खाद सब्सिडी : अब नहीं होगा खाद की कीमतों में इजाफा, उठाएं सब्सिडी का लाभ

पोस्ट -16 जून 2022 शेयर पोस्ट

जानें खरीफ सीजन के लिए किस भाव में मिलेगी खाद और कितनी देनी होगी कीमत 

खरीफ सीजन 2022 की शुरूआत हो चुकी है। देश के हर क्षेत्र के किसान खरीफ फसलों की तैयारी में जुटे हुए हैं। खरीफ फसलों की बुवाई के लिए किसान बीज से लेकर खाद तक सब की तैयारी करता नजर आ रहा है। ऐसे में देश के करोडों किसानों को केन्द्र सरकार ने बड़ी राहत दी है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे माल के भाव में बढ़ोतरी के बाबजूद केंद्र सरकार के स्वामित्व वाली कंपनी इफको ने वर्ष 2022 में खरीफ सीजन के लिए उर्वरक की कीमतों में किसी भी प्रकार की बढ़ोतरी नहीं की है। पिछले वर्ष की भांति इस वर्ष भी सभी प्रकार के उर्वरकों का मूल्य समान रहेगा। जानकारी के लिए बता दें कि केन्द्र सरकार के स्वामित्व वाली कंपनी इफको द्वारा खाद मूल्य निर्धारित किया जाता है तथा उसी भाव में किसानों को खाद बेची जाती है। वहीं इन खादों की खरीद पर सरकार सब्सिडी भी देती है, जिससे किसानों को ज्यादा कीमत भी नहीं चुकानी पड़ती है। आपको बता दें कि सरकार की तरफ से खाद के लिए सालाना 2.25 लाख करोड़ की सब्सिडी दी जाती है। 

उर्वरकों के मूल्य को स्थिर रखने के लिए 60,939 करोड़ खर्च करेगी सरकार 

इफको के अनुसार अंतराष्ट्रीय स्तर पर रासायनिक उर्वरकों के मूल्य में काफी वृद्धि के बावजूद भी देश में कीमत को स्थिर रखा गया है। केंद्र सरकार ने इस वर्ष पीएंड के आधारित उर्वरकों के मूल्य को स्थिर रखने के लिए कंपनियों को भारी सब्सिडी देने का फैसला लिया है। केंद्र सरकार वर्ष 2022 के खरीफ सीजन के लिए 60,939 करोड़ रुपए की सब्सिडी देगी, जो इस वर्ष के खरीफ मौसम के दौरान लागू रहेगी।

अब नहीं होगा खाद की कीमतों में इजाफा 

मीडिया रिपोर्ट्स मुताबिक किसानों के लिए एक अच्छी खबर यह भी है कि खाद की कीमतों में इजाफा नहीं देखने को मिलेगा, इसके संकेत केंद्रीय रसायन मंत्री मनसुख मडाविया ने दिए थे। उन्होंने कहा था हाल ही में उर्वरकों के दाम में बीते दिनों हुई बढ़ोतरी से किसानों की रक्षा हेतु केन्द्रीय बजट 2022-23 में पहले ही स्वीकृत 1.05 लाख करोड़ रूपये के अलावा 1.10 लाख करोड़ रूपये की अतिरिक्त राशि प्रदान की जा रही हैं। उन्होंने कहा था कि देश में यूरिया की पर्याप्त उपलब्धता है। हमारे पास दिसंबर तक घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए यूरिया का भंडार है। हमें दिसंबर तक आयात करने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा, खरीफ बुआई सत्र के लिए सरकार ने पहले ही 30 लाख टन डीएपी और 70 लाख टन यूरिया सहित उर्वरक की पहले से ही व्यवस्था कर चुकी है। हम खरीफ सत्र की जरूरतों के लिए पूरी तरह से तैयार हैं और जरूरत के अनुसार आगे और खरीद करेंगे। इससे साफ जाहिर होता है कि देश में पर्याप्त मात्रा में खाद का स्टॉक है और कीमतों में भी बढ़ोत्तरी नहीं होगी। 

इस समय खाद पर कितनी मिल रही सब्सिडी 

केन्द्र सरकार की कैबिनेट बैठक में केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि साल 2020-21 में डीएपी पर 10,231 रुपये प्रति टन सब्सिडी (512 रुपये प्रति बैग) थी। साल 2022-23 में (1-04-2022 से 30-09-2023) 50013 रुपये प्रति टन सब्सिडी (2501 रुपये प्रति बैग) मिलेगी। उन्होंने कहा की सरकार पूरे देश में खाद का एक ही रेट रखती है। घरेलू बाजार में यूरिया की कीमत आज 266 रुपये प्रति 50 किलो बोरी है, जबकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत बढ़कर 4,000 रुपये प्रति बोरी हो गई है। इस तरह प्रत्येक बोरी पर सरकार को करीब 3,700 रुपये की सब्सिडी देनी पड़ रही है। वहीं घरेलू बाजार में डीएपी की कीमत 1,350 रुपये प्रति बोरी है, जबकि इसकी अंतरराष्ट्रीय कीमत बढ़कर 4,200 रुपये प्रति बोरी हो गई है। जिस पर सरकार को करीब 2501 रूपये की सब्सिडी दे रही हैं। एनपीके का भाव 3291 रुपये प्रति बैग है सरकार द्वारा 1918 रुपये की सब्सिडी देने पर यह आपको 1470 में मिलेगा। एमओपी की कीमत 2654 रुपये प्रति बैग है जिस पर सरकार द्वारा 759 रुपये की सब्सिडी दी जा रही है, जिसके बाद इसकी कीमत 1700 रुपये है। केंद्र सरकार फास्फेटिक और पोटाश उर्वरक पर खरीफ सत्र की जरूरतों के लिए 60,939 करोड़ की सब्सिडी देने का फैसला किया है।

कृषि क्षेत्र में निवेश बढ़ाने की जरूरत 

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि चुनौतीपूर्ण अंतरराष्ट्रीय स्थिति के बावजूद, हमने कृषि क्षेत्र का उच्च विकास सुनिश्चित करने के लिए इस क्षेत्र में निवेश को बढ़ाने और आधुनिक तकनीकों को पेश किया है। हमने गरीबों और मध्यम वर्ग की मदद के लिए कई कदम उठाए हैं। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि वैश्विक स्तर पर उर्वरक की बढ़ती कीमतों के बावजूद, हमने अपने किसानों को इस तरह की कीमतों में बढ़ोतरी से बचाया है। बजट में 1.05 लाख करोड़ रुपये की उर्वरक सब्सिडी के अलावा, हमारे किसानों को आगे बढ़ाने के लिए 1.10 लाख करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि प्रदान की जा रही है। उन्होंने कहा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उर्वरकों के दाम बढ़ोतरी के बावजूद किसानों को सस्ती कीमतों पर खाद आपूर्ति के लिए खाद उर्वरकों पर सब्सिडी को डबल कर दिया गया हैं। उन्होंने यह भी बताया कि भारत में उर्वरक कीमतें पाकिस्तान और चीन जैसे पड़ोसी देशों की तुलना में बहुत कम हैं। अमेरिका, इंडोनेशिया और ब्राजील जैसे देशों की तुलना में भी कीमतें कम हैं। उन्होंने कहा, उर्वरक की कीमतों में किसी भी तरह की बढ़ोतरी को लेकर जो चिंता जताई जा रही है, वह बेवजह है।

देश में उर्वरक का आयात 

देश में उर्वरक का उत्पादन जरूरत से कम होता है। इसके कारण सभी प्रकार के उर्वरकों का आयात करना पड़ता है। खरीफ तथा रबी सीजन की सभी फसलों के लिए रासायनिक उर्वरक की आवश्यकता होती है। रासायनिक खादों में सबसे ज्यादा यूरिया का उपयोग किया जाता है। वर्ष 2020-21 के आंकड़ों पर नजर ड़ाले तो देश में यूरिया की 350.51 लाख टन, डीएपी 119.18 लाख टन, एनपीके 125.82 लाख टन तथा एमओपी 34.32 लाख टन की आवश्यकता थी। उर्वरक का उत्पादन जरूरत से कम होने के कारण आयातित उर्वरक का मूल्य अंतराष्ट्रीय बाजार के अनुसार रहता है। वर्ष 2020-21 में विभिन्न प्रकार के उर्वरक का आयात इस प्रकार है। यूरिया - 98.28 लाख टन , डीएपी - 48.82 लाख टन,  एनपीके - 13.90 लाख टन,  एमओपी- 42.27 लाख टन उर्वरक का आयात किया गया था। 

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