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जैविक खेती : किसानों को सरकार देगी 1 लाख तक इनाम, जाने कहा करना है आवेदन

जैविक खेती : किसानों को सरकार देगी 1 लाख तक इनाम, जाने कहा करना है आवेदन
पोस्ट -02 दिसम्बर 2022 शेयर पोस्ट

Award to farmers : जैविक खेती करने वाले सर्वश्रेष्ठ किसानों को राजस्थान सरकार देगी अवॉर्ड 

भारत सरकार द्वारा देश में रासायनिक मुक्त खेती के लिए विभिन्न प्रयास किए जा रहे है। इन प्रयासों के माध्यम से देश में जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न प्रकार से आर्थिक सहायता दी जा रही है। देश की कई राज्य सरकारें भी भारत सरकार की इस योजना को बढ़ावा देने के लिए अपने स्तर पर प्रयास करती नजर आ रही है। हाल ही में राजस्थान सरकार ने भी राज्य में किसानों से ऑर्गेनिक और प्राकृतिक खेती की ओर रूख करने की अपील करते हुए एक नई पहल करने जा रही है। राज्य सरकार द्वारा किसानों को कैमिकल मुक्त फसल उत्पादन के लिए लगातार प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसके लिए सरकार की ओर से नेचुरल फार्मिंग योजना के माध्यम से आर्थिक सहायता भी दी जा रही है। अब राजस्थान सरकार राज्य में जैविक खेती करने वाले सर्वश्रेष्ठ किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए अवॉर्ड देने की तैयारी कर रही है। जिसमें सरकार की ओर से जैविक खेती में उत्कृष्ट कार्य करने वाले किसानों को एक-एक लाख रूपए की राशि इनाम स्वरूप दी जाएंगी। जैविक खेती में उत्कृष्ट कार्य करने वाले किसान 10 दिसंबर तक इस अवॉर्ड योजना में अपना देकर शामिल हो सकते है। तो आइए ट्रैक्टर गुरू के इस लेख के माध्यम से इस अवॉर्ड योजना में शामिल होने के लिए रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया के बारे में जानते है।

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तीन सर्वश्रेष्ठ किसानों को दिया जाएंगा अवॉर्ड

प्राकृतिक खेती (natural farming) के लिए किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए राजस्थान सरकार ने एक अनोखी पहल की है। राज्य में बड़े स्तर पर किसानों को प्राकृतिक खेती (natural farming) से जोड़ने के लिए सरकार द्वारा जैविक खेती अवॉर्ड योजना को चलाया जा रहा है। इस योजना के माध्यम से राज्य में जैविक खेती में उत्कृष्ट तरीके से खेती करने वाले तीन सर्वश्रेष्ठ किसानों को एक-एक लाख रूपए की राशि दी जाएंगी। मिली जानकारी के अनुसार जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में गठित कमेटी जिला स्तर पर प्राप्त होने वाले आवेदनों पर विचार करके एक सर्वश्रेष्ठ किसान का चयन करेगी । सरकार की इस पुरस्कार योजना में जैविक खेती करने वाले किसान 10 दिसंबर तक आवेदन कर सकते हैं। राजस्थान सरकार द्वारा शुरू की गई यह अवॉर्ड योजना भीलवाडा, बूंदी, चित्तौडगढ, डूंगरपुर, श्रीगंगानगर, जयपुर, अजमेर, अलवर, बांसवाडा, बाड़मेर, जैसलमेर, जालौर, झालावाड़, झुंझुंनू, जोधपुर, सवाई माधोपुर, टोंक, उदयपुर, बारां, करौली, कोटा, नागौर, पाली और सिरोही जिले में संचालित है।

जैविक खेती अवार्ड योजना में आवेदन के लिए पात्र किसान

मीडिया रिपोर्ट्स से मिली जानकारी के अनुसार राजस्थान उप निदेशक कृषि (विस्तार) डॉ. गुगन राम मटोरिया का कहना है कि राजस्थान सरकार की इस अवॉर्ड योजना में केवल वहीं किसान आवेदन के पात्र होगे, जो पांच वर्षो से कृषि उद्यानिकी फसलों में जैविक उत्पादन का कार्य कर रहा हो एवं कम से कम बीते दो वर्षो से निरंतर जैविक उत्पादों का प्रमाणिकरण करवा रहा हो, ऐसे किसानों को इस पुरस्कार योजना में प्राथमिकता दी जाएगी। वहीं,  जिन किसानों ने जैविक खेती के लिए स्वयं के खेत मे वर्मी कम्पोस्ट इकाई/कम्पोस्ट पिट बना रखा हो, तथा जैव कीटनाशक और जैव उर्वरक का प्रयोग स्वयं तैयार करके किया हो। इसके अलावा उचित फसल चक्र अपनाकर हरी खाद का उपयोग करता हो तथा जैविक खेती संबंधी किसी भी प्रकार की नई तकनीक या नवाचार कर जैविक उत्पादन लेता हो। साथ ही जो किसान राजकीय/निजी प्रमाणीकरण संस्था से प्रमाणित हो वही इस अवॉर्ड के लिए पात्र माना जाएगा। ऐसे किसान इस पुरस्कार के लिए अपने जिले के कृषि विभाग के कार्यालय में संपर्क कर आपना आवेदन कर सकते है और पुरस्कार से संबंधित जानकारी प्राप्त कर सकते है।

जैविक खेती अवॉर्ड के लिए कैसे करें आवेदन

डॉ. गुगन राम मटोरिया के द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक राजस्थान सरकार की ओर से चालू की गई अवॉर्ड योजना का उद्देश्य राज्य में प्राकृतिक खेती (जैविक खेती) को बढ़ावा देने है। राज्य में उत्कृष्ठ तरीके से जैविक खेती करने वाले सर्वश्रेष्ठ किसानों का चयन कर उन्हें पुरस्कार दिया जाएंगा। इस अवॉर्ड के लिए पात्र किसान 10 दिसंबर 2022 तक जैविक खेती पर किए गए अपने काम का पूरा विवरण, फोटो या वीडियो आवेदन फार्म के साथ अटैच कर उप निदेशक कृषि (विस्तार) कार्यालय बीकानेर में जमा करवाना होगा। वहीं, इस पुरस्कार संबंध में अधिक जानकारी के लिए अपने जिले के कृषि विभाग से संपर्क भी कर सकते हैं। 

क्या है जैविक खेती इससे मिट्टी की उर्वरकता कैेसे बढ़ती हैं?

बता दें कि कृषि में अधिक पैदावार लेने के लिए लम्बे समय से कृषि के क्षेत्र में रासायनिक खादों का अंधाधुंध इस्तेमाल किया जा रहा है। जिसके परिणाम स्वरूप भूमि की ऊपज शक्ति घटती जा रही है। तथा भूमि बंजर हो रही है। साथ ही पैदावार पर भी असर पड़ रहा है। हर साल पैदावार में गिरावट दर्ज की जा रही है। भूमि की समस्याओं से निजात पाने व भूमि की ऊपज शक्ति को बढ़ाने एवं कम लागत पर अधिक पैदावार के लिए प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसमें राष्ट्रीय सतत कृषि मिशन के अंतर्गत मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन का एक सविस्तारित घटक है। परम्परागत कृषि विकास योजना (पीकेवीवाई) के तहत जैविक खेती को क्लस्टर पद्धति और पीजीएस प्रमाणीकरण द्वारा प्रोत्साहित किया जाता है। किसानों को जैविक खेती करने के लिए क्लस्टर निर्माण, क्षमता निर्माण, आदनो के लिए प्रोत्साहन, मूल्यवर्धन और विपरण के लिए आर्थिक सहायता दी जा रही है। जैविक खेती में रासायनिकों का इस्तेमाल नहीं होता है। इसमें बाहरी लागत की मदद के बिना जैविक खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। जैविक खेती का मुख्य आधार देसी गाय है। जैविक खेती (जीरो बजट फार्मिग) कृषि की प्राचीन पद्धति है। यह भूमि के प्राकृतिक स्वरूप को बनाए रखती है। इस प्रकार की खेती में जो तत्व पूर्व रूप से प्रकृति में पाए जाने वाले जैव खाद, जैव कीटनाशक, जैव उर्वरक को काम में लिया जाता है।

रंग लाने लगी जैविक खेती योजना

भूमि की ऊपज शक्ति को बढ़ाने एवं कम लागत पर गुणवत्ता युक्त अधिक पैदावार हासिल करने के लिए प्रधानमंत्री मोदी ने नेचुरल फार्मिंग योजना को साल 2015-16 में शुरू किया। इस योजना का उद्देश्य जैविक उत्पादों के प्रमाणीकरण और विपणन को प्रोत्साहन करना है। केंद्र सरकार कि केमिकल मुक्त खेती के लिए शुरू यह योजना रंग लाने लगी है। अब तक देश में ऑर्गेनिक फार्मिंग से 44 से अधिक लाख किसान जुड़ चुके हैं, जबकि 2003-04 में भारत में महज 76 हजार हेक्टेयर में ही ऐसी खेती हो रही थी। केंद्र सरकार की इस योजना को और अधिक सफल बनाने के लिए देश की राज्य सरकारें अपने स्पर पर कई प्रयास भी कर रही है। केंद्र की इस योजना के तहत अब तक 4.09 लाख हेक्टेयर क्षेत्र कवर किया जा चुका है।

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