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न्यूनतम समर्थन मूल्य : सरकार ने मूंग, मूंगफली बेचने के लिए पंजीयन सीमा बढ़ाई, ऐसे करें रजिस्ट्रेशन

न्यूनतम समर्थन मूल्य : सरकार ने मूंग, मूंगफली बेचने के लिए पंजीयन सीमा बढ़ाई, ऐसे करें रजिस्ट्रेशन
पोस्ट -15 दिसम्बर 2023 शेयर पोस्ट

सरकार ने इन दो फसलों की पंजीयन सीमा बढ़ाई, रजिस्ट्रेशन के लिए जरुरी होगें ये दस्तावेज

न्यूनतम समर्थन मूल्य :  देश के कई राज्यों में अभी सरकार द्वारा न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी एमएसपी पर किसानों की फसल को खरीदा जा रहा है। इसके लिए किसानों को अपने राज्य के कृषि विभाग के पोर्टल पर अपना पंजीयन करना होता है। न्यूनतम समर्थन मूल्य पर किसानों से फसल उपज खरीदने के लिए अलग-अलग राज्य सरकारों द्वारा अपने किसानों का पंजीयन कराया भी जा चुका है और उनसे एमएसपी पर खरीफ फसलों की खरीदी का काम भी चल रहा है। इस बीच राजस्थान राज्य के किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी है। राज्य में अधिक से अधिक किसानों को समर्थन मूल्य का लाभ मिल सके, इसके लिए राज्य सरकार ने मूंगफली और मूंग के लिए पंजीकरण क्षमता को 90 प्रतिशत से बढ़ाकर शत-प्रतिशत यानी 100 प्रतिशत कर दिया है। दरअसल, राज्य में न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीफ फसलों की खरीद के लिए किसानों के पंजीयन का लक्ष्य पूरा किया जा चुका है। इसके बाद भी अधिक से अधिक किसानों को समर्थन मूल्य का लाभ मिले, इसके लिए राजस्थान सरकार ने पंजीकरण क्षमता को बढ़ाने का फैसला किया है, जिससे राज्य के कई हजारों किसानों को फायदा होगा।  

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पंजीकरण क्षमता बढ़ाने से कितने किसानों को फायदा होगा?

इस फैसले के संबंध में राजफेड के प्रबंध निदेशक संदेश नायक ने बताया कि राजस्थान में खरीफ सीजन के लिए जिन केन्द्रों पर मूंग और मूंगफली की पंजीयन क्षमता पूर्ण हो चुकी है, वहां के लिए 20 प्रतिशत अतिरिक्त पंजीयन सीमा बढ़ाई गई है। इस फैसले से पूरे राजस्थान में करीब 29 हजार से अधिक किसानों को फायदा मिलेगा। प्रबंध निदेशक ने कहा कि अब बढ़ी हुई पंजीयन सीमा का लाभ किसानों को मिल सकेगा। ऐसे में जो किसान अभी तक अपना पंजीयन नहीं करा पाए हैं वे किसान पंजीयन कराकर अपनी उपज को खरीद केंद्र पर एमएसपी पर बेच सकते हैं। किसान पंजीयन सीमा बढ़ाने पर मूंग के लिए 12,731 और मूंगफली के लिए 17,025 किसान अपना रजिस्ट्रेशन करा सकेंगे। इस प्रकार कुल 29,756 अतिरिक्त किसान पंजीयन करा सकेंगे।

एमएसपी पर फसल बेचने के लिए अब तक कितने किसानों ने कराया पंजीयन

प्रबन्ध निदेशक संदेश नायक ने बताया कि दलहन-तिलहन खरीद की कुल सीमा भारत सरकार की तरफ से  स्वीकृत लक्ष्य तक ही सीमित रहेगी। मूंग, उड़द, मूंगफली एवं सोयाबीन की समर्थन मूल्य पर जारी खरीद में अब तक मूंग के लिए 32,945 किसानों द्वारा एवं मूंगफली के लिए 9,443 किसानों द्वारा पंजीकरण करवाया है। इस तरह अब तक राज्य में कुल 42,388 किसानों ने अपना पंजीयन कराया है। राजफेड के प्रबन्ध निदेशक ने बताया कि अब तक 5584 किसानों से 11,487 मीट्रिक टन मूंग एवं मूंगफली की खरीद की जा चुकी है। जिसकी धनराशि लगभग 98 करोड़ रुपए है। उड़द एवं सोयाबीन के बाजार भाव समर्थन मूल्य दर से ज्यादा होने के कारण किसानों द्वारा समर्थन मूल्य (MSP) पर इन फसलों को नहीं बेचा जा रहा है।

समर्थन मूल्य पर फसल बेचने के लिए किसान इस तरह करें अपना पंजीयन

मूंग एवं मूंगफली समर्थन मूल्य खरीद योजना का लाभ लेने के लिए किसान ई- मित्र के माध्यम से  निम्नलिखित आवश्यक दस्तावेजों को जमा करा सकते हैं। इसमें किसान ई-मित्र के माध्यम से गिरदावरी, बैंक पासबुक, आधार-कार्ड के साथ जैसे आवश्यक दस्तावेजों से अपना पंजीकरण करा सकते हैं। पंजीयन के पश्चात किसानों को उनकी उपज तुलाई के लिए तारीख आवंटित की जाएगी।

संदेश नायक ने बताया कि किसान दलहन एवं तिलहन उपज को सुखाकर और साफ-सुथरा कर वांछित नमी की मात्रा के अनुरूप तुलाई केन्द्रों पर लेकर जाएं। वहीं, सरकार ने किसानों की समस्या के समाधान के लिए किसान हेल्पलाइन नम्बर 1800-180-6001 जारी किया हुआ है, जहां किसान संपर्क कर अपनी किसी भी प्रकार की समस्या का निराकरण करवा सकते हैं।  

न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) क्या है?

किसानों को उनकी फसलों का उचित मूल्य मिले, इसके लिए केंद्र सरकार CACP यानी कमीशन फॉर एग्रीकल्चर कॉस्ट एंड प्राइजेस की सिफारिश पर फसल सीजन उपज के लिए मिनिमम सपोर्ट प्राइज (एमएसपी) यानी न्यूनतम समर्थन मूल्य तय करती है। केंद्र सरकार द्वारा इस तय न्यूनतम समर्थन मूल्य पर राज्य की सरकारें अपने -अपने राज्य में किसानों से उनकी फसलों की उपज खरीदती है। बता दें कि समर्थन मूल्य (MSP) से लाभ यह है कि मार्केट में फसलों की कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव के बावजूद भी किसानों को उनकी उपज का लाभकारी मूल्य मिलता है यानी उन्हें उपकी उपज का गारंटेड मूल्य मिलता रहता है। 

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