एकीकृत खेती : किसानों को दिया जा रहा है एकीकृत खेती का प्रशिक्षण, जल्दी यहां करें संपर्क

एकीकृत खेती : किसानों को दिया जा रहा है एकीकृत खेती का प्रशिक्षण, जल्दी यहां करें संपर्क
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किसानों को दिया जा रहा है एकीकृत खेती का प्रशिक्षण, एक खेत से कर सकेंगे साल भर कमाई

Integrated farming system : किसान अपनी आमदनी में वृद्धि कर सकें, इसके लिए अलग-अलग राज्य सरकारों द्वारा किसानों को विभिन्न योजनाओं के तहत लाभान्वित किया जा रहा है। इसके तहत किसानों को उन्नत खेती के लिए प्रोत्साहित करने के लिए कृषि यंत्रों पर अनुदान के लाभ से लेकर तकनीकी खेती एवं पशुपालन के लिए विभिन्न कृषि संस्थानों से प्रशिक्षण भी दिया जाता है। ऐसे में झारखंड राज्य सरकार अपने किसानों को राहत पहुंचाने और उनकी आय बढ़ाने के लिए कई प्रयास करती दिखाई दे रही है। 

इसी क्रम में राज्य पशुपालन विभाग द्वारा एक विशेष पहल करते हुए राज्य के किसानों को तकनीकी खेती (Technical Farming) का प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिससे किसान अपनी आय बढ़ा सकें। दरअसल, पशुपालन विभाग की तरफ से झारखंड में किसानों को एकीकृत खेती (Integrated farming) का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। किसानों को यह ट्रेनिंग अलग-अलग कार्यशाला के माध्यम से दी जा रही है। एकीकृत कृषि प्रणाली सीख जाने के बाद ना सिर्फ उत्पादन बढ़ेगा, बल्कि कृषि में लागत कम कर किसान अपना मुनाफा बढ़ा सकेगा। साथ ही एक ही खेत से पूरे सालभर कमाई कर सकेगा। इच्छुक किसान इन कार्यशालाओं में शामिल होकर कई तरह की फसलों की खेती के अलावा विभिन्न प्रकार की कृषि संबंधित गतिविधियों के बारे में जानकारी हासिल कर सकेंगे।

मुनाफे को दोगुना कर सकते हैं किसान (Farmers can double their profits)

जिला पशुपालन अधिकारी के अनुसार, पशुपालन विभाग की ओर से किसानों को जागरूक करने के लिए नियमित रूप से कार्यशालाओं का आयोजन किया जा रहा है। एकीकृत खेती (Integrated farming) एक विश्वसनीय तरीका है, इसके माध्यम से किसान अपने मुनाफे को दोगुना कर सकते हैं। इतना ही नहीं एकीकृत कृषि प्रणाली में सबसे बड़ा लाभ यह है कि यदि किसी प्राकृतिक आपदा के कारण एक फसल पूरी तरह से नष्ट या खराब हो जाती है, तब भी किसानों के पास अन्य दूसरी चीजों से लाभ कमाने का विकल्प मौजूद रहेगा। इससे किसानों को पूरी तरह से नुकसान कभी नहीं होगा और किसानों के पास बेहतर आजीविका का एक बेहतर विकल्प पूरे साल मौजूद रहेगा।

किसान यहां कर सकते हैं संपर्क (Farmers can contact here)

जिला अधिकारी ने बताया कि राज्य के किसानों की आय बढ़ाने के लिए पशुपालन विभाग की तरफ से कई योजनाएं भी चलाई जा रही है, जिसके तहत सुअर पालन विकास योजना, बैल जोड़ी वितरण योजना और अन्य कई योजना शामिल हैं। योजनाओं के अंतर्गत राज्य सरकार दूध निकालने के लिए विशेष मशीनें भी उपलब्ध कराती है, जिसका लाभ किसानों को मिल रहा है। वर्तमान में एकीकृत खेती (Integrated farming) प्रणाली इसलिए अच्छी मानी जा रही है, क्योंकि बदलते मौसम और बेमौसमी गतिविधियों से किसानों को नुकसान का सामना करना पड़ता है। लेकिन यदि किसान एकीकृत खेती करते हैं, तो वो मौसम की मार से बच सकते हैं। एकीकृत खेती प्रशिक्षण और पशुपालन विभाग की योजनाओं से संबंधित अधिक जानकारी के लिए किसान रांची स्थित पशुपालन एवं मत्स्य पालन विभाग से संपर्क कर सकते हैं।

क्या हैं एकीकृत कृषि प्रणाली? (What is an Integrated Farming System ?)

एकीकृत खेती या एकीकृत कृषि प्रणाली (Integrated Farming System) के बारे में किसानों को जानकारी देते हुए अशोक कुमार ने कहा कि एकीकृत खेती कृषि की एक ऐसी प्रणाली है, जिसमें कृषि को पशुधन के साथ एकीकृत किया जाता है। इस कृषि प्रणाली (Farming System) के तहत किसान एक खेत में 10 अलग-अलग कार्य जैसे पशुपालन में गाय-भैंस का पालन, बकरी पालन (Goat farming), मुर्गीपालन (Poultry), बतख पालन (Duck farming) और मछली पालन (Fish Farming) को एक ही स्थान पर  करते हैं और अतिरिक्त आय प्राप्त कर सकते हैं। वहीं, अलग-अलग प्रकार की अन्न एवं सब्जी फसलों की मिश्रित खेती कर सकते हैं। एकीकृत खेती (Integrated Farming) में यदि फसल बर्बाद या नष्ट भी हो जाती है, तो किसान पशुधन से पैसा कमा सकते हैं। यह कृषि एक ऐसा प्रारूप है, जिसमें किसान को एक ही खेत से पूरे साल भर कुछ ना कुछ आय प्राप्त होती रहती है। किसान इस कृषि प्रणाली (Farming System) के तहत मोटे अनाज जैसे बाजार, ज्वार, रागी, कोदो की भी खेती कर सकते हैं। इससे किसान अपने पशुधन के लिए हरा चारा और दाने की आपूर्ति कर सकते हैं।

एकीकृत कृषि प्रणाली से लाभ (Benefits of Integrated Farming System)

एकीकृत कृषि प्रणाली को देश के किसानों की आय बढ़ाने का सबसे उपयुक्त माध्यम पाया गया है। एकीकृत कृषि प्रणाली एक संपूर्ण कृषि प्रबंधन प्रणाली है, जिसका उद्देश्य अधिक टिकाऊ कृषि प्रदान करना है। यह कृषि प्रणालियों में पशुधन और फसल उत्पादन काे एकीकृत करती है। इस कृषि प्रणाली (Farming System) ने पशुधन, जलीय कृषि, बागवानी, कृषि-उद्योग तथा संबद्ध गतिविधियों की पारंपरिक खेती में क्रांति ला दी है।  इस प्रणाली में पशुपालन के साथ की जाने वाली खेती किसान परिवार के सदस्यों को सालभर अतिरिक्त आय और रोजगार के अवसर प्रदान करती है। साथ ही पशुओं के मलमूत्र को खाद के रूप में उपयोग करने से उर्वरकों की लागत भी कम हो जाती है और मिट्टी की उर्वरता सुरक्षित रहती है। पशुओं के चारे के रूप में उपयोग किए जाने वाले फसल अवशेषों से चारे की लागत कम हो जाएगी। इस प्रकार की कृषि के साथ-साथ चारा और एजोला उत्पादन के साथ पशुपालन से भी अधिक लाभ मिलेगा और आय में वृद्धि होती है। 

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