कृषि भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। कृषि पर ही देश के उद्योग धंधे, व्यापार, यातायात एवं संचार के साधान निर्भर होते है। सरकार कृषि क्षेत्र से प्रत्यक्ष और तात्कालिक लगाव रखती है। कृषि क्षेत्र के विकास के लिए हर संभव प्रयास करती है। कृषि क्षेत्र में किसानों को सिंचाई संबंधित किसी प्रकार की कोई समस्या न हो इसके लिए केन्द्र सरकार द्वारा प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना संचालित है। योजना के तहत किसानों को सिंचाई के लिए उपकरण खरीदने पर होने वाले खर्च पर सब्सिडी दी जाती है।
पिछले कुछ दशकों गिरते जल स्तर समस्या से देश के कई राज्य जूझ रहे हैं। गिरते जल स्तर समस्या को देखते हुए उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने राज्य में किसानों को खेती में सिंचाई पद्धति में बदलाव करने की अपील की है। कृषि क्षेत्र में भूमिगत जल का दोहन कम हो और कम पानी से अधिक उत्पादन प्राप्त कर सके और पानी की एक-एक बूंद का सही इस्तेमाल हो सके। इसके लिए यूपी की योगी सरकार प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत अलग-अलग सिंचाई यंत्रों के माध्यम से किसानों को उन्नतिशील बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
किसानों को इससे जोड़ने के लिए अनुदान देने का प्रविधान शुरू किया गया है। इसमें किसानों को 90 प्रतिशत तक का अनुदान दिया जाएगा। “पर ड्राप मोर क्राप माईक्रोइरीगेशन योजना” के लिए शासन ने किसानों का चयन करने के लिए उद्यान विभाग को आदेश जारी किया है। आदेश जारी होने के बाद विभाग ने किसानों का पंजीयन कराने की कवायद शुरू कर दी है। योजना के तहत सिंचाई उपकरण के लिए सरकार की ओर से आवेदन मांगे गए हैं। इच्छुक किसान इस योजना में आवेदन करके सिंचाई उपकरणों की खरीद पर सब्सिडी प्राप्त कर सकते हैं। अनुदान की राशि किसानों को डीबीटी के माध्यम से दी जाएगी। आइए ट्रैक्टर गुरू के इस लेख के माध्यम से योजना के बारे में जानते हैं।
प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना की शुरुआत वर्ष 2015 में देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किसानों को लाभ पहुंचाने के लिए की गई है। इस योजना के अंतर्गत देश के किसानों को अपने खेतों की सिंचाई के लिए उपकरणों के लिए सब्सिडी प्रदान की जाएगी। यह सब्सिडी किसानों को उन सभी योजनाओं के लिए भी प्रदान की जाएगी। जिसमें पानी की बचत, कम मेहनत और साथ ही खर्चे की भी सही तरह से बचत हो सकेगी। जिससे किसानों को अपने खेतों में सिंचाई करने में सुविधा होगी। अब इस योजना के माध्यम से खेती करने के लिए किसानों को पानी की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा।
उत्तर प्रदेश सरकार राज्य में कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों को बढ़ावा देने हेतु प्रधानमंत्री सिंचाई योजना के तहत किसानों को सिंचाई उपकरणों पर सब्सिडी उपलब्ध करने के लिए ड्राप क्राप माईक्रो इरीगेशन योजना को संचालित कर रही है। यूपी की योगी सरकार ने अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं महिला किसानों को पानी का समुचित एवं अधिकतम उपयोग कर कम पानी से अधिक उत्पादन लेने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग उ०प्र० द्वारा ’’पर ड्राप मोर क्राप’’-माइक्रोइरीगेशन योजना के अन्तर्गत वित्तीय वर्ष 2022-23 के लिए एटा जनपद हेतु लक्ष्यों का आवंटन कर दिया गया है। जिसमें ड्रिप सिंचाई/मिनी स्प्रिंकलर हेतु बागवानी एवं कृषि फसलों में 767 हेक्टर और स्प्रिंकलर सिंचाई हेतु बागवानी एवं कृषि फसलों में 810 हेक्टयर का भौतिक लक्ष्य निर्धारित किया गया है। जिसके अन्तर्गत उद्यान विभाग द्वारा ड्रिप व मिनी स्प्रिंकलर में लघु एवं समीन्त कृषकों को 90 प्रतिशत व अन्य कृषकों को 80 प्रतिशत का अनुदान और पोर्टेबल स्प्रिंकलर एवं रेनगन हेतु लघु एवं सीमान्त कृषकों को 75 प्रतिशत व अन्य कृषको को 65 प्रतिशत का अनुदान उपलब्ध कराया जा रहा है।
जानकारी के लिए बता दें कि अगर फसल को उचित मात्रा में पानी नहीं मिलेगा तो वह खराब हो जाती है। जिससे किसानों को भी बहुत ही नुकसान उठाना पड़ता है। राज्य के हर खेत को पानी” मिले इस उद्देश्य से योगी सरकार ने ’’पर ड्राप मोर क्राप’’-माइक्रोइरीगेशन योजना को शुरू किया है। इस योजना के माध्यम से ज्यादा बल जल संसाधनों को अधिकतम उपयोग पर हैं, ताकि बाद और सूखे के आवेग से होने वाले नुकसान की रोकथाम की जा सके। बागवानी एवं कृषि फसलों में ड्रिप एवं स्प्रिंकलर सिंचाई पद्धति को अपनाकर गुणवत्तायुक्त उत्पादन एवं उत्पादकता में वृद्धि करना एवं पौधों की उम्र एवं आवश्यकता के अनुसार जल का प्रयोग कर दिन-प्रतिदिन जल स्तर में हो रहे कमी के दृष्टिगत भूजल संचयन को बढ़ावा दिया जा सकें। ऐसा करने से उपलब्ध संसाधनों का कुशल उपयोग हो सकेगा और साथ ही किसानों को अधिक पैदावार मिलेगी। और किसानों की आय में भी बढ़ोतरी होगी ।
सरकार द्वारा किसानों को लाभ पहुंचाने के लिए एवं उनकी आय में वृद्धि करने के लिए ’’पर ड्राप मोर क्राप’’-माइक्रोइरीगेशन योजना को आरंभ किया गया हैं।
इस योजना को शुरू करने का मुख्य उद्देश्य राज्य के सभी खेतों में सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध करवाना हैं।
सरकार इस योजना के अंतर्गत पानी के सोर्स जैसे कि जल संचयन, भूजल विकास आदि का निर्माण करवाएगी।
इसी के साथ यदि किसान द्वारा सिंचाई के उपकरण खरीदे जाते हैं तो उनको सब्सिडी भी प्रदान की जाएगी।
सरकार द्वारा इस योजना के माध्यम से ड्रिप सिंचाई, स्प्रिंकलर सिंचाई आदि को भी बढ़ावा दिया जाएगा।
किसानों को इससे जोड़ने के लिए अनुदान देने का प्रावधान किया गया है। इसमें किसानों को 90 प्रतिशत तक का अनुदान दिया जाएगा।
पर ड्राप मोर क्राप माईक्रोइरीगेशन योजना के लिए शासन ने किसानों का चयन करने के लिए उद्यान विभाग को आदेश जारी किया है। इसमें सरकार ने कहा कि प्रधानमंत्री सिंचाई योजना में लघु सीमांत श्रेणी सहित अन्य तरह के किसानों का चयन किया जाए।
बिना पंजीकरण के किसानों को इस योजना से लाभांवित नहीं किया जा सकता है।
इसमें टपक सिंचाई पद्धति योजना के साथ ही अन्य तरह से फसल की सिंचाई के लिए उपकरण मुहैया कराए गए हैं।
सरकार ने उद्यान विभाग को 885 हेक्टेयर जमीन का लक्ष्य दिया है।
पर ड्राप मोर क्राप माईक्रोइरीगेशन योजना के तहत किसानों को श्रेणी के हिसाब से अनुदान दिया जाएगा। अनुदान की राशि किसानों को डीबीटी के माध्यम से दी जाएगी
इस योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर आवेदन करना होगा।
पर ड्राप मोर क्राप माईक्रोइरीगेशन योजना का लाभ सभी वर्ग के कृषकों उठा सकते हैं।
योजना का लाभ प्राप्त करने हेतु इच्छुक कृषक के पास स्वयं की भूमि एवं जल स्रोत उपलब्ध हों।
पर ड्राप मोर क्राप माईक्रोइरीगेशन योजना का लाभ सहकारी समिति के सदस्यों, सेल्फ हेल्प ग्रुप, इनकार्पोरेटेड कम्पनीज, पंचायती राज संस्थाओं, गैर सहकारी संस्थाओं, ट्रस्ट्स, उत्पादक कृषकों के समूह के सदस्यों को प्रदान किया जायेगा।
इस योजना का लाभ ऐसे कृषकों/संस्थाओं को दिया जाएगा, जो संविदा खेती (कान्टै्क्ट फार्मिंग) अथवा न्यूनतम 07 वर्ष के लीज एग्रीमेन्ट की भूमि पर बागवानी/खेती करते हैं।
एक लाभार्थी कृषक /संस्था को उसी कृषि भूमि पर दूसरी बार 7 वर्ष के पश्चात ही योजना का लाभ दिया जाएगा। लाभार्थी कृषक अनुदान के अतिरिक्त अवशेष धनराशि स्वयं के स्रोत से अथवा ऋण प्राप्त कर वहन करने हेतु सक्षम व सहमत हों।
योजना की जानकारी हर किसान तक पहुंचाने के लिए आधिकारिक पोर्टल uphorticulture.gov.in स्थापित किया गया है। यहाँ पर योजना से सम्बंधित हर जानकारी विस्तारपूर्वक तरीके से बताई गई है। पंजीकरण या आवेदन के लिए इच्छुक लाभार्थी कृषक किसान जिले के कृषि विभाग से संपर्क कर सकते हैं। पंजीकरण के लिए आधार कार्ड, भूमि की पहचान हेतु खतौनी एवं अनुदान की धनराशि के अन्तरण हेतु बैंक पासबुक के प्रथम पृष्ठ की छाया प्रति अनिवार्य है।
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