पीएम फसल बीमा योजना (PMFBY) के अंतर्गत अभी तक जिन किसानों ने अपनी खरीफ फसलों का बीमा नहीं कराया है, उनके लिए अच्छी खबर है। केंद्र सरकार एवं कई राज्य सरकारों ने किसानों को राहत देते हुए फसल बीमा की अंतिम तारीख यानी डेडलाइन को बढ़ाकर अब 31 जुलाई 2025 कर दिया है। यह कदम किसानों को प्राकृतिक आपदाओं से फसल नुकसान की स्थिति में मुआवजा सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है। ऐसे में जो किसान अभी तक इससे चूक गए थे, उनके पास एक और अवसर है कि वो फिर से अधिसूचित फसलों का बीमा कराकर फायदा उठा सकते हैं। इस लेख में हम जानेंगे कि फसल बीमा कराने के लिए आवेदन कैसे करें, फसल के लिए प्रीमियम राशि का भुगतान कितना होगा, योजना में किन फसलों को अधिसूचित किया गया है?
दरअसल, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों ने पहले ही फसल बीमा योजना की डेडलाइन को आगे बढ़ा दिया था। अब हिमाचल प्रदेश सरकार ने भी किसानों को बड़ी राहत देते हुए धान और मक्का जैसी प्रमुख फसलों के लिए बीमा कराने की डेडलाइन (समय सीमा) को आगे बढ़ा दिया है। विशेष रूप से हमीरपुर जिले में इन फसलों की बीमा कराने की अंतिम तारीख को बढ़ा दिया गया है, तकनीकी कारणों से आवेदन प्रक्रिया बाधित हो रही थी, जिसे ध्यान में रखते हुए सरकार द्वारा यह निर्णय लिया गया। इसका सीधा लाभ उन किसानों को होगा, जिन्होंने किसी कारणवश अब तक बीमा नहीं करवाया था। वे अब समय रहते योजना में आवेदन करके अपनी फसलों को बीमा सुरक्षा कवच दे सकते हैं। बीमा कराने से प्राकृतिक आपदा, बारिश, सूखा, ओलावृष्टि या कीट-बीमारियां से फसलों में होने वाले नुकसान की स्थिति में किसान मुआवजे के पात्र बनते हैं।
सरकार की जानकारी के अनुसार, खरीफ 2025 के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की अधिसूचना जारी की गई है। योजना के तहत मक्का और धान की फसलों के लिए बीमा की समय सीमा को 15 जुलाई से बढ़ाकर 31 जुलाई करने का फैसला किया गया है। कृषि विभाग हमीरपुर के उपनिदेशक शशि पाल अत्री की तरफ से बताया गया है कि जिले में इस खरीफ मौसम में पीएम फसल बीमा योजना के तहत मक्का और धान की फसलों का बीमा किया जा रहा है। रजिस्ट्रेशन कराने के लिए पहले डेडलाइन 15 जुलाई निर्धारित थी, जिसे अब 31 जुलाई 2025 तक बढ़ा दिया गया है।
हरियाणा सरकार द्वारा खरीफ सत्र-2025 के लिए फसल बीमा योजना के तहत जारी अधिसूचना के मुताबिक, किसान धान, कपास, बाजरा, मक्का सहित अन्य खरीफ फसलों का बीमा 31 जुलाई तक कर सकते हैं, जबकि राजस्थान में बाजरा, मूंग, मोठ, ग्वार, कपास, धान, तिल और मूंगफली फसलों के लिए किसान पीएमएफबीवाई के तहत आवेदन कर सकते हैं, जबकि किन्नू और मिर्च जैसी नकदी फसलों का बीमा पंजीयन पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना के तहत करा सकते हैं।
अधिकारियों के मुताबिक, फसल बीमा योजना के अंतर्गत अधिसूचित हर फसल के लिए बीमा प्रीमियम और बीमित राशि तय की गई है, जिससे किसानों को किसी कारणवश जैसे बारिश, सूखा, कीटों के प्रकोप, ओलावृष्टि या कोई अन्य प्राकृतिक आपदा से फसल नुकसान होता है, तो उनके फसल खराबे की भरपाई के लिए उचित मुआवजा मिल सके।
कृषि विभाग हमीरपुर के उपनिदेशक के अनुसार, जिले में खरीफ मक्का और धान की फसलों का बीमा कराने के लिए 1,200 रुपए प्रति हेक्टेयर का प्रीमियम तय किया गया है और प्रति हेक्टेयर बीमित राशि 60,000 रुपए होगी। फसल बीमा योजना 2025 के बारे में यदि किसानों को कोई सलाह या परामर्श चाहिए तो वह विभागीय अधिकारियों से संपर्क कर सकते हैं।
कृषि एवं किसान कल्याण विभाग हरियाणा के अनुसार, राज्य में जो किसान धान, बाजरा, मक्का व कपास जैसी खरीफ फसलें बो रहे हैं, वे सभी पीएम फसल बीमा योजना (PM Crop Insurance Scheme) में शामिल होकर बीमा का लाभ ले सकते हैं। विभाग के एक प्रवक्ता ने बताया कि खरीफ-2025 की फसलों की प्रीमियम राशि धान फसल के लिए 2124.98 रुपए, बाजरा के लिए 1024.36 रुपए, मक्का के लिए 1089.74 रुपए एवं कपास फसल के लिए 5435.05 रुपए प्रति हेक्टेयर निर्धारित है।
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत राज्य के अधिसूचीत फसलों के लिए किसानों को बीमा कराने के लिए निर्धारित बीमा प्रीमियम राशि अदा करनी होगी :-
फसल बीमा के लिए किसानों को कुल बीमित राशि का केवल 2 प्रतिशत प्रीमियम देना होगा, बाकि राशि केंद्र सरकार और राज्य सरकार द्वारा वहन किया जाएगा। बीमा योजना में किए गए प्रावधान अनुसार, अगर बुवाई किसी कारणवश बाधित या असफल रह जाती है, तो बीमित राशि का 25 प्रतिशत तक क्षतिपूर्ति के रूप में बीमा कंपनी भुगतान करेगी। वहीं, बुवाई से लेकर कटाई तक की अवधि में फसल को बेमौसमी वर्षा, बाढ़, ओलावृष्टि, प्राकृतिक आग एवं अन्य किसी प्राकृतिक आपदा से फसल क्षति होती है, तो फसल कटाई प्रयोग के आधार पर क्षति का आंकलन कर बीमित किसान को मुआवजा दिया जाएगा।
फसल बीमा योजना के तहत फसली ऋण (केसीसी) लेने वाले किसानों का बीमा संबंधित बैंक शाखा द्वारा स्वत: कर दिया जाएगा। यदि ऋणी किसान फसल बीमा नहीं करवाना चाहते हैं, तो संबंधित बैंक को लिखित में अंतिम तिथि से सात दिन पहले तक सूचित करना होगा। वे कृषक जिन्होंने फसली ऋण नहीं लिया है, वे अपना फसल बीमा राष्ट्रीय फसल बीमा पोर्टल, नजदीकी बैंक शाखा, पैक्स, डाकघर, सीएससी केंद्र या बीमा कंपनी के अधिकृत प्रतिनिधियों के माध्यम से करवा सकते हैं।
गैर-ऋणी किसानों को पीएम फसल बीमा आवेदन पत्र के साथ आधार कार्ड, नवीनतम जमाबंदी की नकल, स्वयं प्रमाणित घोषणा पत्र जिसमें खसरा संख्या, फसल क्षेत्र, मालिकाना विवरण व बीमा हित की प्रकृति (स्वयं या बंटाईदार) दर्ज हो तथा बैंक पासबुक की फोटो प्रति देना अनिवार्य होगा। किसान बीमा के समय अपना मोबाइल नंबर जरूर दर्ज कराएं, जिससे समय-समय पर SMS के माध्यम से उन्हें बीमा से जुड़ी जानकारी मिलती रहे।
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