जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने के लिए आई-फॉरेस्ट के साथ एमओयू

जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने के लिए आई-फॉरेस्ट के साथ एमओयू
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प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से किसानों को मिलेगी राहत, सरकार ने आई-फॉरेस्ट के साथ एमओयू किया

climate change challenges : पिछले कुछ सालों से कृषि क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन का बुरा प्रभाव देखा जा रहा है, जिसके चलते किसानों को खेती में काफी नुकसान भी उठाना पड़ रहा है। वहीं, इस नुकसान से बचने के लिए कई किसान खेती छोड़ अन्य गतिविधियों से जुड़े रहे हैं, जिससे खाद्यान्न फसलों का रकबा घट रहा है। इन सब को देखते हुए केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा कई प्रयास किए जा रहे हैं। इस कड़ी में उत्तर प्रदेश सरकार के पर्यावरण निदेशालय ने इंटरनेशनल फोरम फॉर एनवायरनमेंट, सस्टेनेबिलिटी एंड टेक्नोलॉजी (आई-फॉरेस्ट) के साथ एमओयू किया। सरकार ने यह फैसला यूपी में पर्यावरणीय स्थिरता और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने की दिशा में लिया है। प्रदेश में सतत् विकास को बढ़ावा देना और प्रदूषण की समस्या का निवारण करना ही इस समझौता ज्ञापन (MoU) का मुख्य मकसद है। उम्मीद है कि इससे किसानों को क्लाइमेट चेंज चैलेंजेज से राहत मिलेगी और वे मौसम अनुकूल फसलों की खेती कर सकेंगे। 

सरकार ने साइन किया समझौता ज्ञापन (Government signed MoU)

दरअसल, पर्यावरणीय स्थिरता और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए उत्तर प्रदेश सरकार के पर्यावरण निदेशालय ने आई-फॉरेस्ट यानी इंटरनेशनल फोरम फॉर एनवायरनमेंट, सस्टेनेबिलिटी एंड टेक्नोलॉजी (iFOREST) के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) साइन किया। इसके तहत पर्यावरण प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन (Environmental pollution and climate change) की समस्या का निवारण किया जाएगा। गुरुवार (20 मार्च) के दिन पर्यावरण निदेशालय कार्यालय में पर्यावरण, वन व जलवायु परिवर्तन विभाग के राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. अरुण कुमार सक्सेना, राज्यमंत्री केपी. मलिक और मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह की उपस्थिति में यह एमओयू हुआ।  

आई फॉरेस्ट क्या है? (What is the iForest?)

जानकारी के लिए बता दें कि  इंटरनेशनल फोरम फॉर एनवायरनमेंट, सस्टेनेबिलिटी एंड टेक्नोलॉजी (iFOREST) स्वतंत्र, गैर-लाभकारी अनुसंधान और नवाचार संगठन है। यह भारत में पर्यावरण और विकास से जुड़ी तात्कालिक चुनौतियों से निपटने पर कार्य करता है। आई फॉरेस्ट (iFOREST) देश के प्रमुख पर्यावरण अनुसंधान संगठनों (Environmental research organizations) में से एक है, जो साक्ष्य-आधारित अनुसंधान, नए ज्ञान और नवाचारात्मक समाधान विकसित करता है। आई फॉरेस्ट हितधारकों की सहभागिता से जागरूकता बढ़ाने तथा हरित पहल को प्रोत्साहित करने के लिए भी कार्य करता है। 

आई-फॉरेस्ट के साथ 3 साल का एमओयू (3 year MoU with i-Forest)

सूत्रों के मुताबिक, पर्यावरण निदेशालय उत्तर प्रदेश सरकार और इंटरनेशनल फोरम फॉर एनवायरनमेंट, सस्टेनेबिलिटी एंड टेक्नोलॉजी (iFOREST) के बीच यह समझौता ज्ञापन (एमओयू) तीन साल के लिए हुआ है। इस दौरान, आई-फॉरेस्ट प्रदेश में प्रमुख पर्यावरणीय चुनौतियों पर ध्यान केंद्रित करेगा और वायु प्रदूषण नियंत्रण, कचरा प्रबंधन और जलवायु परिवर्तन की समस्या के लिए समाधान विकसित करेगा। यह प्रदेश में हरित ऊर्जा, उद्योगों और शहरों के सतत् विकास को प्रोत्साहित करेगा। इस एमओयू के तहत आई फॉरेस्ट शोध आधारित अनुसंधान व प्रशिक्षण कार्यक्रम कराएगा। साथ ही सरकारी योजनाओं को लागू करने में यूपी पर्यावरण निदेशालय का सहयोग भी  करेगा। 

जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का प्रभावी ढंग से समाधान (Addressing the challenges of climate change effectively)

पर्यावरण, वन व जलवायु परिवर्तन विभाग के राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. अरुण कुमार सक्सेना उत्तर प्रदेश अद्वितीय और जटिल पर्यावरणीय चुनौतियों का सामना कर रहा है। प्रदेश  सरकार वायु गुणवत्ता में सुधार, औद्योगिक उत्सर्जन को नियंत्रित करने और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न पहल में अग्रणी रही है। इस साझेदारी के तहत हम नई तकनीकों और समाधानों का प्रयोग करेंगे, ताकि प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का प्रभावी ढंग से समाधान किया जा सके। यह साझेदारी पर्यावरण संरक्षण में धार्मिक संस्थानों की सक्रिय भागीदारी को बढ़ावा देगी। इस पहल की शुरुआत महाकुंभ 2025 के दौरान हुई, जहां दोनों पक्षों ने संयुक्त रूप से प्रथम “कुंभ की आस्था और जलवायु परिवर्तन” सम्मेलन का आयोजन किया। 

समाधान प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका एमओयू (MoU plays a vital role in providing solutions)

मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह ने विज्ञान और अनुसंधान आधारित समाधानों की आवश्यकता पर बल देते हुए बताया कि पर्यावरणीय समस्याओं को हल करने के लिए अत्याधुनिक शोध और ज्ञान का विकास जरूरी है।  उम्मीद है कि यूपी पर्यावरण निदेशालय और आई फॉरेस्ट के मध्य यह एमओयू वायु प्रदूषण, कचरा प्रबंधन और नदी प्रदूषण जैसी चुनौतियों के लिए ज्ञान आधारित समाधान प्रदान करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। वहीं, विभाग के प्रमुख सचिव अनिल कुमार ने कहा कि यह साझोदारी वायु प्रदूषण प्रबंधन, हरित उद्योगों के विकास, हीटवेव जैसी जलवायु चुनौतियों के लिए शहरों की तैयारी और जलवायु नीतियों को सुदृढ़ करने में सहायक होगा।  आई फॉरेस्ट तकनीकी विशेषज्ञता प्रदान करेगा, पायलट परियोजनाएं संचालित करेगा, हितधारकों का प्रशिक्षण करेगा और पर्यावरण प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए अनुसंधान का समर्थन करेगा। 

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