UP AGREES : उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने प्रदेश के युवाओं और किसानों को बड़ा तोहफा दिया है। मंगलवार को योगी कैबिनेट की बैठक में एग्रीज प्रोजेक्ट समेत 25 प्रस्तावों पर महुर लगी। विश्व बैंक के सहयोग से कृषि व संबद्ध क्षेत्र की तस्वीर बदलने, किसानों की आय बढ़ाने और प्रदेश की अर्थव्यवस्था को गति प्रदान करने के लिए कैबिनेट बैठक में 4000 हजार करोड़ रुपए की यूपी एग्रीज ( यूपी एग्रीकल्चर ग्रोथ एंड रूरल इंटरप्राइज इकोसिस्टम स्ट्रेंथनिंग) परियोजना को मंजूरी दी गई। बैठक में बॉयोप्लास्टिक औद्योगिक नीति, मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान, मक्का ज्वार बाजरा की खरीद की नीति के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की गई। इसके अलावा, सोनभद्र में कनहर सिंचाई योजना के लिए 3394.65 करोड़ की स्वीकृत किए गए। इससे सोनाभाद्र के आसपास के किसान परिवारों को सिंचाई और पेय जल का लाभ मिलेगा।
यूपीएग्रीज परियोजना अपेक्षाकृत पिछड़े समझे जाने वाले बुंदेलखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश के आठ मंडलों के 28 जिलों में संचालित की जाएगी। इसमें बुंदेलखंड के सात जिले, जबकि घाघरा और सरयु के उत्तर में स्थित गोरखपुर, बस्ती एवं देवीपाटन मंडल के जिलों के अतिरिक्त सरयु नदी के दक्षिण में आने वाले आजमगढ़, वाराणसी और मिर्जापुर मंडल के जिले शामिल होंगे। यूपीएग्रीज परियोजना उद्देश्य पिछड़े समझे जाने वाले पूर्वी उत्तर प्रदेश और बुंदेलखंड के जिलों में कृषि की उत्पादकता को बढ़ाना एवं किसानों की आय में सुधार लाना है।
लगभग 4000 करोड़ की यूपी एग्री परियोजना 6 साल के लिए होगी। यह परियोजना 2024-25 से 2029-30 तक चलेगी। इस परियोजना के लिए विश्व बैंक 2737 करोड़ और राज्य सरकार की ओर से 1166 करोड़ रुपए खर्च किए जाएगा। योगी कैबिनेट ने इस वित्तीय वर्ष में इस यूपी एग्री प्रोजेक्ट के लिए 200 करोड़ रुपए की मंजूरी भी दे दी है। प्रदेश में उत्पादकता बेहतर होने के बावजूद भी कई चुनौतियां ऐसी हैं, जो किसानों की कमाई बढ़ाने में रुकावटें पैदा करती हैं। इसमें सीमित वैल्यू एडिशन और निर्यात की कमी जैसी प्रमुख चुनौतियां शामलि हैं। इन्हें दूर करने के लिए यह परियोजना शरू की जा रही है।
यूपी एग्री प्रोजेक्ट प्रबंधन उत्तर प्रदेश डायवर्सिफाइड एग्रीकल्चर सपोर्ट प्रोजेक्ट (UP DASP) करेगा। इस परियोजना के जरिये पूर्वी उत्तर प्रदेश और बुंदेलखंड के आठ संभागों के 28 पिछड़े जिलों में प्रमुख फसलों की उत्पादकता गुणवत्ता बढ़ाने का काम किया जाएगा। मार्केट सपोर्ट सिस्टम खड़ा किया जाएगा और ट्रेनिंग कार्यक्रम शुरू किया जाएगा। इस परियोजना के तहत किसानों को उन्नत बीज, उच्च तकनीक एवं मशीनें आदि प्रदान कर उनसे कुल 6.15 लाख हेक्टेयर क्षेम में मुख्य फसलों के अलावा नकदी फसलों की आधुनिक खेती कराई जाएगी। इससे क्षेत्र के सीमांत और छोटे किसानों को फायदा होगा और उनकी आय में वृद्धि होगी।
यूपी एग्री परियोजना के माध्यम से संबंधित जिलों में किसानों के उत्पादन को खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों से जोड़ने या उसका वैल्यू एडिशन में सहयोग किया जाएगा, जिससे किसानों को उत्पाद का बेहतर मूल्य मिले। खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी पैदा हो सकेंगे। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि एवं संबंधित क्षेत्र से जुड़े लोगों को रोजगार मिलेंगे। इस नई परियोजना के तहत विशेष आर्थिक क्षेत्र की तर्ज पर कृषि क्लस्टर बनाया जाएगा। मौजूदा दौर में आठ क्लस्टर बनाया जा चुका है और कुछ अन्य पर कार्य शुरू कर दिया गया है। इन एग्रो क्लस्टर को ओडीओपी की तर्ज पर सेंटर ऑफ एक्सलेंस के रूप में विकसित किया जाएगा। इससे लगभग 24 करोड़ लोगों को खाद्य सुरक्षा में सुधार लाने में मदद मिलेगी। किसानों को प्रोसेसिंग
इस परियोजना के माध्यम से बुन्देलखंड के कुछ जिलों में तिल के उत्पादन और उसकी उत्पादकता पर जोर दिया जाएगा, जबकि कुछ शेष जिलों में मछली पालन को बढ़ावा देकर मत्स्य पालकों और किसानों को क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाया जाएगा। किसानों को पोस्ट हार्वेस्टर मैनेजमेंट में प्रशिक्षित किया और उन्हें मार्केट सपोर्ट सिस्टम से जोड़ा जाएगा। परियोजना के माध्यम से किसान उत्पादन संगठन (FPO) और महिला स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) को आर्थिक रूप से मजबूत बनाया जाएगा। मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान योजना के तहत हर साल एक लाख युवाओं को 5 लाख रुपए तक का बिना ब्याज के लोन मिलेगा।
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