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फड़का कीट नियंत्रण : कृषि वैज्ञानिकों की सलाह आएगी काम, ये फॉर्मूला अपनाएं

फड़का कीट नियंत्रण : कृषि वैज्ञानिकों की सलाह आएगी काम, ये फॉर्मूला अपनाएं
पोस्ट - August 22, 2022 शेयर पोस्ट

बाजरे की फसल में कीट नियंत्रण के लिए कृषि अधिकारियों ने दी तकनीकी जानकारी

देश में धान सहित कपास, बाजरा, ज्वार, मक्का, मूंगफली और तिल जैसी फसलों की बुवाई का कार्य लगभग खत्म हो चुका हैं। खेतों में कपास, बाजरा, ज्वार, मक्का, मूंगफली, धान और तिल जैसी फसलें अभी गभ्भा अवस्था में है। इस बीच देश के शुष्क राज्यों में खरीफ फसल बाजरा, ज्वार में फड़का (कट्टा) कीट का प्रकोप दिखाई देने लगा है। इससे किसानों की बाजरे की फसल को काफी नुकसान हो रहा है। जिसको लेकर किसान काफी चिंतित है। फसल का जायजा लेकर कृषि अधिकारियों द्वारा फड़का कीट के नियंत्रण के लिए किसानों को आवश्यक तकनीकी बचाव के उपाय बताए जा रहे हैं। ताकि किसान प्रबंधन द्वारा रोग एवं कीटों से बाजरा, ज्वार की फसल को बचाकर पैदावार अधिक प्राप्त की जा सके। आइए, ट्रैक्टरगुरू के इस लेख में फड़का कीट नियंत्रण के संदर्भ में कृषि अधिकारियों द्वारा दी गई तकनीकी सलाह के बारे में जानते हैं।  

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सभी खरीफ फसलों को तेजी से नुकसान

कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि फड़का कीट खरीफ की लगभग सभी फसलों को अत्यंत भारी क्षति पहुंचाता है। यह सर्वभक्षी कीट है। इसकी शिशु (निम्न) एवं प्रौढ़ (वयस्क) दोनों अवस्था पौधों को हानि पहुंचाता है। जून-जूलाई, अगस्त में फड़का शिशु अवस्था में अंडों से बाहर निकलकर पौधों पर आ जाता है। वयस्क होने के बाद यह उड़कर अन्य स्थानों पर पहुंचकर फसलों को नुकसान पहुंचाने लग जाता है। कुछ समय में पौधों की पत्तियां खा जाने से सिर्फ तना बच जाता है। ऐसे में बाजरे के खेत में पौधों में सिट्टे का विकास ही नहीं हो रहा है। सिट्टे से ही बाजरा निकलता है। लेकिन अगर सिट्टा ही नहीं बनेगा तो फिर पौधे से बाजरा ही उत्पादित नहीं होगा। ऐसे में यह कीड़ा एक तरह से बाजरे के उत्पादन को ही नष्ट कर रहा है। यदि समय रहते किसानों ने इनकी रोकथाम नहीं की तो वयस्क होने पर यह फसलों की तेजी से नुकसान पहुंचाता है।

राजस्थान के किसान बाजरा, ज्वार में फड़का कीट से परेशान

इन दिनों राजस्थान के कई हिस्सों में खरीफ फसल पर फड़का कीट का प्रकोप छाया हुआ है। इससे किसानों की बाजरे की फसल को काफी नुकसान हो रहा है। जिसको लेकर किसान काफी चिंतित है। आलम ये है कि उन्हें इसकी वजह से नुकसान भी  झेलना पड़ रहा है। वहीं टोडाभीम के कई गांवों में बाजार, ज्वार पर फड़का कीट का प्रकोप छाया हुआ है। यहां के स्थानीय किसानों का कहना है कि खेत में बाजरे की खड़ी फसल को फड़का कीट चट करने में लगा है और सैकड़ों बीघा में फसल खराब हो गई है। ग्राम सेवा सहकारी समिति पर फड़का को नष्ट करने के लिए कीटनाशक भी उपलब्ध नहीं है। फसल का जायजा लेकर कृषि अधिकारियों ने किसानों को बचाव के उपाय बताए। इसी कड़ी में कृषि विभाग की टीम ने जयपुर स्थित कोटपूतली शहर में सर्वे किया और किसानों को बाजरे की फसलों को फड़का व कीट के प्रकोप से बचाने के आसान फॉर्मूला के बारे में बताया।

परेशान किसानों की मदद के लिए एडवाइजरी जारी

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार कृषि अधिकारी ने बताया कि खरीफ फसल बाजरा, ज्वार पर फड़का कीट का प्रकोप छाया हुआ है। जिसको लेकर किसान काफी चिंतित है। फिलहाल, सरकार इस समस्या से चिंतित है और उसने किसानों की मदद के लिए छूट पर कीटनाशक देने का फैसला किया है. ताकि इनसे किसान मुक्ति पा सकें और उनकी फसलें सुरक्षित हो। यही नहीं इससे बचाव के लिए एक एडवाइजरी भी जारी की गई है।  किसानों को सलाह दी गई है कि कीट का प्रकोप आर्थिक क्षति स्तर से अधिक होने पर कीटनाशी रसायनों का छिड़काव सुबह या शाम के समय खड़ी फसल में करें। 

ऐसे करें फड़का कीट का नियंत्रण

कृषि विभाग के एक सहायक कृषि अधिकारी ने बताया कि फड़का कीट मुख्यरूप से बाजरा, मक्का, ज्वार आदि फसलों को नुकसान पहुंचाता है। फड़का कीट का शिशु अवस्था में ही नियंत्रण कारगर है। किसान फड़का कीट नियंत्रण के लिए प्रकाश प्रपंच का उपयोग करें। खेत की समस्त डोर मेडों पर मेलाथियान 5 प्रतिशत या फेनवेलरेट 0.4 प्रतिशत चूर्ण का भुरकाव 25 किलो प्रति हेक्टेयर के हिसाब से करे।  इसके अतिरिक्त खेत के चारों तरफ विशेष तौर पर खरपतवार वाली जगह और अन्य स्थानों पर 30-35 सेंटीमीटर चौड़ी एवं 60 सेंटीमीटर गहरी खाइयां खोदें। किसान फड़का कीट नियंत्रण के लिए खरपतवार एवं खाइयों में क्लोरोपायरीफॉस 1.25 ली या प्रोफेनाफोस 1.25 ली. या डायक्लोरोवॉस 1 ली. प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करें। वही अगर सभी किसान भाई सामूहिक रूप से करे तो ही नियंत्रण जल्द संभव होता है। 

प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर किसानों को बताए उपाय

कृषि विभाग की टीम का कहना है कि राजस्थान के कुछ जिलों में खरीफ फसलों पर फड़का कीट का प्रभाव देख गया है। अभी कीट का प्रभाव प्रारंभिक अवस्था में है। प्रबंधन द्वारा रोग एवं कीटों से बाजार, ज्वार की फसल को बचाकर पैदावार बढ़ाया जा सकता है। राजस्थान कृषि विभाग द्वारा बाजार, ज्वार फसल में लगने वाले फड़का कीट के प्रकोप का निरंतर मॉनिटरिंग किया जा रहा है। किसानों से शिकायत प्राप्त होने पर त्वरित कार्रवाई की जा रही है। फड़का कीट से प्रभावित क्षेत्रों में किसान की शिकायत मिलने के बाद कृषि विभाग द्वारा प्रभावित क्षेत्रों की फसलों का जायजा लेकर कृषि अधिकारियों ने किसानों को बचाव के उपाय बताए। इसके अतिरिक्त सहायक कृषि अधिकारी ने किसानों को सावधानी बरतने की सलाह देते हुए कहा कि कीटनाशक का छिड़काव करते वक्त अपने बचाव के लिए पूरी तैयारी कर लें और अपने को बचाते हुए सावधानीपूर्वक छिड़काव करें।

किसान केंद्रों से दवा खरीदने पर 50 प्रतिशत सब्सिडी 

फड़का कीट के लिये काम में ली जाने वाली दवाओं को अगर किसान सेवा केंद्रों से खरीदते है तो दवाओं पर 50 प्रतिशत तक अनुदान कृषि विभाग द्वारा दिया जा रहा है। जिसका किसान दवा का बिल जरूर लेंवे।

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