छत्तीसगढ़ में किसानों की फसलों को कीट और रोगों से होने वाले नुकसान से बचाने के लिए फसल स्वास्थ्य प्रबंधन पर खास ध्यान दिया जा रहा है। इसका मकसद फसल की पैदावार और उसकी गुणवत्ता को बनाए रखना है।
फसलों में कीट और रोग का प्रकोप किसानों के लिए बड़ी परेशानी बन सकता है। अगर समय पर समस्या की पहचान न हो या बिना सही जानकारी के दवा का छिड़काव कर दिया जाए, तो फसल को नुकसान हो सकता है और खेती की लागत भी बढ़ सकती है। इसलिए किसानों को सलाह दी गई है कि फसल में कोई असामान्य लक्षण दिखे तो पहले वैज्ञानिक तरीके से उसकी जांच कराएं, उसके बाद ही सही उपाय अपनाएं।
कृषि विकास एवं किसान कल्याण मंत्री श्री रामविचार नेताम के निर्देश पर किसानों को प्रोत्साहित किया जा रहा है कि वे कीट और रोग को समय रहते पहचानें, वैज्ञानिक तरीके से उनकी जांच कराएं और सही उपाय अपनाएं।
इसके लिए किसान इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय (आईजीकेवी), रायपुर की डिजिटल सुविधाओं, कृषि विज्ञान केंद्रों के वैज्ञानिकों और क्षेत्रीय कृषि परामर्श सेवाओं की मदद ले सकते हैं।
इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय का क्रॉप डॉक्टर (Crop Doctor) ऐप किसानों को फसल में होने वाली बीमारियों और कीटों की समस्या समझने में मदद करता है। अगर फसल की पत्तियां पीली पड़ रही हैं, उन पर धब्बे दिखाई दे रहे हैं या पौधे मुरझा रहे हैं, तो किसान इस ऐप से समस्या के संभावित कारणों और उनके प्रबंधन के बारे में जानकारी ले सकते हैं। इसके अलावा, तने और जड़ों को नुकसान पहुंचने या फसल पर कीट लगने जैसी समस्याओं के बारे में भी जानकारी मिल सकती है।
हालांकि, ऐप से मिली जानकारी के आधार पर ही बीमारी का पक्का पता नहीं लगाया जा सकता। अगर समस्या गंभीर है या उसके कारण समझ नहीं आ रहे हैं, तो किसान कृषि विशेषज्ञों से सलाह लेकर सही जानकारी प्राप्त करें।
फसल को कीटों और बीमारियों से बचाने के लिए सही समय पर कृषि सलाह लेना जरूरी है। फसल की स्थिति, मौसम और इलाके के अनुसार कीटों और बीमारियों का खतरा बदल सकता है। इसलिए किसानों को समय-समय पर जरूरी जानकारी लेते रहना चाहिए।
कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) और इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय से जुड़ी सेवाओं के जरिए किसानों को मोबाइल संदेशों पर खेती से जुड़ी सलाह दी जाती है। किसानों को सलाह दी जाती है कि वे अपने क्षेत्र के लिए जारी आधिकारिक कृषि सलाह को ध्यान से पढ़ें और उसके अनुसार फसल की देखभाल करें।
अगर फसल में असामान्य लक्षण दिखाई दें, कीट या बीमारी की पहचान न हो पा रही हो या सामान्य उपाय अपनाने के बाद भी फायदा न मिले, तो किसान अपने जिले के कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) के वैज्ञानिकों से संपर्क कर सकते हैं।
सलाह लेते समय किसान फसल का नाम, उसकी किस्म और फसल की वर्तमान अवस्था की जानकारी दें। साथ ही, प्रभावित पौधों और पत्तियों की साफ तस्वीरें, फसल को हुए नुकसान का विवरण और हाल ही में इस्तेमाल किए गए खाद व दवाओं की जानकारी भी साझा करें। इससे वैज्ञानिकों को समस्या का कारण समझने और सही उपाय बताने में मदद मिलेगी। जरूरत पड़ने पर फसल के नमूनों की जांच या खेत का निरीक्षण भी किया जा सकता है।
कीटनाशकों का इस्तेमाल करने से पहले किसानों को सलाह दी जाती है कि:
समय पर फसल की समस्या पहचानने और सही उपाय अपनाने से नुकसान कम करने, खेती की लागत को नियंत्रित रखने और उपज की गुणवत्ता बनाए रखने में मदद मिल सकती है। किसानों को फसल की नियमित निगरानी करनी चाहिए और जरूरत पड़ने पर इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय व कृषि विज्ञान केंद्रों के वैज्ञानिकों से सलाह लेनी चाहिए। इससे फसल को स्वस्थ रखने और कीटों व बीमारियों से बचाने में मदद मिल सकती है।
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