काले टमाटर की खेती : काले टमाटर की उन्नत खेती, किसानों को मिलेंगा बढि़या मुनाफा

Posted -10 December 2022 Share Post

जानिए, काले टमाटर की खेती का तरीका, लागत, भूमि, जलवायु और फायदे

टमाटर पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा खाई जाने वाली एक लोकप्रिय सब्जी है। इसका इस्तेमाल लगभग हर प्रकार की सब्जियों में होता है। इसका उपयोग सब्जियों के अलावा सलाद में भी किया जाता है। यहा तक व्यापारिक स्तर पर इसके ताजे फल के अतिरिक्त परिरक्षित करके सॉस (केचप), प्यूरी, जूस, सूप, अचार इत्यादि के रूप में भी इसका इस्तेमाल होता है। जिस वजह से यह पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा बिकते भी है। इसलिए किसान इसकी खेती हर मौसम में नियमित रूप से करता है और इससे अच्छा व्यापार करके खूब पैसा भी कमाता है। आमतौर पर टमाटर लाल, हरे रंग के होते है। लेकिन हम आपको टमाटर की एक ऐसी किस्म के बारे में बताने वाले है, जिसका रंग काला है। विशिष्ट रूप से दिखने वाला यह काला टमाटर अपने इस काले रंग की वजह से काफी लोकप्रिय है। यह एक विदेशी किस्म है। इसे यूरोप के मार्केट  का ’सुपर फूड’ या इंडिगो रोज टोमेटो के नाम से जानते है। सबसे पहले यूरोप में काला टमाटर की नर्सरी तैयार की गयी थी। इसमे बैंगनी टमाटर और इंडिगो रोज रेड के बीजो को मिलाकर एक नए बीज का निर्माण किया गया, जिससे हाइब्रिड काला टमाटर की उत्पत्ति हुई। विदेशों में बड़े पैमाने पर उत्पादित होने वाला काला टमाटर (इंडिगो रोज टोमेटो) अब भारत में भी तैयार हो रहा है। यहां की मिट्टी और जलवायु के अनुकूल होने के कारण यहां काले टमाटर की खेती शुरू हो गई है। यूरोप के इंडिगो रोज टोमेटो’ की खेती भारत के कई जगहों पर आसानी से हो रही है। माना जा रहा है कि काला टमाटर की खेती से किसानों को काफी फायदा हो सकता है। आईए ट्रैक्टरगुरु के इस लेख के माध्यम से ’इंडिगो रोज टोमेटो’ (काला टमाटर) की खेती के बारे में जानते है।

काले टमाटर की खासियत

बताया जा रहा है कि काला टमाटर की नर्सरी सबसे पहले ब्रिटेन में तैयार की गई थी। इसकी खेती की शुरुआत भी सबसे पहले इंग्लैंड में हुई। इसका श्रेय रे ब्राउन को जाता है। उन्होंने जेनेटिक म्युटेशन से काले टमाटर तैयार किए थे। इसे इंडिगो रोज टोमेटो (काला टमाटर) नाम दिया गया था। इस टमाटर की खास बात यह है, कि इसका प्रयोग कैंसर की बीमारी से लड़ने के अलावा और भी कई बीमारियों में किया जाता है। काले टमाटर आरंभिक अवस्था में थोड़ा काला और पकने पर पूरी तरह काला हो जाता है। तोड़ने के बाद भी यह कई दिनों तक ताजा बना रहता है एवं जल्दी खराब नहीं होता। इसमें बीज भी कम होते हैं और देखने में ऊपर से काला होता है, लेकिन अंदर से यह लाल रंग का होता हैं। काले टमाटर के बीज भी सामान्य लाल टमाटर की तरह ही होते हैं। लाल टमाटर के तुलना में इसका स्वाद कुछ अलग नमकीन होता है। ज्यादा मीठापन नहीं होने के कारण शुगर के मरीजों के लिए काफी लाभदायक है। शुगर और दिल के मरीज काले टमाटर का सेवन आसानी से कर सकते है।

काले टमाटर में पाए जानें वाले औषधीय गुण

काले टमाटर के अंदर कई तरह के पोषक तत्व जैसे कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, कैल्शियम, विटामिन-ए, सी, मिनरल्स, आयरन फास्फोरस एवं अन्य खनिज लवण प्रचुर मात्रा में उपस्थित रहते है, जो ब्लड प्रेशर कंट्रोल करने में मददगार है। इसमे फ्री रेडिकल्स से लड़ने की क्षमता होती है, जिस वजह से कैंसर के बचाव में काफी मदद मिलती है। इसके अलावा इसमें इंथोसाइनिन भी होता है, जो हार्ट अटैक से बचाता है। इतना ही नहीं इसमे अच्छे कोलेस्ट्रॉल की मात्रा अधिक होती है, जो वजन कम करने में मददगार है। कुल मिलाकर काले टमाटर का सेवन मानव शरीर के लिए काफी फायदेमंद माना जा रहा है।

इंडि‍गो रोज टोमेटो (काले टमाटर) की खेती में लागत और कमाई

इंडि‍गो रोज टोमेटो कह जाने वालें काले टमाटर की खेती पहली बार भारत में होने जा रही है। इसकी खेती भी लाल टमाटर की तरह ही होती है। इसके लिए कुछ अलग से करने की जरूरत नहीं होगी। अभी तक भारत में काले टमाटर की खेती नहीं की जाती है, लेकिन पहली बार इसकी खेती की जाएगी। काले टमाटर के बीज का एक पैकेट जिसमें 130 बीज होते हैं 110 रुपए का मिलता है। अब इसके बीज भारत में भी उपलब्ध है। किसान इसके बीज ऑनलाइन भी खरीद सकते हैं। यह टमाटर गर्म क्षेत्रों में अच्छे से उगाया जा सकता है। ठंढे क्षेत्रों में इसे पकने में परेशानी हो सकती है। जनवरी महीने में काले टमाटर की नर्सरी तैयार की जा सकती है और मार्च के अंत तक इसकी तैयार नर्सरी की रोपाई की जा सकती है। यह लाल टमाटर के मुकाबले थोड़ा देर से होता है। लाल टमाटर करीब तीन महीने में पक जाता है, लेकिन इसको पकने में करीब तीन से चार महीने का समय लगता है। लाल टमाटर के बराबर ही काले टमाटर की खेती में खर्चा होता है। इसकी खेती मे केवल बीज का खर्च बढ़ता है। खेती का खर्च निकालकर प्रति हेक्टेयर 3 से 4 लाख का मुनाफा हो सकता है। इस हिसाब से काले टमाटर की फसल किसानों के लिए नियमित आय का एक बेहतर जरिया बन सकता है।

काले टमाटर की खेती के लिए भूमि का चुनाव

काले टमाटर की नर्सरी सबसे पहले ब्रिटेन में तैयार की गई थी, लेकिन अब भारत में इसकी खेती कई क्षेत्रों में होने लगी है। यहां मिट्टी और जलवायु इसकी खेती के लिए अनुकूल है। आस्ट्रेलिया में बड़े पैमाने पर उत्पाद‍ित होने वाला इंड‍िगो रोज टोमेटो (काला टमाटर) अब झारखंड के रामगढ़ में भी तैयार हो रहा है। यहां के किसानों का कहना है कि यहां की जलवायु को काले टमाटर की खेती के लिए उपयुक्त माना गया है। इसे भी आप लाल टमाटर की तरह ही ऊगा सकते है। लाल टमाटर की तरह ही इसकी खेती भी चिकनी, दोमट, काली लाल मिट्टी इत्यादि हर प्रकार की मिट्टी में सफलतापूर्वक की जा सकती है। लेकिन मिट्टी जीवांश और कार्बनिक गुणों एवं अच्छी जल निकासी वाली होनी चाहिए। मिट्टी का पी.एच मान भी 6 से 7 के मध्य होना चाहिए। भारत में झारखंड, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में इसकी खेती होने लगी है।

FAQ

Que 1. काले टमाटर को पकने में कितना समय लगता है?

Ans. काले टमाटर को पकने में करीब 93 दिन का समय लगता है।

Que 2. काले टमाटर के पौधे कितने बड़े होते हैं?

Ans. लाल टमाटर की तरह ही काले टमाटर के पौधे भी तीन से चार फीट लंबे होते हैं, जबकि इसके फल मध्यम आकार के लाभ टमाटर के साइज के होते है।

Que 3. काले टमाटर की बुवाई कौनसे महीने में की जाती है?

Ans. जनवरी महीने में काले टमाटर की नर्सरी तैयार की जा सकती है और मार्च के अंत तक इसकी तैयार नर्सरी की रोपाई की जा सकती है।

Que 4. काले टमाटर की सबसे अच्छी किस्म कौन सी है?

Ans. इंडिगो रोज टोमेटो (काला टमाटर) सबसे उन्नत किस्म है।

Que 5. काले टमाटर की खेती के लिये उपयुक्त मिट्टी कौन सी है?

Ans. काले टमाटर खेती के लिए जीवांश और कार्बनिक गुणों भरपूर चिकनी, दोमट, काली लाल मिट्टी में सफलतापूर्वक की जा सकती है। मिट्टी अच्छी जल निकासी वाली होनी चाहिए। मिट्टी का पी.एच मान भी 6 से 7 के मध्य होना चाहिए।

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