धान की उन्नत किस्म : धान खरीफ सीजन की सबसे महत्वपूर्ण खाद्यान्न फसल है। इसकी खेती देश के सभी क्षेत्रों में मानसून के समय की जाती है। देखा जाए, तो धान की खेती अधिकतर उन क्षेत्रों में होती है, जहां पर सिंचाई के अच्छे संसाधन मौजूद होते हैं। लेकिन अब धान की खेती सिंचित एवं अर्ध सिंचित दोनों क्षेत्रों में होने लगी है। अर्ध सिंचित क्षेत्र में धान की खेती में बीजों की बुवाई सीधी बिजाई विधि से की जाती है। वहीं, सिंचित क्षेत्र में धान की खेती रोपाई एवं छिड़काव विधि से की जाती है। ऐसे में आने वाले महीने में किसान धान की खेती में रोपाई के लिए धान की नर्सरी लगाने का काम शुरू करेंगे। ऐसे में धान की खेती से बंपर पैदावार के लिए धान की अच्छी किस्मों की नर्सरी लगाना सबसे महत्वपूर्ण होता है। किसान भाई हमेशा नर्सरी के लिए अच्छी क्वालिटी की उन्नत किस्मों का ही चुनाव करें। क्योंकि इस प्रकार की किस्मों में कीड़े और रोग की संभावना कम होती है और यह कम समय में अधिक पैदावार देने में समक्ष होती है। आमतौर पर देश के विभिन्न इलाकों में धान की कई उन्नत वैराइटीज की खेती किसानों द्वारा की जाती है, जो 90 से 130 दिन में तैयार होती है। लेकिन आज हम आपके लिए धान की अच्छी क्वालिटी वाली टॉप 10 किस्मों की जानकारी लेकर आए हैं, जिनकी खेती कर आप कम समय में अधिक उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं।
चीन के बाद धान उत्पादन में भारत सबसे बड़ा देश है। पूरे विश्व में धान उत्पादन में भारत दूसरे नंबर पर आता है। भारत में धान की खेती की पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, आन्ध्र प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, बिहार और तमिलनाडु जैसे राज्यों में होती है। वही, झारखंड राज्य में धान की खेती 71 प्रतिशत भूमि भाग पर की जाती है। देखा जाए, तो इन राज्यों में करोड़ो किसान बारिश सीजन के दौरान धान की खेती करते हैं।
देश के उत्तर दक्षिण राज्यों में अधिकतर आबादी की मुख्य खेती धान है। पूरे भारत में धान की कई उन्नत किस्में है, जिनका चुनाव आप अपने क्षेत्र की भूमि, पानी और जलवायु के अनुसार कर सकते हैं। इन टॉप 10 किस्मों में पूसा - 1460, जया धान, डब्लू.जी.एल. - 32100, सीएसआर-10, पूसा सुगंध - 3, आईआर36, आईआर 64, अनामिका, एनडीआर-359 और धान: डीआरआर धान 310 शामिल है। धान फसल की उन्नत किस्मों का चुनाव किसान भाई अपने क्षेत्र की भूमि व जलवायु को ध्यान में रखते हुए कर सकते हैं।
पूसा - 1460 : पूसा-1460 बासमती धान की एक उन्नत किस्म है, जिसके दाने लंबे, वजनदार और खाने में स्वादिष्ट होते हैं। धान की इस किस्म में बैक्टीरिया लिफ विलाइट (वीएलवी) नहीं आता है। धान की इस किस्म को 2007 सात में सीवीआरसी द्वारा विकसित किया गया था। पूसा-1460 किस्म 130 से 135 दिनों में तैयार हो जाती है। धान की इस किस्म की औसतन पैदावार 25 से 30 क्विंटल प्रति एकड़ है। धान की यह किस्म पंजाब, हरियाणा उत्तर प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़, उत्तराखंड, उड़ीसा, आंध्रप्रदेश, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु और जम्मू कश्मीर राज्यों के अनुकूल है। इसके पौधों की लंबाई मीडियम रहती है। इस किस्म के धान के पौधों में प्रति बाली दानों की संख्या 170-190 दाने होती है।
पूसा सुगंध 3 : पूसा सुगंध 3 सुगंधित बासमती धान की एक अच्छी किस्म है। धान की अन्य किस्मों की तुलना में पूसा सुगंध 3 धान में किट और रोगों का प्रकोप न के बराबर होता है, जिसके कारण इसके उत्पादन में कीटनाशक का इस्तेमाल कम करना पड़ता है। धान की इस किस्म के दाने सुगंधित और खाने में स्वादिष्ट होते है। पूसा सुगंध 3 धान की फसल अवधि 130 से 135 दिन की होती है। धान की इस किस्म की बुवाई पंजाब, हरियाणा, मध्य प्रदेश बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और जम्मू कश्मीर जैसे बासमती उत्पादन करने वाले राज्यों में की जाती है। धान की यह किस्म 30 से 35 क्विंटल प्रति एकड़ की पैदावार देने में सक्षम है।
डब्लू.जी.एल. - 32100 : डब्लू.जी.एल. - 32100 किस्म मध्यम अवधि में पकने वाली धान की एक अच्छी किस्म है। धान की इसी किस्म के दाने छोटे और पतले होते हैं। इस किस्म के पौधों की लंबाई छोटी होती है। डब्लू.जी.एल. - 32100 किस्म धान की फसल तैयार होने की अवधि 125 से 130 दिन है। मध्यम अवधि मे तैयार होने वाली धान की इस किस्म की औसतन पैदावार 55 से 60 किवंटल प्रति हैक्टेयर होती है।
आईआर -36 : धान की यह किस्म सूखाबर्दाश्त करने वाली किस्म है। इस किस्म की बुवाई कम बारिश वाले इलाकों में की जाती है। आईआर -36 धान की इस किस्म की फसल पकने की अवधि 115 से 120 दिन है। धान की यह किस्म 40 से 45 क्विंटल प्रति हेक्टेयर की पैदावार देती है।
आई.आर. - 64 : धान की यह किस्म भी मध्यम अवधि में पकने वाली एक उन्नत धान की किस्म है। आई.आर. -64 धान की पैदावार 50 से 55 किवंटल प्रति हैक्टेयर है। इस किस्म के धान की फसल पकने की अवधि 125 से 130 दिन है। आई.आर. -64 किस्म धान का पौधा छोटा और दाना लंबा और पतला होता है।
अनामिका : अनामिका धान की बुवाई पश्चिम बंगाल बिहार, उड़ीसा और असम में की जाती है। धान की इस किस्म की फसल पकने की अवधि 130 से 135 दिनों की है। धान की इस किस्म की बुवाई भारत में सबसे अधिक की जाती है। अनामिका धान किस्म के दाने लंबे और मोटे होते हैं। धान की यह किस्म 50 से 55 क्विंटल प्रति हैक्टेयर की पैदावार देती है।
एनडीआरआर धान 310 : धान की अच्छी पैदावार देने वाली लोकप्रिय किस्मों में एनडीआरआर धान 310 सबसे अच्छी धान की किस्म है। इसके दाने सफेद और चमकदार होते हैं। इसके दानों में प्रोटीन की मात्रा 10.3 प्रतिशत होती है। धान की इस किस्म के पौधों की औसतन लंबाई 90 से 95 सेंमी होती है। एनडीआरआर धान 310 धान की किस्म बीएलबी एवं ब्लास्ट रोगी प्रतिरोधी होती है। धान की यह किस्म मध्यप्रदेश, आंध्रप्रदेश, केरल, बिहार और पश्चिम बंगाल राज्यों के लिए अनुकूल है। धान की इस किस्म की फसल पकने की अवधि 125 से 130 दिन है। यह 45 से 50 क्विंटल प्रति हैक्टेयर की औसतन पैदावार देने में सक्षम है।
एनडीआर 359 : धान की यह किस्म जल्दी पकने वाली धान की बोनी किस्म है। यह 115 से 120 दिनों में पककर तैयार हो जाती है। इसके पौधों की औसतन ऊंचाई 95 सेमी होती है। इस किस्म में एलबी, बीएस और बीएलबी रोग नहीं लगते हैं। धान की इस किस्म की बुवाई उत्तर प्रदेश, बिहार और उड़ीसा जैसे राज्यों में की जाती है। एनडीआर 359 धान की पैदावार 50 से 55 क्विंटल प्रति हैक्टेयर तक होती है।
सीएसआर-10 : धान यह किस्म बोनी किस्म है। इसके दाने सफेद और छोटे होते हैं। सीएसआर-10 धान की किस्म पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, गोवा, ओडिसा, गुजरात, महाराष्ट्र तथा कर्नाटक के लिए अनुकूल है। इस किस्म की औसतन पैदावार 50 से 55 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है। इसकी फसल पकने की अवधि 120 से 125 दिन है।
जया धान : धान की यह किस्म बीएबी, एसबी, आरटीबी तथा ब्लास्ट रोग प्रतिरोधी है। इसके पौधों की लंबाई 82 सेंमी तक होती है। यह कम लंबाई में सबसे अच्छी धान किस्म है। इस किस्म के धान के दाने सफेद और लंबे होते है। धान की यह किस्म 120 से 130 दिन में तैयार हो जाती है। जया धान किस्म की खेती भारत के लगभग सभी राज्यों में की जाती है।
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