केसीसी : किसानों को खेती, पशु व मत्स्य पालन के लिए बिना गारंटी लोन

केसीसी : किसानों को खेती, पशु व मत्स्य पालन के लिए बिना गारंटी लोन
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कृषि, पशुपालन व मत्स्य पालन के लिए केसीसी लोन, ब्याज दर कम

Kisan Credit Card Loan Scheme : किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) ऋण योजना के तहत किसानों को कृषि एवं कृषि के तर्ज पर ही पशु व मत्स्य पालन के लिए ऋण सुविधा सुनिश्चित की जा रही है। केसीसी के तहत किसान कम ब्याज दर पर ऋण प्राप्त कर खेती में निवेश कर सकते हैं। इस बीच बिहार सरकार द्वारा राज्य के किसानों को केसीसी ऋण योजना के माध्यम से कृषि के क्षेत्र के लिए ऋण दिया जा रहा है। इसके अलावा, पशु व मत्स्य पालन के लिए भी किसानों को 1.60 लाख रुपए तक का केसीसी ऋण उपलब्ध करवाया जा रहा है। खास बात यह है कि इसके लिए कोई प्रोसेसिंग फीस नहीं है, साथ ही ऋण स्वीकृति के लिए कोलेट्रल सिक्योरिटी की आवश्यकता नहीं है और न ही एसेट मॉर्गेज करने की जरूरत है। किसान क्रेडिट कार्ड ऋण योजना (Kisan Credit Card Loan Scheme) के तहत 56 हजार से अधिक किसानों को विभिन्न कृषि कार्यों के लिए लोन मिला है। बाकी किसानों को केसीसी लोन उपलब्ध कराने के लिए जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिए गए हैं। आइए, इस लेख की मदद से इस बारे में विस्तार से जानते हैं।  

56,576 किसानों को दिया किसान क्रेडिट कार्ड लोन (Kisan Credit Card loan given to 56,576 farmers)

जिला कलक्ट्रेट सभागार में उपमुख्यमंत्री- सह कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा की अध्यक्षता में जिला कृषि टास्क फोर्स की बैठक आयोजित हुई। इस बैठक में कृषि विभाग की योजनाओं की समीक्षा की गई और अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि विभागीय योजनाओं का प्रचार-प्रसार कर प्रत्येक किसान तक सटीक और समय पर लाभ पहुंचाया जाना सुनिश्चित करें। बैठक में अधिकारियों ने बताया कि अब तक 56,576 किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) ऋण दिया जा चुका है। उपमुख्यमंत्री ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि वित्तीय वर्ष के मुताबिक, रिपोर्ट तैयार की जाए और बाकी किसानों को भी लोन दिलाने के लिए जागरूकता अभियान चलाया जाए। 

खाद की जरूरत से ज्यादा उपलब्धता (Excess availability of fertilizers)

बैठक में अधिकारियों ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए यूरिया, डी.ए.पी और एम.ओ.पी जैसे खादों की जरूरत से ज्यादा उपलब्धता रही, लेकिन बिक्री अपेक्षाकृत कम हुई। यूरिया की आवश्यकता 50 हजार एमटी थी और उपलब्धता 53,930 एमटी। वहीं, डीएपी की जरूरत 12,500 एमटी और उपलब्धता 14,713 एमटी थी। इसी प्रकार, एमओपी की जरूरत 5,400 एमटी थी, जबकि उपलब्धता 8,923 एमटी थी। उपमुख्यमंत्री ने खादों की कालाबाजारी रोकने के लिए छापेमारी कर सख्त कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए है। मृदा जांच की समीक्षा में पाया गया कि जिले के सभी प्रखंडों की मिट्टी में नाइट्रोजन की भारी कमी है, जिस पर किसानों को मिट्टी की जांच कराने और सही उर्वरकों के उपयोग के लिए जागरूक करने का निर्देश दिया गया। सरकार द्वारा इस वर्ष 15,000 किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड वितरित किए गए हैं। 

पैक्स समितियों को प्रदान किया जाएगा अनुज्ञप्ति (PACS committees will be provided license)

बैठक में बीज एवं उर्वरक के वितरण की स्थिति पर चर्चा करते हुए “पैक्स” की भूमिका में आई कमी पर चिंता व्यक्त की गई। उर्वरक वितरण के लिए पैक्सों हेतु 15 दिवसीय प्रशिक्षण के पश्चात अनुज्ञप्ति प्रदान की जाती है, लेकिन वर्तमान में प्रशिक्षण की कार्रवाई गति धीमी होने के कारण कई पैक्सों को अनुज्ञप्ति प्राप्त होने में परेशानी हो रही है। उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने पूरे वर्ष का प्रशिक्षण कैलेण्डर निर्गत करने का आश्वासन दिया, जिसमें इच्छुक पैक्स प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे, जिसके बाद कैम्प लगाकर पैक्स समितियों को अनुज्ञप्ति प्रदान किया जाएगा।  

अधिकारियों ने बताया कि बीज के लिए काई प्रशिक्षण जरूरी नहीं है, इच्छुक पैक्स इसके लिए सीधे ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं, इन्हें प्राथमिकता के आधार पर अनुज्ञप्ति प्रदान किया जाएगा। जिले में 80 फीसदी धान अधिप्राप्ति पूरी हो चुकी है। साथ ही आत्मा योजना के अंतर्गत किसानों को प्रशिक्षण देने और उन्हें तकनीकी जानकारी से लैस करने पर फोकस किया गया। 

पशु व मत्स्य पालन को दिया गया कृषि का दर्जा (Animal and fish farming given the status of agriculture)

बिहार सरकार द्वारा पशु व मत्स्य पालन को भी कृषि का दर्जा दिया गया है, इसके तहत अब किसानों को कृषि की तर्ज पर ही पशु व मछली पालन के लिए केसीसी ऋण दिया जाएगा। इससे पहले किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) ऋण योजना का लाभ केवल खेती करने वाले किसानों तक ही सीमित था। पशु एवं मत्स्य पालन के क्षेत्र में पशु व मछली पालकों को केसीसी की सुविधा उसके प्रबंधन के लिए दी जा रही है, ताकि वे उसके चारे की व्यवस्था, उसका उपचार व रख-रखाव करने के साथ ही उसे विकसित कर सकें। अभी तक आर्थिक तंगी के कारण कई पशु पालक पशुओं व मछली पालक मछलियों को सही से चारा नहीं दे पाते हैं, जिससे उन्हें कम लाभ हो रहा है। लेकिन अब कम ब्याज दर पर ऋण की सुविधा मिलने से पशुपालन को काफी बढ़ावा मिलेगा, जिससे पशुपालकों की आय में वृद्धि से उसकी आर्थिक स्थिति में सुधार होगा। 

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