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सक्सेस स्टोरी : सिविल सेवा परीक्षा में किसान परिवार के बेटे-बेटियों ने किया टॉप

सक्सेस स्टोरी : सिविल सेवा परीक्षा में किसान परिवार के बेटे-बेटियों ने किया टॉप
पोस्ट -26 मई 2023 शेयर पोस्ट

सिविल सेवा परीक्षा 2022 रिजल्ट, किसानो के बेटे-बेटियों को मिली कामयाबी 

संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) ने 23 मई को सिविल सेवा परीक्षा 2022 का फाइनल रिजल्ट जारी किया है, जिसमें कुल 933 अभ्यर्थियों का नियुक्ति के लिए चयन किया गया है। यूपीएससी सिविल सर्विसेज परीक्षा रिजल्ट 2022 में विभिन्न राज्यों से किसान परिवार के बेटे और बेटियों ने जलवा दिखाते हुए सफलता हासिल की है। यूपीएससी सिविल सर्विसेज परीक्षा में किसान परिवार के अविनाश कुमार, अंकित नैन, सुभरा और पंकज राजपूत ने बाजी मारी है। किसान परिवार के इन बेटे और बेटियों ने विपरीत परिस्थितियों में यूपीएससी की परीक्षा पास करके यह साबित कर दिखाया है कि अगर किसी चीज को मेहनत और लगन से पाने की कोशिश की जाए तो उसमें सफलता निश्चित रूप से मिलती है। आईये, ट्रैक्टर गुरु इस लेख के माध्यम से यूपीएससी सिविल सर्विसेज परीक्षा में सफल हुए इन उम्मीदवारों के बारे में जानते हैं कि कैसे उन्होंने परीक्षा में सफलता अर्जित कर मां-बाप का नाम रोशन किया है।  

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अविनाश ने 17वां रैंक से बढ़ाया बिहार का मान 

यूपीएससी सिविल सर्विसेज की परीक्षा में बिहार के अररिया जिले के मूल निवासी अविनाश कुमार ने 17वीं रैंक लेकर अपने जिले के साथ-साथ बिहार का भी मान बढ़ाया है। अविनाश के पिता अजय कुमार सिंह एक सामान्य किसान है, जो गांव में खेती-किसानी करते हैं और उनकी मां प्रतिमा देवी एक गृहिणी हैं। अविनाश के पिता बेटे की सफलता की कहानी बताते हुए कहते हैं कि उन्हें यकीन था कि उनका बेटा सिविल सेवा परीक्षा में सफलता प्राप्त करेगा। उन्होंने कहा कि बेटे की 17वीं रैंक आने से वे काफी खुश हैं। उनके बेटे ने सिर्फ 25 वर्ष की उम्र में सिविल सर्विसेज जैसी कठिन परीक्षा को तीसरे अटेम्प्ट में ही क्लियर कर ली। इसके लिए उनके बेटे ने काफी मेहनत की है। वे कहते हैं कि जब दो प्रयास में अविनाश को सफलता नहीं मिली तो वह थोड़ा टूट गया था, लेकिन उसने हिम्मत नहीं हारी और परिवार के सपोर्ट से उसने तीसरे प्रयास में परीक्षा पास कर 17वीं रैंक हासिल की।

हरियाणा के अंकित नैन हासिल की 99वीं रैंक

हरियाणा के जींद जिले के जुलाना क्षेत्र के गांव खरैंटी के किसान परिवार के बेटे अंकित नैन ने यूपीएससी सिविल सर्विसेज परीक्षा में बाजी मारते हुए 99वीं रैंक हासिल की है। उन्होंने परीक्षा पास कर गांव का ही नहीं बल्कि जिले के साथ-साथ राज्य का नाम भी रोशन कर दिखाया है। अंकित के भाई राहुल ने बताया कि अंकित शुरू से ही पढ़ाई में होशियार है, पिता अक्सर बीमार रहते हैं, इसलिए जिम्मेदारी निभाते हुए नौकरी ज्वाइन की और फिर छुट्टी लेकर यूपीएससी की तैयारी की। राहुत बताते हैं कि अंकित ने 10वीं की परीक्षा जुलाना के ही स्कूल से पास की थी। इसके बाद 11वीं और 12वीं कक्षा की पढ़ाई हिसार के स्कूल से की थी। छह महीने पहले ही अंकित का चयन यूपी के पीलीभीत में म्यूनिसिपल सहायक कमिश्नर के पद पर हुआ था, जिसके बाद अंकित ने छुट्टी लेकर यूपीएससी की तैयारी शुरू की थी। 

रैंक अच्छी नहीं आने पर दोबारा शुरू की तैयारी 

अंकित के भाई राहुल ने बताते हैं कि अंकित ने पहले भी यूपीएससी की परीक्षा पास की थी, जिसमें उसकी अच्छी रैंक ना आ सकी। इसके बाद अंकित ने दोबारा से यूपीएससी की तैयारी शुरू कर दी थी। उन्होंने बताया कि अंकित का सपना जिला उपायुक्त बनने का था और शुरू से ही वह अपने सपने को लेकर यूपीएससी की तैयारी कर रहा था, जिससे उसे लोगों की सेवा करने का अवसर मिल सके, लेकिन अंकित का सपना अब पूरा हो चुका उसने यूपीएससी परीक्षा कर सफलता हासिल कर ली है। राहुल बताते है कि उनके पिता खेतीबाड़ी करते हैं, लेकिन उनके बीमार होने के कारण मैंने कभी भी अंकित को किसी चीज की काई कमी नहीं होने दी। उन्हें जब अंकित के यूपीएससी में 99वीं रैंक प्राप्त करने की सूचना मिली तो वह खुशी से झूम उठे। 

औरंगाबाद के शुभ्रा ने 197वीं रैंक हासिल कर किया जिले का नाम रोशन

बिहार के औरंगाबाद जिले की शुभ्रा ने यूपीएससी सिविल सर्विसेज की परीक्षा में 197वीं रैंक लाकर न सिर्फ अपने मां-बाप, बल्कि औरंगाबाद जिले का नाम भी पूरे देश में रोशन कर दिया। शुभ्रा के पिता अरूंजय शर्मा एक किसान हैं और मां रेणु देवी एक कुशल गृहणी है। इसके बावजूद उनके माता-पिता ने बेटियों को पढ़ाने-लिखाने में कोई कमी नहीं छोड़ी। शुभ्रा ने अपने माता-पिता का मान रखते हुए दूसरी बार भी यूपीएससी की परीक्षा पास कर यह साबित कर दिखाया है कि कुछ कर गुजरने की इच्छाशक्ति यदि दृढ़ हो तो संसाधनों की कमी सफलता की राह में कभी बाधक नहीं बनती है। इससे पहले भी शुभ्रा ने यूपीएससी की परीक्षा पास की है, जिसमें 308वीं रैंक प्राप्त की थी। शुभ्रा फिलहाल जयपुर में इंडियन पोस्ट्स एंड टेलीकॉम फिनांस सर्विस में बतौर अधिकारी पदस्थापित हैं। शुभ्रा छह भाई बहन हैं, जिनमें वह दूसरे नंबर पर हैं। शुभ्रा ने प्राथमिक शिक्षा शहर के ही एक प्राइवेट स्कूल से ली थी । इसके बाद 2008 में 10 वीं परीक्षा पास करने के बाद शुभ्रा ने आरा के कॉलेज से इंटर की परीक्षा पास की और पटना में रहकर परीक्षा की तैयारी की। शुभ्रा ने पटना वीमेन्स कॉलेज से स्नातक की। उसके बाद उसने बीएचयू से पॉलिटिकल साइंस में एमए की। इसके बाद जेएनयू से पीएचडी की। इसी बीच शुभ्रा ने  2019 में यूपीएससी की परीक्षा पास कर जॉब में लग गई। फिलहाल वे जॉब कर रही हैं।

यूपीएससी में पंकज राजपूत ने मारी बाजी

मध्यप्रदेश के भितरवार क्षेत्र के छोटे से गांव प्रेमपुर के एक किसान के बेटे ने यूपीएससी परीक्षा में सफलता हासिल साबित कर दिखाया है कि अगर कड़ी मेहनत और सच्ची लगन से लक्ष्य को पाने की कोशिश की जाए तो मेहनत जरूर सफल हो जाती है। गांव प्रेमपुर के किसान हीरा सिंह राजपूत के बेटे पंकज राजपूत ने यूपीएससी में चयनित होकर गांव के साथ-साथ जिले का भी नाम रोशन कर दिखाया है। किसान हीरा सिंह राजपूत के बेटे की इस बड़ी सफलता से भितरवार क्षेत्र में खुशी का माहौल है। परीक्षा में पास होने की खबर गांव में आते ही आतिशबाजी की गई और मिठाई बांटी गई। पूरे गांव सहित आस-पास का क्षेत्र भी पंकज के पास होने का जश्न मना रहा है। जानकारी के अनुसार भितरवार विकासखंड और चीनोर तहसील की ग्राम पंचायत सिकरौदा के प्रेमपुर गांव के किसान हीरा सिंह राजपूत के बेटे पंकज राजपूत ने गांव से ही 10वीं की परीक्षा पास कर ली थी। इसके बाद ग्वालियर गोरखी हायर सेकेंडरी स्कूल से 12वीं और एमएलबी कॉलेज से ग्रेजुएशन किया। पंकज राजपूत ने बताया कि उसने वर्ष 2018 से यूपीएससी की तैयारी शुरू की थी। लेकिन सफल न होने पर वह थोड़ा निराश हो गया। परंतु हार नहीं मानी तथा मन में लक्ष्य हासिल करने की चाह लेकर वर्ष 2020 में एक बार फिर से परीक्षा की तैयारी में लग गया। पंकज अभी अपने परिवार के साथ दिल्ली में रह रहे हैं। पंकज ने अपनी इस सफलता का श्रेय अपने माता पिता एवं दोस्तों को दिया है। वहीं, यूपीएससी में चयनित होने पर किसान के बेटे पंकज को सोशल मीडिया पर बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है। 

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