देश के कई राज्यों में सरकारें किसानों को कृषि ऋण के बोझ से राहत देने के लिए ऋण माफी और ब्याज में छूट जैसी योजनाएं लागू करती हैं। इनका उद्देश्य किसानों पर लोन का आर्थिक बोझ कम करना और उनके खातों को नियमित कर उन्हें दोबारा बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ना है। इससे किसानों को भविष्य में बीज-खाद खरीदने, फसल कटाई समेत खेती के अन्य जरूरी कामों के लिए बैंक से वित्तीय सहायता मिल सकेगी।
इसी क्रम में हिमाचल प्रदेश के किसानों के लिए राहत की खबर है। प्रदेश सरकार ने किसानों, बागवानों और कामगारों को राहत देने के लिए कृषि ऋण ब्याज अनुदान योजना लागू की है। इसके तहत हिमाचल प्रदेश राज्य सहकारी कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक से 3 लाख रुपए तक का दीर्घकालीन कृषि ऋण लेने वाले पात्र ऋणधारकों को लाभ मिलेगा। योजना में 31 मार्च 2025 तक के संचित बकाया ब्याज का 50 प्रतिशत राज्य सरकार वहन करेगी।
राज्य सहकारी कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक के अध्यक्ष संजय सिंह चौहान ने शिमला में पत्रकार वार्ता के दौरान यह जानकारी दी।
संजय सिंह चौहान ने बताया कि इस योजना में पात्र किसानों को दीर्घकालीन कृषि ऋण के बकाया ब्याज पर राहत मिलेगी। 31 मार्च 2025 तक संचित बकाया ब्याज की 50 प्रतिशत राशि सरकार वहन करेगी। इस योजना से उन किसानों को राहत मिलने की उम्मीद है, जिन पर सहकारी कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक का दीर्घकालीन कृषि ऋण बकाया है और ऋण अदायगी न होने से उनकी कृषि भूमि नीलामी की कगार पर पहुंच गई है। ध्यान रहे कि सरकार मूल ऋण की पूरी राशि माफ नहीं कर रही है। वह निर्धारित अवधि तक के संचित बकाया ब्याज का 50 प्रतिशत हिस्सा वहन करेगी।
उन्होंने बताया कि इसे सरकार की बजट घोषणा को जमीन पर उतारने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। योजना के तहत 3 लाख रुपए तक का दीर्घकालीन कृषि ऋण लेने वाले पात्र ऋणधारकों को ब्याज अनुदान दिया जाएगा। लाभ पाने के लिए पात्र लाभार्थियों को 31 दिसंबर 2026 तक अपने डिफॉल्ट खाते की बकाया किस्तें और देय राशि जमा करानी होगी। इस योजना पर राज्य सरकार लगभग 24.81 करोड़ रुपए खर्च करेगी।
कृषि कार्यों के लिए लिया गया ऋण किसानों के लिए खेती की लागत पूरी करने का अहम साधन होता है। लेकिन समय पर भुगतान न होने पर ब्याज का बोझ बढ़ सकता है। ऐसे में ब्याज अनुदान से पात्र किसानों को अपने बकाया ऋण के ब्याज का बोझ कम करने में मदद मिल सकती है। इस योजना से प्रदेश के 6,356 किसानों, बागवानों और कामगारों को सीधा लाभ मिलेगा।
अध्यक्ष संजय सिंह चौहान ने बताया कि योजना का उद्देश्य डिफॉल्ट और एनपीए खातों को नियमित करना, किसानों को दोबारा बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ना और भविष्य में संस्थागत कृषि ऋण पाने में मदद करना है। इसकी घोषणा बजट में की गई थी। पिछले एक साल से इस पर विचार चल रहा था और हाल ही में कैबिनेट ने इसे मंजूरी दी है।
इसके अलावा, बैंक ने पुराने एनपीए खातों के निपटारे के लिए वन टाइम सेटलमेंट (OTS) स्कीम-2026 भी शुरू की है। इसके तहत पात्र ऋणधारकों को नियमित ब्याज में 25 प्रतिशत की छूट मिलेगी, जबकि पेनल ब्याज और कानूनी शुल्क पूरी तरह माफ किए जाएंगे। वर्तमान में इस योजना के दायरे में 437 पात्र ऋण खाते हैं। इन खातों पर लगभग 16.94 करोड़ रुपए मूलधन और 24.56 करोड़ रुपए का ब्याज बकाया है।
कृषि ऋण पर ब्याज का बोझ कम होने से पात्र किसानों को बकाया ऋण चुकाने में राहत मिल सकती है और उन पर आर्थिक दबाव घट सकता है। साथ ही, किसान अपनी उपलब्ध राशि का उपयोग खेती और दूसरे जरूरी कृषि कार्यों में कर सकते हैं।
लाभ लेने से पहले किसान अपने कृषि ऋण, बकाया ब्याज और पात्रता की जानकारी संबंधित सहकारी कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक से जरूर लें। यह भी पूछ लें कि किस ऋण खाते और किस अवधि के बकाया ब्याज पर अनुदान लागू होगा। किसानों को यह भी समझना चाहिए कि यह ब्याज अनुदान योजना है, जिसमें निर्धारित शर्तों के अनुसार बकाया ब्याज के 50 प्रतिशत हिस्से का भुगतान सरकार करेगी।
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