस्तेमाल भोजन को सुगंधित एवं स्वादिष्ट बनाने के लिए किया जाता है। भारत धनिया का प्रमुख निर्यातक देश है। पूरे भारत में इसकी खेती साल भर की जाती है। धनिया की फसल से अच्छा उत्पादन प्राप्त करने के लिए इसकी खेती शुष्क व ठंडे मौसम में ही की जाती है। लेकिन गर्मियों के दौरान इसकी बाजार में आवक कम हो जाती है, जिस कारण इसकी मांग बढ़ जाती है। ऐसे में मार्च और अप्रैल के दौरान धनिया की खेती लगाकर किसान भाई अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं। धनिया की खेती के लिए किसान भाई स्वाति किस्म, राजेंद्र स्वाति किस्म, गुजरात कोरिनेडर-1, गुजरात धनिया-2, साधना आदि उन्नत किस्म का चयन कर सकते हैं। इसके बीजों के अंकुरण के लिए 25 से 28 डिग्री सेंटीग्रेट तापमान उपयुक्त होता है। धनिया की सिंचित फसल के लिए उचित जल निकास वाली दोमट भूमि सबसे अधिक उपयुक्त होती है। 

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