थ्रेशर चलाते समय किसान इन 10 बातों का रखें ध्यान, नहीं होगी कोई दुर्घटना

थ्रेशर चलाते समय किसान इन 10 बातों का रखें ध्यान, नहीं होगी कोई दुर्घटना
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थ्रेसर से मढ़ाई करते समय इन विशेष सावधानियों और सुझाव का रखें ख्याल, जानें पूरी डिटेल्स

Precautions and Suggestions in Thresher Operation : देश में कृषि को फायदे का सौदा बनाने के लिए कृषि भूमि की तैयारी, बीजों की बुआई-रोपण, सिंचाई और फसल कटाई के बाद प्रबंधन जैसे विभिन्न कृषि कार्यों के लिए कृषि मशीनरी के उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है, ताकि किसान खेती कार्य को सही समय पर पूरा करके लाभ कमा सके। इस बीच देश में रबी फसलों की कटाई का समय चल रहा है, जिसको देखते हुए मध्यप्रदेश समेत कई अन्य राज्य सरकारों द्वारा कटाई और कटाई के बाद के प्रबंधन कार्य के लिए उपयोगी कृषि यंत्रों जैसे मल्टीक्रॉप थ्रेसर (Multicrop Thresher), रिवर्सिबल एमबी प्लाऊ व स्ट्रॉ रीपर (Straw Reaper) अनुदान पर दिए जा रहे हैं। 

वहीं कई राज्यों में किसानों द्वारा रबी की प्रमुख फसल गेहूं की मड़ाई तथा ओसाई का कार्य थ्रेशर मशीन (Thresher Machine) की मदद से किया जा रहा है। थ्रेशर पर काम करते समय किसान भाईयों को कुछ आवश्यक सावधानियां का ध्यान रखने की जरूरत होती है। इन जरूरी बातों का ध्यान रखकर किसान भाई थ्रेशर संचालन के दौरान होने वाली बड़ी दुर्घटना और जनहानि से बच सकते हैं। थ्रेशर (Thresher) से अनाज निकालते समय अगर किसान इन बातों का ध्यान रखे तो फसल से अनाज और भूसा अलग करने के काम को सुरक्षित तरीके से पूरा किया जा सकता है। आइए, इस पोस्ट की मदद से जानें कि थ्रेशर (Thresher) संचालन के समय किसान भाईयों को किन-किन सावधानियों को ध्यान रखने की आवश्यकता है।

थ्रेशर मशीन क्या है? (What Is Thresher Machine ?)

पहले तो यह जानना बेहद जरूरी है कि आखिर थ्रेशर मशीन है क्या। दरअसल, थ्रेशर (Thresher) फसल से अनाज के दाने और भूखा अलग करने की मशीन है। इसकी मदद से किसान भाई बहुत ही कम लागत, श्रम और समय में फसलों की मढ़ाई का कार्य संपन्न कर सकते हैं। बता दे कि मढ़ाई प्रक्रिया फसलों की बालियों या फलियों से दोनों को अलग करने को कहा जाता है। थ्रेशर (Thresher) से फसल की कटाई के बाद फसल से अनाज के दानों को अलग करने के लिए मड़ाई और ओसाई दोनों कार्य को एक साथ संपन्न किया जाता है। वर्तमान में किसानों द्वारा थ्रेसर मशीन का इस्तेमाल फसलों से साफ और गुणवत्तापूर्ण अनाज  प्राप्त करने के लिए खूब किया जाता है। थ्रेशर मशीन (Thresher Machine) कई अलग-अलग पार्ट्स से मिलकर बनी होती है, जिसमें अलग-अलग कार्य होते हैं। थ्रेशर के यह सभी हिस्से लोहे के बने एक फ्रेम पर लगे होते हैं, जिनमें फीडिंग इकाई, मड़ाई करने वाली इकाई, अनाज के दाने और भूसा अलग करने वाली इकाई, अनाज के दानों को साफ करने वाली इकाई, अनाज भरने और तोलने वाली इकाई एवं शक्ति स्थानांतरण इकाइयां शामिल होती है। इन सभी इकाइयों का अलग-अलग काम होता है, जिसकी मदद से फसल की थ्रेशरिंग प्रोसेस का कार्य पूरा किया जाता है।

थ्रेशर संचालन के समय होने वाली दुर्घटनाएं (Accidents occurring during thresher operation)

आज कृषि बाजारों में किसानों की सुरक्षा और सुविधा के अनुसार कई उन्नत तकनीक आधारित आई० एस० आई० मार्क के मल्टीक्रॉप थ्रेशर उपलब्ध है। इनमें बीटर टाइप, स्पाइक टूथ सिलेंडर टाइप, एक्सियल फ्लो टाइप, ऑस्सीलेटिंग स्ट्रा वाकर टाइप (मल्टी क्रॉप थ्रेसर) शामिल है। वर्तमान समय में किसानों के बीच ड्रमी टाइप और एस्पोरेटर टाइप थ्रेसर ज्यादा प्रचलित है। थ्रेशर फसलों को उनके पुआल और भूसे से अलग करने के कामों में किसानों की मेहनत और पैसों की बचत कर खेती की लागत कम करता है। लेकिन थ्रेशर से फसल की मड़ाई करते समय किसानों कई प्रकार की दुर्घटनाओं के शिकार होते हैं। इसके पीछे का कारण थ्रेशर संचालन की उचित जानकारी का अभाव व असुरक्षित तरीके स मशीन (Machine) का उपयोग है। एक सर्वे रिपोर्ट के अनुसार, थ्रेसर पर काम करते समय लगभग 73 प्रतिशत घटने वाली दुर्घटना में मानवीय गलती, 13 प्रतिशत मशीनी कारणों और शेष 14 प्रतिशत दुर्घटनाएं धूम्रपान या अन्य कारणों से होती है। 

थ्रेशर मशीन खरीदते समय इन बातों का रखें ध्यान

आई० एस० आई० मार्क थ्रेशर का चुनाव : किसानों को हमेशा आई० एस० आई० मार्क वाले थ्रेशर मशीन (Thresher Machine) का चुनाव करना चाहिए।

डिजाइन और क्वालिटी मानकों का रखें ध्यान : थ्रेसर के इस्तेमाल और इसे खरीदते समय इसके मजबूत डिजाइन और क्वालिटी मानकों का विशेष ध्यान रखें। सस्ते और हल्की मानकों के थ्रेसर खरीदने से बचे।

पुली व पट्टे : थ्रेशर खरीदते समय ध्यान दें कि थ्रेशर (Thresher) के घूमने वाले कलपुर्जे जैसे पुली व पट्टे सही तरीके से गाईस/आवरण लोहे की मोटे तार की जाली से ढंकें हों।

थ्रेसर साइज के अनुरूप मोटर या इंजन एचपी : थ्रेसर में आने वाली मोटर एवं इंजन की एचपी पावर के बारे में अच्छे से पता करें कि वह थ्रेसर साइज के अनुरूप है या नहीं।

सर्टिफाइड निर्माता से खरीदें : सरकार द्वारा निर्धारित मानकों को पूरा करने वाले और सर्टिफाइड कृषि उपकरण निर्माता से ही थ्रेशर मशीन (Thresher Machine) खरीदें।

डिजाइन का रखें ध्यान : थ्रेसर खरीदते समय ध्यान दें कि थ्रेशर डिजाइन में फसल लगाने वाले पतनाले पर ध्यान दें कि पतनाले की लंबाई, चौड़ाई  आई.एस. 9020-2002 के अनुरूप डिजाइन की गई है या नहीं।भरण नाली की लंबाई कम से कम 900 मिमी और चौड़ाई (ड्रम के मुंह पर) कम से कम 220 मिमी तथा यह ऊपर से 45 सेमी. कवर है या नहीं। पतनाला घेतर के साथ 5 डिग्री कोन पर ऊपर की तरफ उठा हुआ ढलानदार है या नहीं और ढंके हुए भाग का उठाव 10-30 डिग्री है या नहीं।

थ्रेशर पर काम करते समय किसान रखें इन सावधानियों का ध्यान

थ्रेशर पर काम करते समय किसान भाई को जागरूक बनाने और कुछ जरूरी सावधानियों का ध्यान रखने की आवश्यकता है। किसान नीचे दी जा रही बातों का ध्यान और सावधानी बरत के थ्रेशर (Thresher) संचालन को सुरक्षित बना सकते हैं। 

  • कटाई के बाद फसल दौनी या मड़ाई के कामों में थ्रेसर के इस्तेमाल के लिए खेतों या अन्य भूमि में समतल जगह पर ही थ्रेसर मशीन को लगाए।
  • थ्रेसर पर काम करते समय मशीन में कंपन कम हो तथा पट्टे में उचित तनाव बना रहे, इसके लिए मशीन के चारों पैरों को जमीन में खोदकर या लकड़ी के खूटें गाड़कर बांध दें।
  • मड़ाई के ए थ्रेसर मशीन को बहने वाली हवा दिशा में ही लगाना चाहिए। इससे दौनी का कार्य सुविधाजनक और सुरक्षित भी होगा, क्योंकि भूसा, धोती, कपड़े उसी दिशा में उड़ेगा जिस दिशा में हवा बह रही है।
  • थकावट होने पर थ्रेशर मशीन (Thresher Machine) का संचालन कुछ देर के लिए को रोक दें।
  • थकान की दशा में थ्रेशर मशीन पर कार्य नहीं करना चाहिए, खास-कर फसल शूट भराई का कार्य तो कदापि नहीं करें।
  • थ्रेशर के भराई शूट की ऊंचाई अपनी कोहनी की ऊंचाई के बराबर रखनी चाहिए।
  • थ्रेशर मशीन (Thresher Machine) पर लगातार 3 से 4 घंटे से अधिक कार्य नहीं करना चाहिए।
  • थ्रेशर मशीन में गेहूं फसल शूट की भराई करते समय ध्यान दें कि बंडल में कोई पत्थर या लकड़ी का टुकड़ा तो नहीं है।
  • मशीन के उपयोग से पहले और उपयोग के बाद इसकी छन्नियों के छिद्रों की सफाई समय-समय पर करनी चाहिए।
  • उपयोग से पहले पुली, बीयरिंग्स तथा अन्य कल पुर्जों पर ग्रीस/तेल लगा देना चाहिए।
  • थ्रेशर में  गेहूं के दाना टूट रहे हो तो सिलेंडर के चक्कर की संख्या प्रति मिनट कम कर देनी चाहिए तथा कॉन्केव / सिलेंडर के बीच की दूरी बढ़ा देनी चाहिए।

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