बिहार में चने की खेती को बढ़ावा देने के लिए कृषि विभाग ने किसानों को आर्थिक सहायता देने का फैसला किया है। इसके तहत राज्य में हरे चने की अगेती किस्म की खेती को प्रोत्साहित किया जाएगा और किसानों को इसके बीज उपलब्ध कराए जाएंगे। इस पहल का उद्देश्य किसानों की आमदनी बढ़ाना और रबी सीजन में हरे चने का उत्पादन बढ़ाना है।
कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा के अनुसार, कृषि विभाग हरे चने की अगेती किस्म की खेती के लिए विशेष प्रदर्शन कार्यक्रम चला रहा है। इसके जरिए किसानों को इस किस्म की खेती के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। साथ ही, बाजार में हरे चने की मांग को देखते हुए इसकी उपलब्धता सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया जा रहा है। इससे किसानों को अपनी उपज बेचने के बेहतर अवसर मिल सकते हैं।
मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने बताया कि हरे चने की अगेती किस्म की खेती को बढ़ावा देने के लिए बिहार के 10 जिलों में विशेष कार्यक्रम चलाया जाएगा। इनमें पटना, नालंदा, भोजपुर, गया जी, जहानाबाद, औरंगाबाद, भागलपुर, जमुई, लखीसराय और समस्तीपुर शामिल हैं। इस योजना के तहत कुल 6,250 एकड़ जमीन पर हरे चने की खेती का लक्ष्य रखा गया है।
इस योजना के लिए सरकार ने करीब 2.50 करोड़ रुपये का बजट तय किया है। इसके तहत पात्र किसानों को हरे चने की अगेती खेती करने के लिए प्रति एकड़ 4,000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। इससे किसानों को इस किस्म की खेती शुरू करने में मदद मिलेगी और राज्य में हरे चने का उत्पादन बढ़ाने को प्रोत्साहन मिलेगा।
कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने बताया कि चने की खेती को बढ़ावा देने के लिए बिहार के 10 जिलों को चुना गया है। इन जिलों के किसानों को 15 नवंबर तक बीज और खेती के लिए जरूरी अन्य सामग्री दी जाएगी। इस कार्यक्रम को कृषि विभाग की यूनिट कॉस्ट कमिटी की ओर से सुझाए गए मॉडल के अनुसार चलाया जाएगा। मंत्री ने बताया कि योजना के लिए तय बजट के तहत जिलों और किसानों को दिए गए बीजों की लागत बिहार राज्य बीज निगम लिमिटेड, पटना को दी जाएगी। इससे किसानों तक समय पर बीज पहुंचाने और चने की खेती को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी।
कृषि मंत्री के अनुसार, अगर किसान अगेती चने की खेती करते हैं, तो उन्हें बाजार में अच्छा दाम मिलेगा. वहीं, हरे चने की अगेती किस्मों को बढ़ावा देने से किसानों को बाजार में फसल की शुरुआती आवक के दौरान बेहतर अवसर मिल सकते हैं। उन्होंने कहा कि बिहार के कुछ क्षेत्रों में उत्पादित हरा चना दूसरे जिलों के बाजारों तक भी पहुंचता है। ऐसे में वैज्ञानिक तरीके से खेती, गुणवत्तापूर्ण बीज की उपलब्धता और समय पर बुआई किसानों के लिए लाभकारी साबित हो सकती है। कृषि विभाग का प्रयास है कि किसानों को ऐसी फसलों की खेती के लिए प्रोत्साहित किया जाए, जिनसे उनकी आमदनी बढ़ाने की संभावनाएं मजबूत हों।
प्रश्न 1. बिहार में हरे चने की अगेती खेती पर कितनी सहायता मिलेगी?
उत्तर: इस कार्यक्रम के तहत पात्र किसानों को हरे चने की अगेती खेती के लिए ₹4,000 प्रति एकड़ की आर्थिक सहायता देने का प्रावधान है।
प्रश्न 2. बिहार के किन जिलों में हरे चने की अगेती खेती को बढ़ावा दिया जाएगा?
उत्तर: इस कार्यक्रम में पटना, नालंदा, भोजपुर, गया, जहानाबाद, औरंगाबाद, भागलपुर, जमुई, लखीसराय और समस्तीपुर जिले शामिल हैं।
प्रश्न 3. बिहार में हरे चने की खेती का कितना लक्ष्य रखा गया है?
उत्तर: इस योजना के तहत कुल 6,250 एकड़ जमीन पर हरे चने की अगेती खेती कराने का लक्ष्य रखा गया है।
प्रश्न 4. हरे चने की खेती के लिए किसानों को बीज कब तक दिए जाएंगे?
उत्तर: चयनित जिलों के किसानों को 15 नवंबर तक बीज और खेती के लिए जरूरी सामग्री उपलब्ध कराने की योजना है।
प्रश्न 5. हरे चने की अगेती खेती को बढ़ावा देने का उद्देश्य क्या है?
उत्तर: इस पहल का उद्देश्य हरे चने का उत्पादन बढ़ाना, बाजार में इसकी उपलब्धता बेहतर करना और किसानों को फसल की शुरुआती आवक के दौरान अच्छे दाम मिलने के अवसर उपलब्ध कराना है।
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