टॉप 5 कमर्शियल पेड़ों की खेती, किसानो को मिलेगा बंपर मुनाफा

टॉप 5 कमर्शियल पेड़ों की खेती, किसानो को मिलेगा बंपर मुनाफा
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किसानों को 5 कमर्शियल पेड़ों की खेती, कमाए कम लागत में अधिक मुनाफा 

पेड़ों की खेती का आइडिया: भारत में बड़े पैमाने पर पारंपरिक फसलों के साथ बागवानी फसलों की खेती का रकबा भी तेजी से बढ़ रहा है। लेकिन इसके बावजूद भी किसानों को खेती-किसानी से उचित लाभ नहीं हो रहा है। ऐसे में किसान बदलते दौर में खेती-किसानी के साथ-साथ अतिरिक्त कमाई के लिए बहुमूल्य पेड़ फसलों की खेती की ओर रुख कर रहे हैं। इन सबमें देश की विभिन्न राज्य सरकारें भी बहुमूल्य पेड़ फसलों की खेती के लिए किसानों को प्रोत्साहित कर रही है। इसमें मार्केट डिमांड के अनुसार सरकार आधुनिक तकनीकों से विभिन्न बहुमूल्य पेड़ों की खेती पर किसानों को बंपर सब्सिडी भी दे रही है। इसके लिए राज्य सरकारें तमाम नई योजनाएं बनाकर किसानों को जागरूक करने के लिए कार्यक्रम भी संचालित कर रही है। इन योजनाओं का लाभ लेकर किसान खेती-किसानी के साथ अतिरिक्त आय का नया साधन बनाकर अपनी आय को दोगुनी कर सकते हैं। अगर आप किसान है और आपके पास उपजाऊ जमीन है और आप खेती के साथ कम लागत पर अतिरिक्त आय अर्जित करना चाहते हैं, तो ट्रैक्टर गुरू की यह पोस्ट आपके लिए खास साबित हो सकती है। इस पोस्ट में हम आपको 5 ऐसे कमर्शियल पेड़ों की खेती की जानकारी देंगे, जिनकी आज के दौर में मार्केट में डिमांड काफी बड़े पैमाने पर है। कम लागत में आप इन पेड़ फसलों की खेती कर प्राप्त उत्पादन का बिजनेस कर करोड़ों का मुनाफा हासिल कर सकते हैं। इन कमर्शियल पेड़ फसलों से 8 से 10 सालों में ही जमकर पैसा बरसेगा और अतिरिक्त आय का एक अहम जरिया भी साबित हो सकता है। 

इन टॉप 5 कमर्शियल पेड़ों की खेती कर सकते हैं किसान

अगर आप औसत भूमि पर खेती करते हैं और खेती के साथ कम लागत में बंपर मुनाफा कमाने की सोच रहे हैं, तो अपके लिए कमर्शियल पेड़ों की खेती सही साबित हो सकती है। आप इनकी खेती से प्राप्त उत्पादन को मार्केंट में अच्छे रेट पर बेचकर करोड़ों रुपए की आय प्राप्त कर सकते हैं। हालांकि, आप इसे लॉन्ग टर्म इन्वेस्टमेंट मान सकते हैं। इसका लाभ लेने के लिए आपको थोड़ा समय देना पड़ता है। लेकिन इन्हें एक निश्चित समय देने पर यह आपको करोड़ों रुपये की कमाई आसानी से करवा सकते हैं। हम जिन कमर्शियल पेड़ फसलों की बात कर रहे हैं, उनमें शहतूत, महोगनी, यूकेलिप्टस (नीलगिरी), मालाबार नीम और चंदन आदि शामिल है। 

इन टॉप 5 पेड़ फसलों को लगाने से काटने तक के बीच के समय में आप अतिरिक्त कमाई के लिए इनके बीच खाली जगहों पर हल्दी, अदरक, अरबी, काली मिर्च और मिर्च जैसी अंतरवर्गीय फसलों की खेती भी सफलतापूर्वक कर सकते हैं। 

शहतूत की खेती  

शहतूत की खेती मुख्य रूप से रेशम उत्पादन के लिए की जाती है। इसके पूर्ण विकसित पेड़ों पर रेशम के कीटों का पालन किया जाता है। शहतूत का फल स्वादिष्ट और सेहतमंद होता हैं। इसके फलों के इस्तेमाल से कई प्रकार की दवाइयां बनाई जाती है। शहतूत के एक हेक्टेयर खेत में इसके पौधों की रोपाई में लगभग 1 से 1.50 लाख का खर्च आ सकता है। शहतूत के पेड़ लगाकर करीब 3 से 4 साल की देखभाल के बाद इसके पौधे रेशम  कीट पालने योग्य हो जाते हैं। आप इसकी पत्ती निकाल कर रेशम बना सकते हैं। इसके अलावा आप इसकी सूखी पत्तियों का इस्तेमाल बत्तख और मुर्गियों के चारे के रूप में भी कर सकते हैं। शहतूत की लकड़ी के उपयोग से खिड़कियों, दरवाजे, फर्नीचर तथा खेल आदि सामान बनाया जाता है। इसकी लकड़ियों की बाजार में डिमांड अच्छी होने से इसके काफी अच्छे दाम तक मिल जाते हैं। इसके प्राप्त रेशम से बने उत्पादों की कीमत 45 हजार से लेकर 2.5 लाख रुपए तक हो सकती है। यह एक सदाबहार वृक्ष होता है। इसकी खेती के लिए शीतोष्ण जलवायु उपयुक्त है। शहतूत की खेती के लिए 20 से 30 डिग्री सेल्सियस के तापमान को उपयुक्त माना गया है। इसकी खेती के लिए 6 से 7 पीएम मान के बीच वाली दोमट और चिकनी बलुई मिट्टी वाली भूमि सबसे अच्छी रहती है। हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में शहतूत की खेती मुख्य रूप होती है। इसके पौधों की रोपाई का उपयुक्त समय जून से जुलाई तथा नवंबर से दिसंबर माह है। मैसूर, कर्नाटक में शहतूत प्रशिक्षण संस्थान है, जहां किसानों को इसकी खेती से लेकर रेशम पालन और मार्केटिंग आदि का संपूर्ण प्रशिक्षण दिया जाता है। 

मालाबार नीम की खेती  

मालाबार नीम एक बहुउद्देशीय कमर्शियल पेड़ फसल है। इससे प्राप्त उत्पाद के इस्तेमाल से पैकिंग बॉक्स, क्रिकेट स्टिक, कृषि संबंधित उपकरण, तिल्लियां, छत के तख्तों, स्प्लिंट्स, कट्टामारम, पेन्सिल और फर्नीचर बनाए जाते हैं। इसके अलावा, इसकी लकड़ियों का उपयोग नाव के आउटरिगर, संगीत वाद्य यंत्र, चाय के बक्से और प्लाईबोर्ड के लिए किया जाता है। खास बात यह है इसकी लकड़ियों में दीमक नहीं लगती, जिसके कारण इसकी लकड़ियां सालों साल सुरक्षित रहती हैं। 4 एकड़ भूमि पर लगभग 5 हजार से 6 हजार मालाबार नीम के पौधे लगाए जा सकते हैं। वहीं, बाहरी किनारों पर भी 1 हजार से 2 हजार पेड़ तक लगाए जा सकते हैं। मालाबार नीम का पौधा सालभर में लगभग 7 से 8 फीट की ऊंचाई तक बढ़ता है। इसके पूर्ण विकसित पेड़ लगभग 6 साल में कटाई के लिए तैयार हो जाते हैं। मार्केंट में इसकी लकड़ियों की कीमत लगभग 500 से 550 रुपए क्विंटल तक होती है। इसका एक पेड़ 6.5 से 7 हजार रूपए तक बिक जाता है। मालाबार नीम की खेती सामान्य पीएच मान वाली सभी प्रकार की भूमि पर की जा सकती है। इसकी खेती के लिए सामान्य सिंचाई की आवश्यकता होती है। इसके पौधों की रोपाई मार्च व अप्रैल महीने में की जाती है। 

महोगनी पेड़ की खेती 

महोगनी का वृ़क्ष बहुत ही कीमती वृक्ष है। इसके पेड़ के लगभग सभी भागों को इस्तेमाल विभिन्न प्रकार के उत्पादों के निर्माण में किया जाता है। इसके कारण इसके पेड़ से प्राप्त लकड़ी से लेकर खाल, बीज और पत्तियां तक सभी बाजार में काफी अच्छे दाम पर बिकते हैं। महोगनी पेड़ से प्राप्त बीज बाजार में लगभग 1 हजार रुपए किलो तक बिक जाते हैं। खास बात यह है कि इसके पेड़ को पानी से भी कोई हानि नहीं पहुंचती है, जिसके कारण इसकी लकडि़यों का इस्तेमाल जहाज, कीमती गहने, फर्नीचर, प्लाईवुड, सजावट की वस्तुए एवं मूर्तियों को बनाने में किया जाता है। इसमें औषधीय गुण होने के कारण इसके छाल, फूल एवं बीजों का इस्तेमाल शक्तिवर्धक दवाइयों को बनाने में किया जाता है। इसके अलावा, इसकी पत्तियों और बीजों के तेल से मच्छर भगाने वाले प्रोडक्ट्स एवं कीटनाशक तैयार किए जाते हैं। किसान कम लागत और बंपर मुनाफे के लिए महोगनी की खेती कर सकते हैं। हालांकि, इसकी खेती में धैर्य रखने की जरूरत है। क्योंकि इसका पेड़ लगभग 10 से 12 साल बाद उत्पादन देने के लिए तैयार होता है। इसके 1 एकड़ खेत से मात्र 12 साल के पश्चात किसान भाई करोड़पति बन सकते हैं। बाजार में इसकी लड़की करीब 2 हजार से 2,300 रुपये प्रति घनफीट के दाम से बिकती हैं। ऊंचे स्थानों छोड़कर कहीं भी महोगनी के पेड़ों की खेती आसानी से की जा सकती है। इसकी खेती सभी प्रकार की उपजाऊ अच्छी जल निकासी वाली सामान्य पीएच मान की भूमि पर की जा सकती है। महोगनी के पौधों की रोपाई का सही समय जून और जुलाई का महीना है। क्योंकि इस समय मानसून का दौर शुरू हो जाता है, जिसके कारण पौधों को रौपाई के लिए उचित वातावरण मिल जाता है। 

यूकेलिप्टस (सफेदा) के पेड़ की खेती 

यूकेलिप्टस (सफेदा) के पेड़ को सफेदा या नीलगिरी के नाम से भी जाना जाता है। इसकी खेती में लागत बहुत कम और मुनाफा बहुत ज्यादा मिलता है। इसे आप कम जमीन पर भी लगाकर इसके पेड़ों से अच्छा बिजनेस कर सकते हैं। हालांकि, यहां लाभ उसी को मिलता है, जो इसकी खेती को थोड़ा समय देता है। इसके पेड़ों को लगाने से काटने तक के लिए 10 से 11 साल तक का लंबा समय देना पड़ता है। इसके पेड़ों को काेई खास देखभाल की जरूरत नहीं होती है और इस बढ़ने के लिए सामान्य जल की आवश्यकता पड़ती है। इसके पेड़ को खेत के मेड़ो पर लगाकर कुछ सालों के पश्चात अच्छा लाभ कमाया जा सकता है। कई राज्य सरकारें इसकी खेती पर सब्सिडी भी देती है। अगर सफेदे की खेती सही तरीके से एक बड़े भू-भाग पर की जाए, तो खेती से लगभग करोड़ रुपए तक कमाया जा सकता है। इसकी खेती के लिए किसी खास प्रकार की भूमि की कोई आवश्यकता नहीं होती है। किसान इसकी खेती बेकार व बंजर भूमि पर भी कर सकते हैं। 

चंदन का पेड

चंदन एक ऐसी मुनाफेदार बहुमूल्य कमर्शियल पेड़ फसल है, जिसके उत्पाद की मांग देश के साथ विदेशों में भी बड़े स्तर पर रहती है। इसकी लकड़ी से बने उत्पादों की कीमत बाजार में काफी ऊंची होती है। चंदन की खेती लगाने में जितना पैसा खर्च होता है, उससे अधिक मुनाफ इसकी खेती से होता है। चंदन के पौधे किसी भी नर्सरी से 450 से 500 रूपए प्रति पौधे थोक भाव में खरीदें जा सकते हैं। वहीं, इसके साथ लगने वाले होस्ट के पौधे करीब 50 से 60 रुपये प्रति पौधे के हिसाब से खरीदें जा सकते है। एक एकड़ खेत में लगभग 400 से 450 पौधों की रोपाई की जा सकती है। चंदन की खेती में लागत इसके क्षेत्र पर निर्भर करती है। इसके पेड़ों को शुरूआती दौर में खास देखभाल एवं सुरक्षा की आवश्यकता नहीं होती है। लेकिन  8 से 10 साल बाद जब इसके पेड़ तैयार होने लगते हैं, तो उनमें से एक प्यारी सुगंध आना शुरू हो जाती है। इस समय इसके पेड़ों को सुरक्षा की आवश्यकता होती है। चंदन की खेती में लगभग 1 से 1.5 लाख रुपए का खर्च आता है और मुनाफा लगभग 60 से 65 लाख रुपए तक हो सकता है। इसका तैयार एक पेड़ बाजार में लगभग 4 से 5 लाख रूपये तक बिक जाता है। आप जितने बड़े क्षेत्र में चंदन की खेती लगाएंगे, इससे आपको उतनी ही अधिक आय होगी। मार्केंट में चंदन की कीमत लगभग 20 से 25 हजार रुपए किलो हो सकती है। इसके अलावा विदेशों में इसकी कीमत लगभग 25 से 30 हजार रुपए प्रति किलोग्राम तक बताई जाती है। चंदन की कमर्शियल खेती के लिए रेतीली मिट्टी, चिकनी मिट्टी, लाल मिट्टी, काली दानेदार मिट्टी उपयुक्त होती हैं। 

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