Promotion of production of Shri Anna : श्री अन्न यानी मोटे अनाज के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार द्वारा “श्री अन्न योजना” की शुरुआत की गई। इस योजना के अंतर्गत देश के कई राज्यों में किसानों को मोटे अनाज (मिलेट्स) की खेती करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसमें सरकार द्वारा सिंचाई व्यवस्था, उन्नत बीज और कृषि उपकरण के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है। साथ ही, किसानों को मोटे अनाजों (श्री अन्न) की खेती और बेहतर उत्पादकता के लिए तकनीकी कृषि प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। ऐसे में अब मध्यप्रदेश में श्री अन्न फसलों की खेती करने वाले किसानों को भारी प्रोत्साहन और मोटे अनाज के उत्पादन को एक नई दिशा मिलेगी। किसान-कल्याण तथा कृषि विकास विभाग की समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश में रागी, कोदो, कुटकी, ज्वार-बाजरा, मक्का जैसे श्रीअन्न का उत्पादन बढ़ाया जाए और किसानों को श्रीअन्न उत्पादन (ShriAnn Production) के लिए प्रोत्साहित किया जाए। किसानों द्वारा उत्पादित “श्री अन्न” अब सरकार खरीदेगी। उन्होंने तुअर उत्पादक किसानों को अच्छे किस्म के खाद, बीज और उत्पादन वृद्धि के लिए प्रोत्साहन देने के भी निर्देश दिए। इसके लिए किसानों को फसल पर सब्सिडी देने के साथ ही फसल का बीमा कराने जैसे नवाचार भी किए जा सकते हैं।
बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि फसलों का उत्पादन बढ़ाने के लिए हर संभव प्रयास किए जाए। प्रदेश के किसानों को रासायनिक उर्वरकों के स्थान पर उन्नत किस्म के बीज, आधुनिक कृषि यंत्रों, अच्छा भाव, अनुदान आदि का प्रोत्साहन मिले। उन्होंने कहा कि श्रीअन्न रागी, कोदो-कुटकी, मक्का, ज्वार, बाजरा की फसलों को प्रोत्साहन दिया जाए। सभी फसलों के उत्पादक क्षेत्र को अच्छी पैदावार करने के लिए प्रोत्साहन मिले। जरूरत पड़ने पर अनुदान (Subsidy) की राशि भी बढ़ाई जाए। बैठक में बताया कि प्रदेश शासन की प्रगतिशीलता से राज्य में पैदा होने वाली तीन फसलों को बहुत जल्द जीआई-टैग (GI-Tag) मिल जाएगा। डिंडोरी जिले की नागदमन मकुटकी, सिताही कुटकी और बैंगनी अरहर की फसल को जीआई टैग परीक्षण के लिए भेजा गया है, उम्मीद है कि जल्द ही इन फसलों को जीआई टैग प्राप्त होगा। ई-अनुज्ञा प्रणाली लागू करने के बाद प्रदेश की सभी 259 मंडियों में ई-मंडी योजना भी लागू कर दी गई है। सभी मंडियों में अब डिजिटल तरीके से रिकार्ड कीपिंग की जा रही है।
मुख्यमंत्री ने प्रदेश की सभी मंडियों में प्रबंधन पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सभी मंडियों का विभागीय निरीक्षण वरिष्ठ अधिकारियों से करायें। मंडियों की व्यवस्थाओं को और भी बेहतर बनाया जाए। नई जरूरतों के मुताबिक अब अलग-अलग मंडियों की स्थापना पर विचार किया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मंडियों का फसलवार मॉडल तैयार करें। कृषि उपज मंडी के अलावा अब फल व सब्जी मंडी, मसाला मंडी या अन्य विशेष पैदावार की मंडी स्थापना के लिए भी प्रयास किए जाएं। इसके लिए रोडमैप तैयार किया जाए और अगर आवश्यकता है तो इसमें प्राइवेट सेक्टर को भी सम्मिलित किया जाए। उन्होंने कहा कि मंडियों में जारी वर्तमान व्यवस्थाओं का समुचित तरीके से किसानों के हित में प्रबंधन किया जाए। मंडी शुल्क की प्राप्त राशि से किसानों की कल्याण गतिविधियों पर फोकस किया जाए।
डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश की कृषि उपज मंडियों को आदर्श बनाया जाए। मंडियों में कृषि आधारित सभी व्यवस्थाएं सुनिश्चित हों। मंडियों में किसानों को फसल बेचने में किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। मंडी में अपनी फसल बेचने आने वाले प्रत्येक किसान को उसकी उपज का सही दाम मिले किसी का भी नुकसान न होने पाए। सभी मंडियां अपने विकास कार्यों के लिए आत्मनिर्भर बनें। उन्होंने कृषि अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे स्थानीय निकायों से नई मंडियों की स्थापना/ फसल भंडारण क्षमता बढ़ाने के लिए समन्वय करें, ताकि किसानों को अपनी फसल बेचने के लिए अधिक सुविधाएं मिल सकें।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार ने प्रदेश के हर संभाग में किसान मेलों का आयोजन करने का निर्णय लिया है। इन मेलों में कृषि आधारित उद्योगों में निवेश पर जोर दिया जा रहा है। मंदसौर जिले के सीतापुर में आयोजित कार्यक्रम में किसानों को कृषि के आधुनिक यंत्रों और तकनीक से अवगत कराया गया। उन्होंने कहा कि किसानों को हैप्पी सीडर कृषि यंत्र का उपयोग करने के लिए जागरूक किया जाए। उन्होंने कृषि यंत्रों को प्रोत्साहन और प्रत्येक ग्राम पंचायत में हैप्पी सीडर कृषि यंत्र की व्यवस्था करने के निर्देश दिए। बैठक में सचिव कृषि ने बताया कि आगामी 26, 27 एवं 28 मई को जिला मुख्यालय नरसिंहपुर में कृषि आधारित उद्योगों का सम्मेलन सह विशाल कृषि मेला आयोजित किया जाएगा। इसमें कृषि आधारित उद्योगों के बारे में जानकारी के अलावा दुग्ध उत्पादन, मत्स्य उत्पादन, शाक-सब्जी उत्पादन, श्रीअन्न उत्पादन, उद्यानिकी, बागवानी, उन्नति किस्म के बीज, खाद, उर्वरक की जानकारी सहित उन्नत कृषि उपकरणों का प्रदर्शन भी किया जाएगा।
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