गर्मी बढ़ने के साथ ही गाय-भैंस व अन्य दुधारू पशु दूध देना कम कर देते हैं। अप्रैल शुरू होने के साथ ही यह समस्या किसानों के सामने आती है जो जुलाई तक बनी रहती है। मानसून की बारिश होने के बाद ही पशुओं के दूध देने की क्षमता में वृद्धि होती है और पशुपालक किसानों को कुछ राहत मिलती है। देश के करोड़ों पशुपालक हर साल इससे प्रभावित होते हैं। गर्मी में दुधारू पशुओं से कम दूध मिलने की समस्या को देखते हुए सरकार ने इस खास योजना को शुरू किया है। इसमें पशु से दूध कम मिलने पर पशुपालक को सरकार की ओर से मुआवजा दिया जाएगा। पहले चरण में 10 हजार किसानों को मुआवजा दिया जाएगा। आइए, ट्रैक्टर गुरु की इस पोस्ट में जानें कि किन पशुपालक किसानों को इस योजना का लाभ मिलेगा।
भारत दूनिया का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक देश है और भारत में उत्तरप्रदेश में सबसे ज्यादा दूध का उत्पादन होता है। इसके बाद राजस्थान, आंध्रप्रदेश व अन्य राज्यों का नंबर आता है। हर साल गर्मी शुरू होते ही दुधारू पशुओं की दूध देने की क्षमता कम हो जाती है। दूध उत्पादन में कमी के पीछे सबसे बड़ा कारण गर्मी में पशुओं की पाचन क्षमता का कमजोर होना है। गर्मी में दूध उत्पादन के लिए पशुओं के शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स और पानी की जरूरत होती है जो गर्मी की वजह से पूरी नहीं हो पाती है। इसके अलावा हरे चारे की कमी और तेज गर्मी के कारण पशु का खानपान भी कम हो जाता है जिससे दूध उत्पादन में कमी दिखाई देती है।
दुधारू पशुओं द्वारा दूध कम देने के कारण पशुपालकों को जो नुकसान होता है उसकी भरपाई सरकार की ओर से की जाएगी। योजना के अनुसार पशुपालकों को अप्रैल और मई महीने के लिए मुआवजा राशि दी जाएगी। योजना का लाभ उन किसानों को मिलेगा जो क्षेत्रीय सहकारी समिति से जुड़े हुए हैं। एकल पशुपालक के अलावा डेयरी सहकारी समितियां भी इस योजना का लाभ उठा सकती है।
इस नई योजना के तहत करीब 25 हजार दुधारू पशुओं का बीमा कवर का लाभ मिलेगा। केरल के 10 हजार किसान इस योजना के तहत अपना पंजीयन करा सकते हैं। एर्नाकुलम क्षेत्रीय सहकारी दुग्ध उत्पादक संघ (ईआरसीएमपीयू) के अध्यक्ष एमटी जयन के अनुसार योजना में 10 हजार किसान शामिल हो सकते हैं, क्योंकि प्रति डेयरी यूनिट में जानवरों की औसत संख्या को ध्यान में रखा गया है। यह योजना फिलहाल त्रिशूर, एर्नाकुलम, कोट्टायम और इडुक्की जिलों के लिए शुरू की गई है। इन जिलों के पशुपालक किसान क्षेत्रीय सहकारी समिति के अंतर्गत आते हैं। उल्लेखनीय है कि इस क्षेत्र में करीब 1 हजार डेयरी सहकारी समितियां हैं।
केरल में लागू इस योजना के तहत मात्र 99 रुपए के प्रीमियम भुगतान पर पशुपालक किसानों को मुआवजे का लाभ दिया जाएगा। यह मुआवजा अधिकतम 2 हजार रुपए तक हो सकता है। बीमा का लाभ उठाने के लिए किसानों को एक पशु की एवज में 99 रुपए का प्रीमियम जमा कराना होगा। इसमें से 49 रुपए का भुगतान लाभार्थियों द्वारा किया जाएगा जबकि 50 रुपए का भुगतान क्षेत्रीय सहकारी संस्था द्वारा किया जाएगा।
केरल में जैसे-जैसे दिन का तापमान बढ़ेगा, उसी के अनुसार पशुपालक किसानों को मुआवजे की राशि दी जाएगी। योजना में चयनित जिलों के लिए तापमान की सीमा तय की गई है। यदि तापमान निर्धारित डिग्री से 6, 8, 10 या 25 दिनों तक ज्यादा रहे तो भुगतान किया जाता है। दिनों के हिसाब से पशुपालकों को क्रमश: 140, 440, 900 और 2 हजार रुपए का मुआवजा मिलेगा।
केरल में अप्रैल और मई माह के दौरान तापमान 40 से 45 डिग्री के बीच रहता है। कई बार तो अधिकतम तापमान 47 डिग्री तक पहुंच जाता है। इन दिनों केरल भीषण हीट वेव का सामना कर रहा है। बढ़ते तापमान के कारण पशुओं के दूध उत्पादन में कमी आई है। ईआरसीएमपीयू अध्यक्ष एमटी जयन के अनुसार क्षेत्र में दूध की खरीद प्रतिदिन लगभग एक लाख लीटर तक कम हो गई है। पूरे प्रदेश् में 20 प्रतिशत तक दूध की कमी हुई है, जो सामान्य स्तर से प्रतिदिन कम से कम तीन लाख लीटर तक दूध की कुल कमी की संभावना को दर्शाता है। दूध की आपूर्ति में कमी को महाराष्ट्र और कर्नाटक से दूध मंगाकर पूरा किया जाता है।
पशुपालक किसानों को मुआवजा देने की योजना बनाते समय सरकार ने कुछ बुनियादी बातों का ध्यान रखा है। जयन ने बताया कि गर्मी के दिनों में पशुओं को बार-बार पानी पिलाना पड़ता है और उन्हें छाया में रखना होता है। इससे किसानों का पशु देखभाल में समय बढ़ जाता है, जबकि अन्य मौसम में पशुपालक इस समय का उपयोग हरा चारा लाने व काटने में करते हैं। गर्मी का स्तर बढ़ने के कारण डेयरी किसान चारा एकत्रित करने या जानवरों को चारे के लिए बाहर नहीं छोड़ सकते हैं।
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