Agriculture Farming : किसानों की आय बढ़ाने और खेती-किसानी को एक लाभकारी व्यवसाय बनाने के लिए केंद्र सरकार और राज्य सरकार द्वारा कई योजनाएं चलाई जा रही है। इन योजनाओं के अंतर्गत किसानों को कृषि और उससे संबंधित क्षेत्रों के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिसके लिए सरकार द्वारा प्रोत्साहन राशि भी मुहैया कराई जा रही है। इस कड़ी में कृषि तथा किसान कल्याण विभाग, हरियाणा सरकार विभिन्न कृषि योजनाओं के अंतर्गत किसानों को खेती-किसानी के लिए प्रोत्साहित कर रही है, ताकि उनकी आमदनी को बढ़ाया जा सके। राज्य के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्याम सिंह राणा ने एक प्राइवेट चैनल से बात करते हुए सरकार की योजनाओं के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि हरियाणा सरकार का उद्देश्य प्रदेश के किसानों की आय बढ़ाना और कृषि को एक लाभकारी व्यवसाय बनाना है। इसके लिए, प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने और बंजर भूमि को उपजाऊ बनाने के लिए सरकार द्वारा विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। इसके तहत, किसानों को देशी गाय खरीदने के लिए प्रोत्साहन दिया जा रहा है, कृषि यंत्रों पर 50 से 80 प्रतिशत तक की सब्सिडी दी जा रही है। प्रदेश में झींगा मछली पालन को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है।
कृषि मंत्री राणा ने कहा कि किसानों की आय बढ़ाने के लिए प्राकृतिक खेती (Natural Farming), कृषक उत्पादक संगठन (FPO), कृषि यंत्रीकरण (Agricultural Mechanization) और कृषि पर्यटन (agritourism) को बढ़ावा दिया जा रहा है। प्रदेश में प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार इसके उत्पादों को बेहतर समर्थन मूल्य (support price) देने की कार्य योजना तैयार कर रही है। किसानों को उनके उत्पादों का अधिक मूल्य दिलाने के लिए उन्हें एफपीओ से जोड़ा जा रहा है। कृषि क्षेत्र में आधुनिक कृषि उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है और एग्रो टूरिज्म को बढ़ावा दिया जाएगा।
कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा ने कहा कि किसानों को पारंपरिक खेती से हटकर विविधिकृत फसलों की ओर प्रोत्साहित किया जा रहा है। प्राकृतिक खेती अपनाने पर एक देशी गाय खरीदने के लिए 25,000 रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जा रही है, जिसे जल्द ही 30,000 रुपए प्रति गाय तक बढ़ाया जाएगा। गाय पालने की परंपरा को बढ़ावा देने और ग्रामीण क्षेत्रों में इसे आजीविका का साधन बनाने के लिए सरकार ने 400 करोड़ रुपए का बजट रखा है। इस राशि से न केवल गायों के चारे और गौशालाओं के रखरखाव की सहायता दी जाएगी, बल्कि इससे गाय पालने वाले किसानों को 30 हजार रुपए की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। हरियाणा सरकार ने प्रदेश के कुरुक्षेत्र में गुरुकुल, करनाल में घरौंडा, सिरसा में जींद और मंगियाना में चार प्राकृतिक खेती प्रशिक्षण केंद्र शुरू किए हैं, जहां किसानों को प्राकृतिक खेती का तकनीकी प्रशिक्षण दिया जाएगा।
कृषि मंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार किसानों की आय बढ़ाने और खेती को लाभकारी व्यवसाय बनाने के लिए अनेक कदम उठा रही है। प्राकृतिक खेती, आधुनिक कृषि तकनीकों, किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) और एग्रो टूरिज्म जैसी सरकारी योजनाओं से किसानों को वित्तीय मजबूती मिलेगी। कृषि क्षेत्र में यंत्रीकरण को बढ़ावा देने और पराली जलाने की समस्या से निपटने के लिए हरियाणा सरकार द्वारा फसल अवशेष प्रबंधन मशीनों पर 50 से 80 प्रतिशत तक की सब्सिडी दी जा रही है। फसल अवशेष प्रबंधन योजना के तहत अब तक 1,00,882 कृषि यंत्रों का वितरण किया जा चुका है। बता दें कि हरियाणा में फसल अवशेष प्रबंधन योजना के अतंर्गत सुपर स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम (एसएमएस), हैप्पी सीडर, पैडी स्ट्रा चोपर/श्रेडर/मल्चर, शर्ब मास्टर/रोटरी स्लेशर, हाईड्रोलिक रिवर्सिबल एमबी प्लाऊ, जीरो टिल सीड ड्रिल, ट्रैक्टर, रीपर बाइंडर (ट्रैक्टर पर लगने वाला, स्व-चलित, तीन व्हील व चार व्हील), सुपर सीडर, बेलर जैसे कृषि यंत्रों पर अनुदान दिया जाता है।
कृषि मंत्री ने कहा कि धान अवशेष प्रबंधन के लिए किसानों को प्रति एकड़ 1,000 रुपए की धान पर प्रोत्साहन राशि दी जा रही है। “मेरा पानी मेरी विरासत” योजना के तहत, धान के स्थान पर अन्य फसलों को अपनाने या खेत खाली छोड़ने पर 7,000 रुपए प्रति एकड़ तथा धान की सीधी बुवाई विधि अपनाने पर किसानों को 4,000 रुपए प्रति एकड़ की दर से सहायता दी जा रही है। रेड जोन पंचायतों को पराली जलाने से रोकने के लिए 1,00,000 रुपए तक की प्रोत्साहन राशि दी जा रही है।
हाल ही में हरियाणा सरकार ने रबी विपणन वर्ष 2025-26 के लिए किसानों को गेहूं उपार्जन पर बोनस राशि 175 रुपए प्रति क्विंटल भुगतान किए जाने का निर्णय लिया है। इसके अनुसार, इस वर्ष गेहूं का उपार्जन 2600 रुपए प्रति क्विंटल की दर से किया जाएगा। इसमें गेहूं की एमएसपी दर 2425 रुपए प्रति क्विंटल और 175 रुपए प्रति क्विंटल बोनस दिया जाएगा। धान उपार्जन के अंतर्गत खरीफ विपणन वर्ष 2024 में धान का विक्रय करने वाले किसानों को प्रति हेक्टेयर 4000 रुपए राशि के मान से 6.70 लाख धान उत्पादक किसानों को प्रोत्साहन दिया जाएगा, जिसके लिए राज्य सरकार 480 करोड़ रुपए की राशि खर्च करेगी।
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