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बारिश के मौसम में पशुओं की देखभाल के लिए करें ये 5 काम, नहीं होगा नुकसान

बारिश के मौसम में पशुओं की देखभाल के लिए करें ये 5 काम, नहीं होगा नुकसान
पोस्ट -26 जुलाई 2023 शेयर पोस्ट

बारिश में पशुओं की देखभाल जरूरी, पशुओं के लिए कर लें ये 5 काम, मिलेगा लाभ 

बारिश के मौसम में पशुओं की उचित देखभाल और भी ज्यादा जरूरी हो जाती है, क्योंकि इस मौसम में पशुओं को सबसे ज्यादा बीमारियों का खतरा रहता है और दुधारू पशुओं को होने वाला कोई भी स्वास्थ्य नुकसान, किसानों को काफी ज्यादा आर्थिक नुकसान पहुंचा सकता है। सामान्य पशुओं में भी यदि किसी प्रकार का रोग होता है तो किसान को उसकी बीमारी को कंट्रोल करने में दवाई और डॉक्टर खर्च के रूप में काफी व्यय करना पड़ता है। इससे किसानों को पैसे, समय व श्रम का नुकसान पहुंचता है। इसलिए जरूरी है कि बारिश के मौसम में कुछ ऐसे काम कर लेना चाहिए, जो पशुओं के स्वास्थ्य के लिए सकारात्मक हो।

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गौरतलब है कि ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन बड़ी मात्रा में रोजगार प्रदान करता है। पशुपालन की मदद से देश में करोड़ों किसान, अपनी आय में बढ़ोतरी कर पाते हैं। खेती के साथ पशुपालन किसानों के लिए बेहद फायदे का सौदा होता है। यही वजह है कि पशुपालन के महत्व को देखते हुए पशुओं की मौसम के हिसाब से उचित देखभाल जरूरी है ताकि किसान ज्यादा से ज्यादा फायदा उठा पाएं। बारिश का मौसम जून माह से सितंबर माह तक रहता है, इसलिए जरूरी है कि पशुओं की देखभाल के लिए उचित इंतजाम किए जाएं।

ट्रैक्टर गुरु के इस पोस्ट में हम बारिश में पशुओं की देखभाल के लिए 5 महत्वपूर्ण जानकारी दे रहे हैं जो किसानों के लिए बेहद काम की है। 

बारिश के मौसम में पशुओं के देखभाल के 5 महत्वपूर्ण पॉइंट्स 

बारिश में पशुओं की अच्छी देखभाल जरूरी है। इस मौसम में पशुओं को कई प्रकार के रोग लगने की संभावना रहती है। ज्यादा बारिश, बाढ़, बिजली गिरने आदि से पशुओं को नुकसान पहुंचने का खतरा बना रहता है। इसलिए पशुओं को उचित व्यवस्था प्रदान करना महत्वपूर्ण है। 

1. बाड़े की सफाई 

पशुओं के बाड़े की नियमित सफाई जरूरी है। समय समय पर बाड़े की सफाई करें। बारिश के मौसम में कभी कभी पानी का जमाव भी बाड़े में होता है, तो किसान पशुओं के रहने के स्थान को ऊंचा करके इस समस्या से निजात पा सकते हैं। साथ ही पशुओं के घर में छत से रिसाव आदि की समस्या को दूर कर लें। समय समय पर सफाई से बाड़े शुष्क रहते हैं और इस तरह जीवाणुओं एवं परजीवियों को बहुत हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। इसके अलावा पशुओं का टीकाकरण भी जरूरी है। जैसे खुरपका एवं मुंहपका रोग का टीका, गलघोंटू और लंगड़ी बुखार का टीका पशुओं को लगा देना चाहिए।

2. बाड़े में चूने का छिड़काव 

बारिश के मौसम में जमीन को शुष्क रखने के लिए आप चूने का छिड़काव कर सकते हैं। चूंकि फिसलन वाली जगह पर पशुओं के गिरने पर उसे चोट लगने का भी खतरा बना रहता है। अगर नियमित रूप से चूने का छिड़काव किया जाए तो जल जमाव की वजह से होने वाले बहुत से रोगों से पशुओं को बचाया जा सकता है। कुकरिया रोग, पैर सरांध्र आदि रोगों का खतरा बारिश के मौसम में पशुओं को होता है। चूने के छिड़काव से जमीन शुष्क और परजीवियों से मुक्त रहेगी। इसलिए बारिश के मौसम में नियमित रूप से बाड़े में चूने का छिड़काव करें।

3. परजीवी नाशक पत्तों का उपयोग 

मवेशियों में सर्रा, थिलेरिया, बबेसियोसिस, जैसे रोगों का खतरा कम करने के लिए पशुओं के बांधने की जगह पर परजीवी नाशक पत्तों को रख सकते हैं। ये पत्ते जैसे तुलसी और लेमनग्रास के पत्ते हो सकते हैं। इसके अलावा एक दवाई आती है, ब्यूटॉक्स जिसका पानी के साथ छिड़काव किया जाता है। यह पशुओं को कई परजीवियों जैसे किलनी, मक्खी आदि से निजात दिला सकती है। इसके अलावा यदि पशु दुधारू है तो बारिश के मौसम में बछड़ों या बछियों को दूध का ज्यादा मात्रा सेवन के लिए देना चाहिए। इससे बछड़ों के शरीर में पर्याप्त इम्यूनिटी और ऊष्मा पैदा होती है। 

4. पशुओं के चारा के लिए सुझाव 

बारिश में पशुओं को संतुलित आहार देने की जरूरत होती है। पशुओं को हरा चारा के साथ उचित मात्रा में सूखा चारा देने की जरूरत होती है। बरसात के मौसम के दौरान हरी घास में पानी ज्यादा होता है, जिसकी वजह से पशुओं का पेट जल्दी भर जाता है। लेकिन पशुओं को उचित मात्रा में ऊर्जा नहीं मिल पाती है। इसलिए हरा चारा के साथ सूखे चारे की मात्रा भी पर्याप्त रखनी चाहिए। इसके अलावा पशुओं के चारे के लिए कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखा जाना चाहिए। पशुओं को अलग अलग समय पर ताजा चारा ही खिलाएं। कई बार ऐसा होता है कि कुछ किसान पशुओं के लिए सुबह और शाम दोनों समय का चारा एक साथ रख देते हैं। लेकिन ऐसा करने से सूखे चारे में फफूंद लगने की समस्या हो जाती है और इससे पशुओं का गोबर पतला होने लगता है। पशु कमजोर हो जाते हैं। साथ ही सूखे चारे के भंडारण में भी इस बात का खास ध्यान रखना चाहिए कि भंडार में पानी का रिसाव न हो ताकि फफूंद की समस्या दूर रहे और अच्छा सूखा चारा पशुओं को खाने के लिए मिले।

5. पशु चिकित्सक से परामर्श

बारिश के समय पशुओं के लिए पशु चिकित्सक से संपर्क बना कर रखें। छोटी से छोटी समस्या की जानकारी भी अपने पशु चिकित्सक को देते रहें। किसी भी असामान्य व्यवहार के लिए चिकित्सक को सूचना देते रहें।

बारिश के मौसम में पशुओं की देखभाल के ये 5 जरूरी टिप्स आपको पसंद आए होंगे। खेती-किसानी, पशुपालन से जुड़ी सभी महत्वपूर्ण जानकारी के लिए जुड़े रहें ट्रैक्टर गुरु के साथ..।

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