बासमती चावल की खेती में 10 कीटनाशकों पर रोक, जानें क्या होगा किसानो को फायदा

बासमती चावल की खेती में 10 कीटनाशकों पर रोक, जानें क्या होगा किसानो को फायदा
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बासमती चावल के लिए इन कीटनाशकों पर लगाया गया बैन, न करें उपयोग

किसानों और निर्यातकों के हित के लिए सरकार द्वारा एक बड़ा फैसला लिया गया है। जो किसान बासमती चावल की खेती करते हैं उनके लिए एक बड़ा अपडेट आया है। दरअसल पंजाब कृषि विश्वविद्यालय की सरकार से यह सिफारिश थी कि मार्केट में 10 प्रकार के कीटनाशक मौजूद है जो किसानों के बासमती उत्पादन की गुणवत्ता और निर्यात को प्रभावित कर रही है। यह कीटनाशक उपभोक्ताओं के लिए तो स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव डालने वाला है ही, साथ ही यह किसानों के बासमती चावल उत्पादन की  गुणवत्ता को प्रभावित करता है साथ ही निर्यात में भी मुश्किलें पैदा करता है। किसानों के हित के लिए इस प्रकार का निर्णय राज्य सरकार ने लिया है। कुल 10 कीटनाशक हैं, जो ज्यादातर किसान उपयोग करते हैं। सरकार के इस फैसले के बाद अब किसान इन कीटनाशकों का उपयोग नहीं कर पाएंगे। ये कीटनाशक हैं : एसेफेट, हेक्साकोनोजोल, प्रोपिकानोजोल, क्लोरपाईरीफोस, बुप्रोफेजिन, थियामेथोक्सम, प्रोफेनोफोस, ट्राईसाइक्लाजोल, कार्बेंडाजिम और इमिडाक्लोप्रिड आदि।

इस कीटनाशक को क्यों बैन किया गया, किसानों के लिए यह कितना फायदेमंद साबित होगा, फसल में इस कीटनाशक से कितना नुकसान हो रहा था, ट्रैक्टर गुरु के इस पोस्ट में इसी के बारे में हम विस्तार से जानकारी दे रहे हैं।

क्यों किया गया बैन

बासमती चावल के नमूनों में कीटनाशकों के अवशेष मिलने से एक्सपोर्ट में भारी कमी आने की आशंका जताई जा रही थी। क्योंकि चावल का निर्यात मानकों पर खड़ा उतरना जरूरी होता है, तभी इसे एक्सपोर्ट किया जा सकता है। पंजाब सरकार के मुताबिक इन कीटनाशकों में हानिकारक रसायनों की संख्या लिमिट से ज्यादा है। जिससे इस चावल को एक्सपोर्ट मानकों पर खड़ा उतरना मुश्किल हो जाता है। इन कृषि रसायनों के उपयोग से चावल के दानों में अधिकतम अवशिष्ट स्तर ( Maximum Residue Level ) से अधिक अवशेष होते हैं और यही वजह है कि पंजाब एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी ने इन रसायनों के लिए दूसरा ऑप्शन खोजने की सिफारिश राज्य सरकार से की थी।

कब से कब तक रहेगा बैन

पंजाब सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए बासमती चावल के लिए नुकसानदेह 10 कीटनाशकों को बैन कर दिया है। यह बैन 1 अगस्त 2023 से लागू हो जाएगा और अगले 60 दिनों तक बना रहेगा। इस बीच में इसकी बिक्री, वितरण और उपयोग पर बैन रहेगा। बताया जा रहा है कि पंजाब सरकार के इस कदम से प्रभावित होकर देश में अन्य राज्य भी इन कीटनाशकों पर बैन लगा सकते हैं। किसानों और निर्यातकों के लिए यह एक अच्छी खबर है लेकिन एग्रो केमिकल इंडस्ट्री के लिए एक झटका से कम नहीं है। बता दें कि पंजाब से सबसे ज्यादा बासमती चावल का उत्पादन होता है। पंजाब सरकार ने इस कदम को उठाने से पहले संबंधित पक्षों की राय भी ली। जिसमें एपिडा के अंतर्गत आने वाले बासमती एक्सपोर्ट डेवलेपमेंट फाउंडेशन, पंजाब राइस मिलर्स एंड एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन, क्रॉप लाइफ इंडिया, क्रॉप केयर फाउंडेशन ऑफ इंडिया को बुलाया गया था। लेकिन बैठक को बाढ़ और बारिश की वजह से कैंसल कर दिया गया। 

सरकार के इस फैसले के पक्ष में ज्यादातर संगठन दिखे। जिसमें पंजाब कृषि विश्वविद्यालय ने प्रमुखता से सरकार का समर्थन किया। वहीं क्रॉप लाइफ इंडिया, सरकार के इस फैसले से सहमत नहीं है। उन्हें लगता है कि एग्रो केमिकल इंडस्ट्री से बिना राय लिए इस फैसले को लिया गया।

किसानों को कितना होगा फायदा

सरकार के इस फैसले से किसानों को सीधे सीधे फायदा तो नहीं है, क्योंकि ब्लास्ट रोग जैसे कई धान के प्रमुख रोगों के लिए इस कृषि रसायन को उपयोग में लाया जाता है। लेकिन इस रसायन के उपयोग न होने से चावल की गुणवत्ता काफी अच्छी होगी और यह एक्सपोर्ट के मानकों पर खड़ा उतरेगी। एक्सपोर्ट की वजह से किसानों को चावल की दुगुना, तिगुना कीमत मिल सकेगी। क्योंकि एक्सपोर्ट मार्केट में चावल की कीमतें काफी अच्छी है। इस तरह किसानों को सरकार के इस फैसले से अप्रत्यक्ष रूप से काफी ज्यादा फायदा मिल सकता है। किसान पहले से ज्यादा अच्छे रेट पर चावल की बिक्री कर पाएंगे।

निर्यातकों को कितना होगा फायदा

सरकार के इस फैसले से निर्यातको को सीधे सीधे यानी प्रत्यक्ष लाभ है। निर्यातकों का पूरा व्यापार निर्यात पर ही निर्भर होता है। किसानों से मिले चावल को जब एक्सपोर्ट के लिए स्वीकृति मिलेगी तो इससे निर्यातकों को सीधा फायदा होगा। निर्यातक इससे अच्छा मुनाफा बना पाएंगे और किसानों को भी अच्छा रेट मुहैया करा पाएंगे। बासमती के उत्पादन और परेशानी मुक्त निर्यात के लिए सरकार के इस कदम की सराहना की जा रही है।

बैन कीटनाशक की लिस्ट

पंजाब सरकार द्वारा बैन की गई कीटनाशक की लिस्ट इस प्रकार है।

  • एसीफेट ( Acephate )
  • बुप्रोफेजिन ( Buprofezin)
  • क्लोरपाइरीफोस (Chlorpyrifos)
  • हेक्साकोनाजोल (Hexaconazole)
  • प्रोपीकोनाजोल (Propiconazole)
  • थियामेथॉक्सम (Thiamethoxam)
  • प्रोफिनोफोस (Profenofos)
  • इमिडाक्लोप्रिड ( Imidacloprid )
  • कार्बेंडाजिम ( Carbendazim )
  • ट्राईसाइक्लाजोल ( Tricyclazole )

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