लंपी स्किन डिजीज की स्वदेशी वैक्सीन तैयार, गायों की बीमारी होगी खत्म

लंपी स्किन डिजीज की स्वदेशी वैक्सीन तैयार, गायों की बीमारी होगी खत्म
शेयर पोस्ट

आईसीएआर द्वारा विकसित स्वदेशी लंपी-प्रो वैक इंड वैक्सीन का उत्पादन जल्द शुरू होने की संभावना

पिछले कुछ दिनों से देश के कई राज्यों में पशुओं में लंपी स्किन डिजीज का प्रकोप देखा गया है। लंपी स्किन डिजीज बीमारी ने गुजरात, राजस्थान, पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश समेत देश के छह-सात राज्यों में कहर बरपा रखा है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, भारत में लंपी स्किन डिजीज वायरस ने लगभग 11.21 लाख मवेशियों को संक्रमित किया है और अब तक पूरे देश में 57,000 पशुओं की इस वायरस के संक्रमण से मौत हो चुकी है। इनमें से लगभग 37,000 राजस्थान में हैं। जिससे दुग्ध उत्पादन पर भी असर पड़ा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को एक कार्यक्रम में बताया कि केंद्र सरकार राज्यों के साथ मिलकर लंपी वायरस को कंट्रोल करने के लिए प्रयास कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि वैज्ञानिकों ने लंपी वायरस बीमारी के लिए देसी टीका भी बना लिया है। चार-पांच महीनों के भीतर मवेशियों को संक्रमित करने वाले लंपी स्किन डिजीज वायरस के खिलाफ स्वदेशी लंपी-प्रोवैकइंड वैक्सीन मार्केट में बिक्री के लिए उपलब्ध होगी। 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि कई राज्य मवेशियों में लंपी वायरस स्किन बीमारी से जूझ रहे हैं और यह बीमारी डेयरी क्षेत्र के लिए चिंता का विषय बनकर उभरी है। इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट में आयोजित इंटरनेशनल डेयरी फेडरेशन वर्ल्ड डेयरी समिट 2022 को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि हाल के दिनों में भारत के कई राज्यों में इस बीमारी के कारण पशुधन का नुकसान हुआ है। लंपी वायरस एक संक्रामक वायरल बीमारी है जो मवेशियों के लिए खतरनाक साबित हो रही है। जिस प्रकार इंसानों में कोरोना फैला था उसी तरह पशुओं में खासतौर पर गायों में लंपी संक्रामक बीमारी फैली है। इससे कई राज्यों में गायों की मौत हो रही है। यह रोग मच्छरों, मक्खियों, ततैयों आदि द्वारा मवेशियों के सीधे संपर्क में आने और दूषित भोजन और पानी के जरिए से फैलता है। पशुओं में लंपी स्किन रोग नामक खतरनाक बीमारी ने पशुपालक किसानों की समस्या बढ़ा दी है। 

राजस्थान में सबसे देखा ज्यादा लंपी स्किन डिजीज का प्रकोप 

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार के लंपी स्किन डिजीज का सबसे ज्यादा प्रकोप राजस्थान राज्य में देखा गया है। राजस्थान के पशुओं में लंपी स्किन रोग नामक खतरनाक बीमारी बढ़ती जा रही है। सरकार के तमाम प्रयासों के बावजूद देखते ही देखते करीब सवा लाख दुधारू पशु इसकी चपेट में आ गए हैं। इस पर जल्द ही काबू नहीं पाया गया तो कई जिलों में दूध की कमी हो सकती है। क्योंकि इस रोग से ग्रासित पशु दूध देना बंद या कम कर देते हैं। राजस्थान से हर रोज करीब 29.9 लाख लीटर दूध की बिक्री होती है। इस रोग की चपेट में आने से चार हजार से अधिक पशुओं की मौत हो चुकी है। राज्य में 37,000 पशुओं की इस बीमार से मृत्यु हो चुकी है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार राज्यों को लगातार परामर्श भेज रहा है। 

राज्य सरकारों से टीकाकरण प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए कहा

केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री पुरुषोत्तम रूपाला ने अंतरराष्ट्रीय डेयरी फेडरेशन के विश्व डेयरी सम्मेलन के बारे में जानकारी देने के लिये आयोजित संवाददाता सम्मेलन में कहा कि लम्पी स्किन बीमारी गुजरात, राजस्थान, पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश समेत छह-सात राज्यों में फैली है। आंध्र प्रदेश में भी कुछ मामले आये हैं। विश्व डेयरी सम्मेलन 12 से 15 सितंबर तक आयोजित किया जाएगा। उन्होने कहा कि उन्होंने स्थिति का आकलन करने और उस पर अंकुश लगाने के कार्यक्रमों की निगरानी के लिये पांच राज्यों का दौरा किया है। मंत्रालय दैनिक आधार पर स्थिति पर नजर रखे हुए है। मंत्री ने जोर देकर कहा कि बकरियों के लिये टीका बहुत प्रभावी और उपलब्ध है और राज्य सरकारों से टीकाकरण प्रक्रिया में तेजी लाने के लिये कहा गया है। रूपाला ने कहा कि गुजरात में स्थिति बेहतर हुई है, जबकि पंजाब और हरियाणा में बीमारी नियंत्रण में है। राजस्थान में यह बीमारी फैली है।

स्वदेशी लंपी-प्रोवैकइंड वैक्सीन मार्केट में बिक्री के लिए होगी उपलब्ध 

इंडियन काउंसिल ऑफ एग्रीकल्चरल रिसर्च को विश्वास है कि चार-पांच महीनों के भीतर मवेशियों को संक्रमित करने वाले लंपी स्किन डिजीज वायरस के खिलाफ स्वदेशी लंपी-प्रोवैकइंड वैक्सीन मार्केट में बिक्री के लिए उपलब्ध होगी। आईसीएआर के उप महानिदेशक (पशु विज्ञान) भूपेंद्र नाथ त्रिपाठी ने द इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि एग्रीनोवेट इंडिया, जो हमारे संस्थानों द्वारा विकसित उत्पादों और प्रौद्योगिकियों के लिए व्यावसायीकरण शाखा है, ने पिछले सप्ताह एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट डॉक्यूमेंट जारी किया। तीन कंपनियों ने पहले ही रुचि दिखाई है। हिसार, हरियाणा में के नेशनल रिसर्च सेंटर ऑन इक्विन्स और इज्जतनगर, यूपी में इंडियन वेटरनरी रिसर्च इंस्टीट्यूट द्वारा संयुक्त रूप से एक लाइव वैक्सीन विकसित की है, जो वायरस के प्रभाव को कम करती है। यह तपेदिक, खसरा, कण्ठमाला और रूबेला के खिलाफ इस्तेमाल की जाने वाली वैक्सीन के समान है।

स्वदेशी लंपी-प्रोवैकइंड वैक्सीन 100 प्रतिशत सुरक्षित

ईसीएआर के उप महानिदेशक (पशु विज्ञान) भूपेंद्र नाथ त्रिपाठी ने समझाया, ‘यह भी समजातीय वैक्सीन है, जो मवेशियों में लंपी स्किन डिजीज के खिलाफ 100 प्रतिशत सुरक्षा प्रदान करता है। वर्तमान में, हम केवल बकरियों और भेड़ों को होने वाली चेचक की बीमारी वायरस के टीके लगा रहे हैं। ये एक ही कैप्रिपोक्सवायरस जीनस से संबंधित तीनों वायरस के आधार पर विषमलैंगिक टीके हैं, जो एलएसडी के खिलाफ मवेशियों के लिए केवल क्रॉस-प्रोटेक्शन (60-70 प्रतिशत तक) की पेशकश करते हैं, जबकि कोविड-19 के मामले में, कोवैक्सिन जैसे निष्क्रिय टीकों का उपयोग किया गया था, ये कम प्रभावी हैं, कैप्रीपॉक्स वायरस के खिलाफ सिर्फ 5-6 महीने की प्रभावकारिता के साथ। इसलिए, लंपी स्किन डिजीज के लिए एक जीवित क्षीणन टीके का विकल्प चुना गया।

भारत में 193.46 मिलियन मवेशी

आईसीएआर के उप महानिदेशक (पशु विज्ञान) भूपेंद्र नाथ त्रिपाठी ने बताया कि हालांकि, लंपी-प्रोवैकइंड वैक्सीन का व्यावसायिक स्तर पर उत्पादन एक चुनौती होने वाला है। प्रमुख पशु चिकित्सा वैक्सीन निर्माताओं में इंडियन इम्यूनोलॉजिकल्स लिमिटेड, हेस्टर बायोसाइंसेज, ब्रिलियंट बायो फार्मा, एमएसडी एनिमल हेल्थ और बायोवेट प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं। पहली दो कंपनियां मवेशियों में एलएसडी के खिलाफ पहले से ही बकरियों और भेड़ों को होने वाली चेचक के टीके की आपूर्ति कर रही हैं। अब तक देशभर में लगभग 65.17 लाख खुराकें दी जा चुकी हैं. 2019 की पशुधन गणना के अनुसार, भारत में मवेशियों की आबादी कुल 193.46 मिलियन है। त्रिपाठी के अनुसार, हर्ड इम्युनिटी प्राप्त करने के लिए मवेशियों की कम से कम 80 प्रतिशत आबादी को कवर किया जाना है। आदर्श रूप से एक ऐसे टीके के माध्यम से, जो केवल आंशिक सुरक्षा न प्रदान करके पूर्ण सुरक्षा प्रदान करता हो, ऐसे में लंपी-प्रोवैकइंड वैक्सीन वैक्सीन का इतने बड़े पैमाने पर प्रोडक्शन एक चुनौती है।

ट्रैक्टरगुरु आपको अपडेट रखने के लिए हर माह सोनालिका ट्रैक्टर  व स्वराज ट्रैक्टर कंपनियों सहित अन्य ट्रैक्टर कंपनियों की मासिक सेल्स रिपोर्ट प्रकाशित करता है। ट्रैक्टर्स सेल्स रिपोर्ट में ट्रैक्टर की थोक व खुदरा बिक्री की राज्यवार, जिलेवार, एचपी के अनुसार जानकारी दी जाती है। साथ ही ट्रैक्टरगुरु आपको सेल्स रिपोर्ट की मासिक सदस्यता भी प्रदान करता है। अगर आप मासिक सदस्यता प्राप्त करना चाहते हैं तो हमसे संपर्क करें।

Website - TractorGuru.in
Instagram - TractorGuru Instagram Page
Facebook - TractorGuru Facebook Page

Check On Road Price

Select Brand
Select Brand
Mahindra
Massey Ferguson
Swaraj
Sonalika
Farmtrac
John Deere
Powertrac
Eicher
New Holland
Solis
VST
Captain
Kubota
Indo Farm
Preet
Trakstar
Tafe
ACE
Same Deutz Fahr
Escorts
Force
Agri King
Hindustan
Kartar
Cellestial
HAV
Autonxt
Maxgreen
Marut
Sukoon
Montra
Standard
No brand found

Please select brand first

Select Model
Select Model
No model found
Select State
Select State
Maharashtra
Andhra Pradesh
Tamil Nadu
Kerala
Daman Diu
West Bengal
Assam
Madhya Pradesh
Manipur
Andaman Nicobar
Arunachal Pradesh
Bihar
Delhi
Odisha
Uttarakhand
Jharkhand
Punjab
Karnataka
Himachal Pradesh
Rajasthan
Meghalaya
Gujarat
Haryana
Lakshadweep
Goa
Chhattisgarh
Nagaland
Chandigarh
Sikkim
Jammu Kashmir
Puducherry
Dadra Nagar Haveli
Mizoram
Tripura
Uttar Pradesh
Telangana
No state found
Select District
Select District
No district found
Call Back Button

Search Other tractors

GET TRACTOR PRICE

Select Tractor

Sponsored

Massey Ferguson

Starting Price

₹ X,XX

2700 cc 46 HP

For Price Click Here

Sponsored

Eicher

Starting Price

₹ X,XX

1557 cc 25 HP

For Price Click Here

Sponsored

Swaraj

Starting Price

₹ X,XX

3478 cc 49 HP

For Price Click Here