महाराष्ट्र के बीड जिले में किसानों को कभी सूखे के कारण, तो कभी ज्यादा बारिश के कारण खेती में परेशानी होती है। इसके बावजूद कुछ किसान नई तकनीक अपनाकर अच्छी कमाई कर रहे हैं। ऐसे ही एक किसान हैं बीड जिले के केज तालुका के साळेगाव गांव के कैलास प्रल्हाद जाधव। उन्होंने 4 एकड़ जमीन पर अदरक की खेती शुरू की और पिछले 5 साल में इससे करीब 50 लाख रुपये की आय हासिल की। ड्रिप सिंचाई, सोलर पंप और सही योजना की मदद से उन्होंने पानी की कमी के बावजूद खेती जारी रखी है। इस सीजन में उन्हें 4 एकड़ जमीन से करीब 400 क्विंटल अदरक का उत्पादन होने की उम्मीद है।
महाराष्ट्र के मराठवाड़ा क्षेत्र का बीड जिला सूखे की समस्या से जूझता रहता है। यहां कभी कम बारिश होती है, तो कभी ज्यादा बारिश से फसलों को नुकसान पहुंचता है। ऐसे में किसानों के लिए ज्यादा पानी की जरूरत वाली फसल उगाना मुश्किल हो जाता है।
किसान कैलास जाधव का परिवार पहले गन्ने की खेती करता था। गन्ने की फसल में ज्यादा पानी लगता है और उन्हें इससे अच्छी कमाई भी नहीं हो रही थी। इसलिए उन्होंने खेती का तरीका बदलने का फैसला किया और अदरक की खेती शुरू कर दी।
कैलास जाधव साल 2020 से नियमित रूप से अदरक उगा रहे हैं। उनके मुताबिक, पिछले पांच साल में उन्हें अदरक की खेती से करीब 50 लाख रुपये की आय हुई है। इस सफलता से उन्हें खेती के नए तरीके अपनाने की प्रेरणा भी मिली।
कैलास जाधव का परिवार संयुक्त परिवार है और उसके पास कुल 45 एकड़ जमीन है। बीड जैसे सूखाग्रस्त इलाके में खेती के लिए पानी का इंतजाम करना बड़ी चुनौती है। इससे निपटने के लिए उनके परिवार ने खेत में एक कुआं और दो बोरवेल बनवाए हैं। इसके अलावा, 16 एकड़ जमीन पर ड्रिप सिंचाई की व्यवस्था की है।
ड्रिप सिंचाई में पाइप और छोटी नलियों की मदद से पानी सीधे पौधों की जड़ों तक पहुंचाया जाता है। इससे पानी की बर्बादी कम होती है और फसल को जरूरत के अनुसार पानी देना आसान हो जाता है।
पानी की कमी वाले इलाकों में यह तकनीक किसानों के लिए उपयोगी साबित हो सकती है। हालांकि, अच्छी फसल के लिए मिट्टी की गुणवत्ता, सही मात्रा में खाद और समय पर देखभाल करना भी जरूरी है।
खेती में सिंचाई के लिए बिजली की जरूरत होती है, लेकिन कई बार बिजली समय पर नहीं मिल पाती। इस समस्या को दूर करने के लिए किसान कैलास जाधव ने सौर ऊर्जा का इस्तेमाल शुरू किया। साल 2024 में उन्होंने महाराष्ट्र सरकार की ‘मागेल त्याला सौर ऊर्जा प्रकल्प’ योजना के तहत अपने खेत में सोलर पंप लगवाया।
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, इस परियोजना पर उन्हें 90 प्रतिशत सब्सिडी मिली। इसके अलावा, ड्रिप सिंचाई सिस्टम लगाने के लिए कृषि विभाग से 40 प्रतिशत अनुदान भी मिला। सोलर पंप से सिंचाई करने पर बिजली पर निर्भरता कम करने में मदद मिली। इससे खेती का खर्च संभालना भी आसान हुआ।
कैलास जाधव का उदाहरण बताता है कि सरकारी योजनाओं और आधुनिक तकनीक का सही इस्तेमाल करके किसान सिंचाई से जुड़ी समस्याओं को कम कर सकते हैं।
कैलास जाधव ने इस सीजन में 1 जून 2026 को 4 एकड़ जमीन पर अदरक की बुवाई की। उनकी फसल की कटाई जनवरी से फरवरी 2027 के बीच होने की उम्मीद है। उन्होंने खेत में बेड बनाकर अदरक लगाया है। खेत तैयार करते समय गोबर की खाद के साथ शुरुआती मात्रा में रासायनिक खाद भी डाली गई।
कैलास जाधव ने अदरक की बुवाई के लिए करीब डेढ़ लाख रुपये के बीज खरीदे। वहीं, बीज की बुवाई और खेत तैयार करने पर कुल खर्च लगभग ढाई से तीन लाख रुपये बताया गया है।
अदरक की खेती में बीज, खेत की तैयारी, खाद, सिंचाई और फसल की देखभाल पर खर्च होता है। इसलिए अच्छी पैदावार के साथ खेती की लागत पर ध्यान देना भी जरूरी है, ताकि किसान अपनी कमाई बढ़ा सकें।
इस साल महाराष्ट्र के बीड जिले में मौसम किसानों की उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा। किसान कैलास जाधव के मुताबिक, अगर अच्छी बारिश होती, तो उन्हें 4 एकड़ जमीन से कम से कम 600 क्विंटल अदरक उत्पादन मिलने की उम्मीद थी। हालांकि, मौजूदा हालात को देखते हुए वह प्रति एकड़ औसतन 100 क्विंटल उत्पादन का अनुमान लगा रहे हैं। इस हिसाब से 4 एकड़ जमीन से करीब 400 क्विंटल अदरक मिल सकता है।
फिलहाल यह किसान का अनुमान है। असल उत्पादन का पता फसल की कटाई के बाद ही चलेगा। बारिश, सिंचाई, तापमान और फसल की देखभाल जैसे कई कारक अदरक की पैदावार को प्रभावित कर सकते हैं।
कैलास जाधव के अनुसार, अभी बाजार में अदरक का भाव लगभग 15,000 से 17,000 रुपये प्रति क्विंटल चल रहा है। लेकिन उनकी फसल की कटाई जनवरी से फरवरी 2027 में होगी। उस समय भाव क्या होगा, यह अभी कोई नहीं कह सकता।
शुरू में जाधव अदरक बेचने के लिए नांदेड़ की मंडी जाते थे। अब उनकी अदरक की क्वालिटी अच्छी होने से छत्रपति संभाजीनगर के व्यापारी खुद खेत पर आकर माल खरीद लेते हैं। इससे उन्हें खरीदार ढूंढने की परेशानी नहीं होती।
अगर इस सीजन में 400 क्विंटल अदरक निकलती है, तो आज के भाव से कुल बिक्री लगभग 60 से 68 लाख रुपये तक हो सकती है। लेकिन यह सिर्फ आज के भाव के आधार पर लगाया गया अनुमान है। कटाई के समय भाव ऊपर-नीचे हो सकता है। साथ ही इसमें से बीज, खाद, मजदूरी, सिंचाई और दूसरे खर्च भी घटाने होंगे। इसलिए इस रकम को शुद्ध मुनाफा नहीं कहा जा सकता।
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